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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग-I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 1 में भारत का वर्णन 'राज्यों का संघ' (Union of States) के रूप में किया गया है, न कि 'राज्यों का परिसंघ' (Federation of States), क्योंकि भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है और न ही किसी राज्य को संघ से अलग होने की स्वतंत्रता है।
- 2. अनुच्छेद 2 संसद को यह शक्ति देता है कि वह विधि द्वारा ऐसे नियमों और शर्तों पर, जो वह ठीक समझे, संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना कर सकती है, तथा इसके अंतर्गत स्थापित किए जाने वाले नए राज्य वे भू-भाग हैं जो पहले से भारत संघ का आंतरिक हिस्सा नहीं थे।
- 3. अनुच्छेद 3 के तहत किसी राज्य के क्षेत्रफल को बढ़ाने, घटाने, उसके नाम या सीमा में परिवर्तन करने संबंधी विधेयक को संसद में प्रस्तुत करने से पूर्व राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश अनिवार्य है, तथा राष्ट्रपति को ऐसा विधेयक संसद में प्रस्तुत करने से पूर्व संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसकी राय जानने के लिए भेजना अनिवार्य होता है, बशर्ते राज्य विधानमंडल द्वारा दी गई राय को मानना संसद के लिए संवैधानिक रूप से सर्वदा बाध्यकारी हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 1 में भारत को 'राज्यों का संघ' (Union of States) कहा गया है। डॉ. भीमराव अंबेडकर के अनुसार, 'संघ' शब्द का प्रयोग दो कारणों से किया गया है—एक तो यह कि भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है, और दूसरा यह कि किसी भी राज्य को संघ से अलग होने (Secession) का अधिकार नहीं है।
कथन 2 सही है: अनुच्छेद 2 संसद को नए राज्यों के प्रवेश या उनकी स्थापना की शक्ति प्रदान करता है, और इसके दायरे में वे बाहरी क्षेत्र या विदेशी भू-भाग आते हैं जो पूर्व में भारत संघ का हिस्सा नहीं थे।
कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 3 के अंतर्गत राज्य के पुनर्गठन या सीमा परिवर्तन से संबंधित विधेयक पर राज्य विधानमंडल की राय लेना अनिवार्य है, किंतु राज्य विधानमंडल द्वारा व्यक्त की गई राय या सिफारिश को मानना संसद के लिए संवैधानिक रूप से **बाध्यकारी (Binding) नहीं** है। संसद राज्य की राय को स्वीकार या अस्वीकार करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।
अधिक जानकारी और विस्तृत नोट्स के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
कथन 2 सही है: अनुच्छेद 2 संसद को नए राज्यों के प्रवेश या उनकी स्थापना की शक्ति प्रदान करता है, और इसके दायरे में वे बाहरी क्षेत्र या विदेशी भू-भाग आते हैं जो पूर्व में भारत संघ का हिस्सा नहीं थे।
कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 3 के अंतर्गत राज्य के पुनर्गठन या सीमा परिवर्तन से संबंधित विधेयक पर राज्य विधानमंडल की राय लेना अनिवार्य है, किंतु राज्य विधानमंडल द्वारा व्यक्त की गई राय या सिफारिश को मानना संसद के लिए संवैधानिक रूप से **बाध्यकारी (Binding) नहीं** है। संसद राज्य की राय को स्वीकार या अस्वीकार करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।
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Related Questions
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रिट (Writ) जारी करने की शक्ति सर्वोच्च न्यायालय को किस अनुच्छेद से मिलती है?
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भारतीय संविधान के भाग IV-A के अंतर्गत समाविष्ट 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को स्वर्ण सिंह समिति (1976) की सिफारिशों पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान में जोड़ा गया था, किंतु इस समिति ने करों का भुगतान (Payment of Taxes) करने को भी एक मूल कर्तव्य के रूप में शामिल करने की संस्तुति की थी, जिसे तत्कालीन सरकार ने स्वीकार नहीं किया था।
2. मूल प्रकृति से ये कर्तव्य केवल भारतीय नागरिकों पर ही लागू होते हैं, विदेशी नागरिकों पर नहीं; तथा संविधान में इनका प्रवर्तन (Enforcement) सीधे न्यायालयों के माध्यम से नहीं किया जा सकता है, किंतु संसद विधि द्वारा इनके क्रियान्वयन के लिए उपयुक्त दंड या शास्ति का प्रावधान कर सकती है।
3. 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के माध्यम से छह से चौदह वर्ष की आयु के बीच के अपने बच्चे को शिक्षा के अवसर प्रदान करने का कर्तव्य जोड़ा गया, जिससे मूल कर्तव्यों की कुल संख्या बढ़कर वर्तमान में ग्यारह हो गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश प्रख्यापित करने की क्षमता और मुख्यमंत्री तथा मंत्रिपरिषद के संबंधों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 213 के अनुसार राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की वही शक्ति और प्रभाव होता है जो राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी अधिनियम का होता है, किंतु राज्यपाल अपनी इस विधायी शक्ति का प्रयोग स्वतंत्र रूप से कर सकता है और इसके लिए राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह लेना अनिवार्य नहीं है।
2. राज्यपाल को संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत क्षमादान की शक्ति प्राप्त है, जिसके अंतर्गत वह किसी राज्य विधि के विरुद्ध किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराए गए व्यक्ति के दंड को क्षमा, उसका प्रहरण, विराम या परिहार कर सकता है, और मृत्युदंड के मामलों में भी उसकी यह शक्ति राष्ट्रपति के समान ही समवर्ती और व्यापक होती है।
3. अनुच्छेद 167 के अंतर्गत मुख्यमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासन से संबंधित और विधानविषयक प्रस्तावों से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे तथा राज्यपाल द्वारा माँगे जाने पर ऐसी सूचना प्रदान करे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राज्यसभा का पदेन अध्यक्ष?
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 315 के अनुसार प्रत्येक राज्य के लिए एक लोक सेवा आयोग का होना अनिवार्य है, किंतु दो या अधिक राज्य यह करार कर सकते हैं कि उनमें से उन राज्यों के समूहों के लिए एक ही लोक सेवा आयोग होगा, बशर्ते संबंधित राज्य की विधानसभा इस आशय का संकल्प पारित कर दे और संसद विधि द्वारा ऐसा प्रावधान करे।
2. अनुच्छेद 317 के प्रावधानों के तहत संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को केवल 'कदाचार' (Misbehavior) के आधार पर उसके पद से हटाया जा सकता है, और ऐसे कदाचार के आरोपों की जांच सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की जाती है, जिसकी सलाह राष्ट्रपति के लिए पूर्णतः बाध्यकारी होती है, भले ही जांच में सदस्य निर्दोष पाया जाए।
3. अनुच्छेद 320 के अंतर्गत संघ लोक सेवा आयोग अखिल भारतीय सेवाओं, केंद्रीय सेवाओं और केंद्र शासित प्रदेशों की सेवाओं के लिए नियुक्तियों की परीक्षाओं का संचालन करता है, तथा आयोग को यह संवैधानिक अधिकार प्राप्त है कि वह राज्यपाल या राष्ट्रपति के अनुरोध पर किसी भी लोक सेवा से संबंधित मामले पर अपनी सलाह दे, और उसकी यह सलाह सरकार के लिए सर्वथा बाध्यकारी होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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