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Indian Polity
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राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश निर्माण तथा मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के संबंधों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल को राज्य विधानमंडल के सत्र में न होने पर अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति प्राप्त है, और राज्यपाल इस शक्ति का प्रयोग अपने व्यक्तिगत विवेक से (मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना) किसी भी समय कर सकता है, यदि उसे ऐसा प्रतीत हो कि तत्काल कार्रवाई आवश्यक है।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 164 के अनुसार मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की सलाह पर की जाती है, तथा मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से राज्य की विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
  3. 3. राज्यपाल को संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत क्षमादान की शक्ति प्राप्त है, जिसके अंतर्गत वह मृत्युदंड (Death Sentence) को पूरी तरह से क्षमा करने की शक्ति भी रखता है, जो राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति के पूर्णतः समरूप है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि राज्यपाल अनुच्छेद 213 के तहत अध्यादेश अपनी मर्जी से या मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना जारी नहीं कर सकता। राज्यपाल के लिए यह अनिवार्य है कि वह ऐसा करने से पहले मंत्रिपरिषद से सलाह ले (कुछ विशेष मामलों को छोड़कर जहाँ राष्ट्रपति के निर्देश की आवश्यकता होती है)। कथन 2 सत्य है; अनुच्छेद 164 के अनुसार मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करता है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति मुख्यमंत्री की सलाह पर होती है, साथ ही मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से राज्य विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होती है। कथन 3 असत्य है; भारतीय संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल को क्षमादान की शक्ति तो प्राप्त है, किंतु उसे मृत्युदंड को पूरी तरह से क्षमा (Pardon) करने की शक्ति प्राप्त नहीं है, और न ही वह सैन्य न्यायालय (Court Martial) के दंड को माफ कर सकता है। मृत्युदंड पर पूर्ण क्षमादान की शक्ति केवल भारत के राष्ट्रपति के पास है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पढ़ें।
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