BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Indian Polity
7 views

भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति की निर्वाचन पद्धति, प्रधानमंत्री की शक्तियों और केंद्रीय मंत्रिपरिषद के उत्तरदायित्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार भारत के उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के सभी सदस्यों (निर्वाचित एवं मनोनीत) से मिलकर बनने वाले निर्वाचकगण द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है, जिसमें राज्य विधानमंडलों के सदस्यों को कोई स्थान नहीं दिया जाता है।
  2. 2. अनुच्छेद 75 के उपबंधों के तहत मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, किंतु इसका यह अर्थ नहीं है कि किसी एक मंत्री के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना होगा, बल्कि यह सामूहिक उत्तरदायित्व नीतिगत निर्णयों और संपूर्ण सरकार के स्थायित्व पर लागू होता है।
  3. 3. अनुच्छेद 78 के अनुसार प्रधानमंत्री का यह कर्तव्य है कि वह संघ के प्रशासन से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय और विधानविषयक प्रस्ताव राष्ट्रपति को संसूचित करे, तथा यदि राष्ट्रपति किसी ऐसे विषय पर मंत्रिपरिषद के विचार के बिना ही कोई निर्णय लेने का निर्देश दे जिस पर किसी मंत्री ने विनिश्चय कर लिया है किन्तु मंत्रिपरिषद ने विचार नहीं किया है, तो राष्ट्रपति के कहे जाने पर प्रधानमंत्री को वह मामला मंत्रिपरिषद के समक्ष विचार के लिए रखना अनिवार्य होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से बने निर्वाचक मंडल द्वारा होता है और इसमें राज्य विधानसभाओं के सदस्य भाग नहीं लेते हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि मंत्रिपरिषद का सामूहिक उत्तरदायित्व इस प्रकार कार्य करता है कि लोकसभा में यदि एक भी मंत्री के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाए या कोई महत्वपूर्ण नीतिगत विधेयक गिर जाए, तो संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है, क्योंकि वे 'एक के लिए सब और सब के लिए एक' के सिद्धांत पर कार्य करते हैं। कथन 3 सही है क्योंकि अनुच्छेद 78(c) के अनुसार यदि राष्ट्रपति ऐसा अपेक्षा करे, तो किसी ऐसे विषय को जिस पर किसी मंत्री ने विनिश्चय कर लिया है किन्तु मंत्रिपरिषद ने विचार नहीं किया है, मंत्रिपरिषद के समक्ष विचार के लिए रखना प्रधानमंत्री का संवैधानिक कर्तव्य है। अधिक गहन अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
Share:

Related Questions

भारत में निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनाव सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, तथा संविधान में यह स्पष्ट रूप से उपबंधित किया गया है कि निर्वाचन आयुक्तों की सेवा शर्तें और पदावधि संसद द्वारा बनाई गई विधि के अनुसार ही निर्धारित होंगी। 2. मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की संस्तुति के बिना किसी भी परिस्थिति में उनके पद से नहीं हटाया जा सकता है। 3. निर्वाचन आयोग को संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के निर्वाचनों के साथ-साथ किसी राज्य में पंचायतों और नगरपालिकाओं के निर्वाचनों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति भी संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत ही प्राप्त है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? राज्य विधानमंडल के अंतर्गत 'विधान परिषद' (Legislative Council) के सृजन, उत्सादन, संरचना और इसकी विधायी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 169 के अनुसार संसद किसी राज्य में विधान परिषद के सृजन या उत्सादन के लिए विधि बना सकती है, बशर्ते संबंधित राज्य की विधानसभा ने कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से इस आशय का संकल्प पारित कर दिया हो। 2. विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, किंतु किसी भी परिस्थिति में विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या 40 से कम नहीं होनी चाहिए (अपवाद स्वरूप जम्मू-कश्मीर विधान परिषद जब अस्तित्व में थी तब इसकी संख्या भिन्न थी)। 3. विधान परिषद के कुल सदस्यों का 1/12 भाग ऐसे स्नातकों (Graduates) द्वारा निर्वाचित होता है जो उस राज्य में कम से कम तीन वर्ष से निवास कर रहे हों, तथा एक अन्य 1/12 भाग ऐसे अध्यापकों द्वारा चुना जाता है जो राज्य के भीतर माध्यमिक विद्यालयों से नीचे स्तर के शिक्षण संस्थानों में कम से कम तीन वर्ष से अध्यापन कार्य कर रहे हों। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के भाग, अनुसूचियों और राजभाषा से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें विभिन्न संवैधानिक संशोधनों (जैसे 21वें, 71वें, 92वें और 96वें संशोधन) के माध्यम से जोड़कर वर्तमान में 22 कर दिया गया है, और इस अनुसूची में अंग्रेजी तथा राजस्थानी दोनों ही भाषाएँ वर्तमान में शामिल नहीं हैं। 2. संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 348 में यह उपबंधित किया गया है कि उच्चतम न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय में सभी कार्यवाहियाँ जब तक संसद विधि द्वारा उपबंध न करे, अंग्रेजी भाषा में ही होंगी, और राज्यपाल राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से उच्च न्यायालय की कार्यवाही में हिंदी भाषा या किसी अन्य भाषा के प्रयोग को प्राधिकृत कर सकता है। 3. राजनीतिक दलों के पंजीकरण (Registration) और उन्हें राष्ट्रीय या राज्यीय दल के रूप में मान्यता देने की शक्ति भारत के निर्वाचन आयोग को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत प्राप्त है, तथा दसवीं अनुसूची के अंतर्गत दलबदल विरोधी कानून के तहत किसी दल का किसी अन्य दल में विलय तभी वैध माना जाता है जब उस दल के कम से कम दो-तिहाई (2/3) सदस्य उस विलय के पक्ष में हों। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? प्रथम संविधान संशोधन कब हुआ? संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, तथा इनमें से प्रत्येक सदस्य अपने पद ग्रहण करने की तारीख से छह वर्ष की अवधि तक या पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक, इनमें से जो भी पहले हो, अपने पद पर बना रहता है। 2. संविधान के अनुच्छेद 317 के उपबंधों के तहत संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के किसी भी सदस्य को उसके पद से केवल राष्ट्रपति के आदेश द्वारा ही हटाया जा सकता है, भले ही वह राज्य लोक सेवा आयोग का सदस्य क्यों न हो, और राज्यपाल को राज्य आयोग के किसी सदस्य को हटाने की कोई शक्ति प्राप्त नहीं होती है। 3. अनुच्छेद 318 के अंतर्गत राष्ट्रपति को संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों की संख्या और उनकी सेवा की शर्तों के नियम बनाने की शक्ति प्राप्त है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के मामले में यह शक्ति केवल संबंधित राज्य के राज्यपाल में निहित होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.