Indian Polity
Asked 2 months ago · Viewed 22 times
भारतीय संविधान के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों तथा राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 356 के अनुसार राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि यदि वह राज्यपाल की रिपोर्ट पर या अन्यथा इस बात से संतुष्ट हो जाता है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें किसी राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार नहीं चलाई जा सकती है, तो वह राज्य में राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा कर सकता है, तथा इस उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा जारी होने की तारीख से दो महीने के भीतर अनुमोदित किया जाना अनिवार्य होता है।
- 2. 'एस.आर. बोम्बाई बनाम भारत संघ' (1994) वाद में उच्चतम न्यायालय द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से बाहर है और अदालतें इस बात की जांच नहीं कर सकती हैं कि राष्ट्रपति की संतुष्टि किस आधार पर आधारित थी।
- 3. अनुच्छेद 356 के तहत जारी राष्ट्रपति शासन की अधिकतम अवधि तीन वर्ष तक हो सकती है, किंतु एक वर्ष से आगे इसे बढ़ाने के लिए प्रत्येक छह महीने पर संसद की स्वीकृति की आवश्यकता होती है, और इसके साथ ही यह अनिवार्य शर्त है कि उस समय पूरे देश में या संबंधित राज्य के पूरे हिस्से में राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) लागू होना चाहिए या चुनाव आयोग द्वारा यह प्रमाणित किया जाना चाहिए कि राज्य में विधानसभा के चुनाव कराना तुरंत संभव नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत यदि राष्ट्रपति को राज्यपाल की रिपोर्ट या अन्य माध्यमों से यह समाधान हो जाता है कि राज्य का शासन संविधान के प्रावधानों के अनुरूप नहीं चल रहा है, तो वह राष्ट्रपति शासन की घोषणा कर सकता है। इस उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा जारी होने की तिथि से 2 माह के भीतर अनुमोदित होना अनिवार्य है (44वें संविधान संशोधन 1978 से पहले यह अवधि 2 महीने थी, और 44वें संशोधन द्वारा इसे घटाकर 2 महीने किया गया, मूल रूप से यह दो महीने ही है)। कथन 2 गलत है: 'एस.आर. बोम्बाई बनाम भारत संघ' (1994) के ऐतिहासिक निर्णय में उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा न्यायिक समीक्षा के दायरे में आती है और यदि यह असंवैधानिक या दुर्भावनापूर्ण पाई जाती है, तो न्यायालय इसे रद्द कर सकता है। कथन 3 गलत है: राष्ट्रपति शासन की अधिकतम अवधि 3 वर्ष हो सकती है (प्रत्येक 6 महीने पर अनुमोदन के साथ), किंतु इसे 1 वर्ष से आगे बढ़ाने के लिए यह शर्त आवश्यक है कि देश में राष्ट्रीय आपातकाल लागू हो या चुनाव आयोग द्वारा यह प्रमाणित किया जाए कि राज्य में चुनाव कराना कठिन है, लेकिन इसके लिए पूरे देश में राष्ट्रीय आपातकाल का होना अनिवार्य शर्त नहीं है। विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
अगला प्रश्न →
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के संदर्भ में…
← पिछला प्रश्न
भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court)…
Related Questions
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और उनसे संबंधित विधायी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 11 के तहत संसद को नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में उपबंध करने की संपूर्ण शक्ति प्रदान की गई है, और इस शक्ति के प्रयोग में संसद द्वारा पारित 'भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955' में अब तक केवल एक बार ही संशोधन किया गया है।
2. अनुच्छेद 9 के अनुसार यदि भारत का कोई नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता अर्जित कर लेता है, तो भारत की नागरिकता स्वतः समाप्त (Termination of Citizenship) हो जाएगी, किंतु यह नियम उन मामलों में लागू नहीं होता जब देश में आपातकाल (Emergency) की घोषणा की गई हो।
3. जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के पश्चात केंद्र सरकार द्वारा प्रदत्त शक्तियों के अंतर्गत गृह मंत्रालय ने 'डोमिसाइल' (Domicile) से जुड़े नियमों को अधिसूचित किया है, जिसके तहत केंद्र शासित प्रदेश में एक निश्चित अवधि तक निवास करने वाले व्यक्तियों को वहां का मूल निवासी माना जाता है, किंतु नागरिकता देने या छीनने की अंतिम संप्रभु शक्ति केवल और केवल संसद के पास ही सुरक्षित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान की अनुसूचियों, भागों और राजभाषा से संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संवैधानिक संशोधनों (जैसे 21वें, 71वें और 92वें संशोधन) के माध्यम से जोड़कर वर्तमान में 22 भाषाएँ कर दिया गया है, और इस अनुसूची में अंग्रेजी भाषा को भी एक आधिकारिक क्षेत्रीय भाषा के रूप में शामिल किया गया है।
2. संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 343 से 351 तक संघ की राजभाषा का प्रावधान किया गया है, जिसके अनुसार संघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में हिंदी होगी, किंतु संसद को यह अधिकार दिया गया है कि वह विधि द्वारा अंग्रेजी भाषा के शासकीय प्रयोग को निरंतर रखने के लिए उपबंध कर सकती है।
3. संविधान की दसवीं अनुसूची, जिसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ा गया था, दलबदल के आधार पर संसद और राज्य विधानमंडलों के सदस्यों की निर्हता (Disqualification) से संबंधित प्रावधान करती है, तथा इसके तहत पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) द्वारा लिया गया निर्णय अंतिम होता है और वह किसी भी स्थिति में न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से बाहर होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश निर्माण तथा मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के संबंधों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल को राज्य विधानमंडल के सत्र में न होने पर अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और राज्यपाल इस शक्ति का प्रयोग अपने व्यक्तिगत विवेक से (मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना) किसी भी समय कर सकता है, यदि उसे ऐसा प्रतीत हो कि तत्काल कार्रवाई आवश्यक है।
2. संविधान के अनुच्छेद 164 के अनुसार मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की सलाह पर की जाती है, तथा मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से राज्य की विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
3. राज्यपाल को संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत क्षमादान की शक्ति प्राप्त है, जिसके अंतर्गत वह मृत्युदंड (Death Sentence) को पूरी तरह से क्षमा करने की शक्ति भी रखता है, जो राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति के पूर्णतः समरूप है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) की क्षेत्राधिकारिता और अधीनस्थ न्यायालयों के नियंत्रण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय को मूल अधिकार के प्रवर्तन के साथ-साथ किसी अन्य प्रयोजन के लिए भी रिट (Writs) जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और इस संदर्भ में उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) का दायरा उच्चतम न्यायालय की तुलना में अधिक विस्तृत है, क्योंकि उच्चतम न्यायालय केवल मूल अधिकारों के उल्लंघन पर ही रिट जारी कर सकता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 233 के अनुसार किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति उस राज्य के राज्यपाल द्वारा संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करने के पश्चात ही की जाती है, और जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने वाले व्यक्ति के लिए यह अनिवार्य है कि वह कम से कम पिछले सात वर्षों से अधिवक्ता या बैरिस्टर रहा हो और संघ या राज्य की सेवा में पहले से कार्यरत न हो।
3. संविधान के अनुच्छेद 235 के तहत राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों (Subordinate Courts) पर नियंत्रण, जिसमें जिला न्यायालयों और उनके अधीनस्थ न्यायालयों के अधिकारियों की पोस्टिंग, प्रमोशन और छुट्टी से संबंधित नियंत्रण शामिल है, पूरी तरह से संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय में निहित होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित 'राज्य के नीति निर्देशक तत्वों' (DPSP - अनुच्छेद 36-51) की प्रकृति, संशोधनों और न्यायिक व्याख्या के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के अंतर्गत निहित नीति निर्देशक सिद्धांतों को प्रभावी बनाने के लिए संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाई गई किसी विधि को इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को छीनती या न्यून करती है, और यह संरक्षण मूल संविधान में ही निहित था जिसे बाद में 42वें संविधान संशोधन द्वारा विस्तारित किया गया था।
2. निर्देशक तत्वों को न्यायपालिका द्वारा अपरिवर्तनीय (Non-justiciable) घोषित किया गया है, किंतु सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई ऐतिहासिक निर्णयों (जैसे मिनर्वा मिल्स वाद, 1980) में यह स्पष्ट किया है कि मूल अधिकार और नीति निर्देशक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं और इनके बीच का संतुलन संविधान के 'मूल ढाँचे' (Basic Structure) का एक अनिवार्य हिस्सा है।
3. अनुच्छेद 48 के तहत राज्य कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक प्रणालियों से संगठित करने के प्रयास करेगा, और विशेष रूप से गायों और बछड़ों तथा अन्य दुधारू और वाहक पशुओं की नस्लों के परीक्षण और सुधार के लिए तथा उनके वध का प्रतिषेध करने के लिए कदम उठाएगा, और यह एक समाजवादी विचारधारा पर आधारित नीति निर्देशक तत्व है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) और नए राज्यों के निर्माण या सीमा परिवर्तन की विधायी प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना ऐसे निबंधनों और शर्तों पर कर सके जो वह ठीक समझे, जबकि अनुच्छेद 3 के तहत संसद को मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन करने की शक्ति प्रदान की गई है।
2. अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के निर्माण या किसी राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन करने वाला कोई भी विधेयक संसद के किसी भी सदन में केवल तभी प्रस्तुत किया जा सकता है जब राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश प्राप्त हो, और राष्ट्रपति द्वारा ऐसा विधेयक संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसकी राय जानने के लिए भेजा जाना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है, भले ही राज्य विधानमंडल द्वारा दी गई राय को मानना संसद के लिए बाध्यकारी न हो।
3. अनुच्छेद 4 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3 के तहत नए राज्यों के प्रवेश, स्थापना, या राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित किए गए कानून संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए 'संविधान संशोधन' माने जाएंगे, जिसके लिए संसद के विशेष बहुमत तथा आधे राज्यों के विधानमंडलों के अनुसमर्थन की अनिवार्य आवश्यकता होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.