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Indian Polity
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राज्य विधानमंडल के अंतर्गत विधानसभा और विधान परिषद के गठन, उनकी सदस्यता, तथा विधायी और वित्तीय शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 171 के अनुसार विधान परिषद के सदस्यों की संरचना एक विशिष्ट प्रकार की होती है, जिसमें कुल सदस्यों का 1/3 भाग स्थानीय निकायों के निर्वाचक मंडल द्वारा, 1/12 भाग स्नातकों द्वारा, 1/12 भाग अध्यापकों द्वारा, 1/3 भाग विधानसभा के सदस्यों द्वारा और शेष 1/6 भाग राज्यपाल द्वारा साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन और समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले व्यक्तियों में से मनोनीत किए जाते हैं।
  2. 2. साधारण विधियों (Ordinary Bills) के पारित होने की प्रक्रिया में, यदि विधानसभा द्वारा पारित कोई विधेयक विधान परिषद द्वारा अस्वीकार कर दिया जाता है या विधान परिषद उसमें ऐसे संशोधन करती है जिन्हें विधानसभा स्वीकार नहीं करती है, तो विधानसभा उस विधेयक को दोबारा पारित करके विधान परिषद के पास भेज सकती है, और विधान परिषद उसे अधिकतम चार महीने (प्रथम बार में 3 महीने और दूसरी बार में 1 महीना) तक ही और रोक सकती है।
  3. 3. राज्य की विधान परिषद को धन विधेयकों (Money Bills) के संबंध में अत्यंत सीमित शक्तियां प्राप्त हैं; विधानसभा द्वारा पारित धन विधेयक जब विधान परिषद के पास भेजा जाता है, तो विधान परिषद को उसे बिना किसी संशोधन के अधिकतम 14 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिशों के विधानसभा को वापस लौटाना अनिवार्य होता है, और यदि वह ऐसा नहीं करती है तो विधेयक दोनों सदनों द्वारा उस रूप में पारित मान लिया जाता है जिसे विधानसभा ने तय किया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 171 के तहत विधान परिषद की संरचना में स्थानीय निकायों (1/3), स्नातकों (1/12), अध्यापकों (1/12), विधानसभा सदस्यों (1/3) और राज्यपाल द्वारा मनोनयन (1/6) का प्रावधान है। कथन 2 गलत है क्योंकि साधारण विधेयकों के मामले में विधान परिषद किसी विधेयक को प्रथम बार में अधिकतम 3 महीने और दूसरी बार में अधिकतम 1 महीने, कुल मिलाकर अधिकतम 4 महीने तक नहीं बल्कि अधिकतम 4 महीने (प्रथम बार में 3 महीने और दूसरी बार में 1 महीना) तक रोक सकती है; यह कथन सही है कि कुल अवधि 4 महीने होती है (3 माह प्रथम बार और 1 माह द्वितीय बार)। रुकिए, कथन 2 तकनीकी रूप से सही है क्योंकि विधान परिषद प्रथम बार में 3 महीने और पुन: भेजे जाने पर 1 महीने यानी कुल 4 महीने तक विधेयक रोक सकती है। लेकिन आइए विकल्प के अनुसार देखें: कथन 3 भी बिल्कुल सही है क्योंकि धन विधेयक के मामले में विधान परिषद के पास केवल 14 दिन की समय-सीमा होती है और वह इसे रोक नहीं सकती। अतः कथन 1 और 3 पूर्णतः सत्य हैं, जबकि कथन 2 भी सही है। इसलिए सभी तीनों कथन सही हैं। परीक्षा संबंधी विस्तृत जानकारी और तैयारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के पाठ्यक्रम का अध्ययन करें।
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