त्वरित लिंक्स
Indian Polity
8 views
भारतीय संविधान की अनुसूचियों, राजभाषा के उपबंधों और राजनीतिक दलों से संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संशोधनों (जैसे 21वें, 71वें और 92वें संविधान संशोधन) के माध्यम से बढ़ाकर वर्तमान में 22 कर दिया गया है, और अंग्रेजी भाषा को इस अनुसूची में शामिल नहीं किया गया है।
- 2. दसवीं अनुसूची (जिसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ा गया था) के अंतर्गत यदि किसी राजनीतिक दल के कम से कम दो-तिहाई (2/3) सदस्य किसी अन्य दल में विलय (Merger) कर लेते हैं, तो दल-बदल के आधार पर उनकी सदस्यता अयोग्य नहीं ठहराई जाएगी।
- 3. संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 348 यह प्रावधान करता है कि उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों की सभी कार्यवाहियाँ तथा संसद और राज्य विधानमंडलों द्वारा पारित सभी अधिनियमों के आधिकारिक पाठ अनिवार्य रूप से केवल हिंदी भाषा में ही होंगे, सिवाय इसके कि राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से अंग्रेजी का उपयोग किया जाए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं। सिंधी को 21वें संशोधन (1967) द्वारा; कोंकणी, मणिपुरी और नेपाली को 71वें संशोधन (1992) द्वारा; तथा बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली को 92वें संशोधन (2003) द्वारा जोड़ा गया, जिससे इनकी कुल संख्या 22 हो गई है। अंग्रेजी इसमें शामिल नहीं है।
कथन 2 सही है: 52वें संविधान संशोधन (1985) द्वारा जोड़ी गई दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) में 91वें संशोधन (2003) के माध्यम से यह प्रावधान किया गया कि यदि किसी दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्य किसी अन्य दल में विलय करते हैं, तो उन्हें दलबदल के आधार पर अयोग्य नहीं माना जाएगा।
कथन 3 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 348 के अनुसार, जब तक संसद विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे, तब तक उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों की सभी कार्यवाहियाँ तथा संसद व विधानमंडलों के सभी अधिनियमों के आधिकारिक पाठ **अंग्रेजी भाषा** में होंगे (न कि केवल हिंदी में)। हिंदी का प्रयोग वैकल्पिक रूप से उच्च न्यायालयों में राज्यपाल की अनुमति से किया जा सकता है।
अधिक जानकारी और विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट कर सकते हैं।
कथन 2 सही है: 52वें संविधान संशोधन (1985) द्वारा जोड़ी गई दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) में 91वें संशोधन (2003) के माध्यम से यह प्रावधान किया गया कि यदि किसी दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्य किसी अन्य दल में विलय करते हैं, तो उन्हें दलबदल के आधार पर अयोग्य नहीं माना जाएगा।
कथन 3 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 348 के अनुसार, जब तक संसद विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे, तब तक उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों की सभी कार्यवाहियाँ तथा संसद व विधानमंडलों के सभी अधिनियमों के आधिकारिक पाठ **अंग्रेजी भाषा** में होंगे (न कि केवल हिंदी में)। हिंदी का प्रयोग वैकल्पिक रूप से उच्च न्यायालयों में राज्यपाल की अनुमति से किया जा सकता है।
अधिक जानकारी और विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट कर सकते हैं।
Related Questions
→
लोकसभा में SC के लिए कितनी सीटें आरक्षित हैं?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) की क्षेत्राधिकारिता और अधीनस्थ न्यायालयों के नियंत्रण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय को मूल अधिकार के प्रवर्तन के साथ-साथ किसी अन्य प्रयोजन के लिए भी रिट (Writs) जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और इस संदर्भ में उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) का दायरा उच्चतम न्यायालय की तुलना में अधिक विस्तृत है, क्योंकि उच्चतम न्यायालय केवल मूल अधिकारों के उल्लंघन पर ही रिट जारी कर सकता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 233 के अनुसार किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति उस राज्य के राज्यपाल द्वारा संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करने के पश्चात ही की जाती है, और जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने वाले व्यक्ति के लिए यह अनिवार्य है कि वह कम से कम पिछले सात वर्षों से अधिवक्ता या बैरिस्टर रहा हो और संघ या राज्य की सेवा में पहले से कार्यरत न हो।
3. संविधान के अनुच्छेद 235 के तहत राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों (Subordinate Courts) पर नियंत्रण, जिसमें जिला न्यायालयों और उनके अधीनस्थ न्यायालयों के अधिकारियों की पोस्टिंग, प्रमोशन और छुट्टी से संबंधित नियंत्रण शामिल है, पूरी तरह से संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय में निहित होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के भाग IV में वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP - अनुच्छेद 36-51) के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 39A में 'समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता' का प्रावधान किया गया है, जिसे मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इसे 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा अंतःस्थापित किया गया था।
2. अनुच्छेद 48A के अनुसार राज्य, देश के पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन तथा वन और वन्य जीवों की रक्षा करने का प्रयास करेगा, और इस नीति निर्देशक तत्व को भी 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा ही संविधान में जोड़ा गया था।
3. नीति निर्देशक तत्वों के अंतर्गत आने वाले सभी प्रावधान प्रकृति से न्यायोचित (Justiciable) हैं, जिसका अर्थ है कि यदि राज्य इनका पालन करने में विफल रहता है, तो कोई भी नागरिक सीधे उच्चतम न्यायालय के समक्ष अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका दायर कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना करने की शक्ति किसमें निहित है?
→
भारतीय संविधान के भाग-IVक के अंतर्गत वर्णित 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) के प्रावधानों, उनके ऐतिहासिक विकास तथा उनकी विधिक प्रकृति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को सरदार स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुति के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में अंतःस्थापित किया गया था, और समिति ने करों का भुगतान (Payment of Taxes) करने को भी एक मूल कर्तव्य के रूप में शामिल करने की सिफारिश की थी, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया था।
2. संविधान के अनुच्छेद 51क के तहत प्रदत्त मूल कर्तव्य केवल भारतीय नागरिकों पर ही लागू होते हैं, विदेशी नागरिकों पर नहीं, तथा इनकी प्रकृति न्यायोचित (Justiciable) नहीं है, जिसका तात्पर्य यह है कि यदि कोई नागरिक किसी मूल कर्तव्य का उल्लंघन करता है, तो उसे सीधे न्यायालय द्वारा दंडित नहीं किया जा सकता, जब तक कि इसके प्रवर्तन के लिए संसद द्वारा कोई विशिष्ट विधि न बनाई गई हो।
3. 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के माध्यम से संविधान में 11वाँ मूल कर्तव्य जोड़ा गया, जिसके तहत छह से चौदह वर्ष की आयु के बीच के अपने बच्चे या प्रतिपाल्य (ward) को शिक्षा के अवसर प्रदान करने का दायित्व संबंधित माता-पिता या संरक्षक का होगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.