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Indian Polity
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भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. इस अधिनियम द्वारा संविधान में भाग IX जोड़ा गया, जिसका शीर्षक 'पंचायते' है और इसमें अनुच्छेद 243 से 243-O तक के प्रावधान शामिल हैं, तथा इसके तहत ग्यारहवीं अनुसूची में कुल 29 कार्यकारी विषयों को सूचीबद्ध किया गया है जिन पर पंचायतों को विध बनाने की शक्ति दी गई है।
  2. 2. अधिनियम के अनुसार प्रत्येक राज्य में ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर पर पंचायतों का गठन किया जाना अनिवार्य है, किंतु जिन राज्यों की जनसंख्या 20 लाख से कम है, उन्हें मध्यवर्ती स्तर की पंचायत का गठन न करने का विकल्प प्रदान किया गया है।
  3. 3. पंचायती राज संस्थाओं के सभी स्तरों पर महिलाओं के लिए कुल सीटों के एक-तिहाई (कम से कम 33%) से कम स्थान आरक्षित नहीं होंगे, और यह आरक्षण केवल कुल निर्वाचित सीटों तक ही सीमित है, बल्कि अध्यक्षों (Chairpersons) के पदों पर भी इसी अनुपात में आरक्षण लागू होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा भारतीय संविधान में नया भाग IX और ग्यारहवीं अनुसूची जोड़ी गई, जिसके तहत पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया। इस संशोधन के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में त्रि-स्तरीय (ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर) प्रणाली अनिवार्य की गई, परंतु 20 लाख से कम जनसंख्या वाले राज्यों को मध्यवर्ती स्तर के गठन से छूट दी गई है। इसके अतिरिक्त, महिलाओं के लिए कम से कम एक-तिहाई (33%) सीटें और अध्यक्ष पद आरक्षित किए गए हैं। विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
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