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History of India
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मुगल न्याय व्यवस्था में "काजी-उल-कुजात" के बाद न्याय का अंतिम स्रोत कौन होता था?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अंतिम अपीलीय और न्याय का सर्वोच्च स्रोत स्वयं सम्राट होता था।
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मध्यकालीन भारत के इतिहास में भक्ति और सूफी आंदोलनों के वैचारिक विकास, संतों के दृष्टिकोण तथा उनकी दार्शनिक मान्यताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण भारत के अलवार (वैष्णव) और नयनार (शैव) संतों ने जाति व्यवस्था और ब्राह्मणवादी वर्चस्व की कठोरता को चुनौती देते हुए अपनी भक्ति रचनाओं का प्रसार संस्कृत के स्थान पर तमिल भाषा में किया, जिससे आम जनमानस तक उनकी पहुँच सुगम हो गई।
2. उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाने वाले रामानंद ने जाति और लिंग के भेदभाव को अस्वीकार करते हुए अपने शिष्यों में रैदास (चमार जाति से), कबीर (जुलाहा), सेना (नाई) और पद्मावती जैसे निचली जातियों व महिलाओं को भी सम्मिलित किया था।
3. सूफी संतों के 'चिश्ती सिलसिले' ने संगीत और समा (कव्वाली) को ईश्वर-प्राप्ति का एक प्रमुख साधन माना, तथा शेख निजामुद्दीन औलिया ने तत्कालीन सुल्तानों के दरबार से कड़ाई से दूरी बनाए रखने की नीति का पालन किया और कभी भी शाही अनुदान स्वीकार नहीं किया।
4. सुहरावर्दी सिलसिले के संतों ने चिश्ती संतों के विपरीत राजकीय संरक्षण और शाही अनुदान को स्वीकार करने से परहेज नहीं किया, तथा उनका यह मानना था कि आध्यात्मिक जीवन के साथ-साथ भौतिक सुख-सुविधाओं का होना भी ईश्वर की कृपा का प्रतीक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मौर्य साम्राज्य के प्रशासन, आर्थिक नियंत्रण और सामाजिक जीवन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार, मौर्यकालीन केंद्रीय प्रशासन में कर संग्रह और राजकीय आय के निर्धारण का सर्वोच्च उत्तरदायित्व 'समाहर्त्ता' नामक अधिकारी का था, जबकि राजकोष और अभिलेखागार का मुख्य संरक्षक 'सन्निधातृ' कहलाता था।
2. मेगस्थनीज द्वारा वर्णित 'इंडिका' के अनुसार, पाटलिपुत्र नगर का प्रशासन तीस सदस्यों की एक नगर परिषद द्वारा चलाया जाता था, जो छह समितियों में विभाजित थी, और इनमें से पाँचवीं समिति का मुख्य कार्य विक्रय वस्तुओं पर लगाए जाने वाले कर (मूल्य का दसवां भाग) के रूप में कर चोरी करने वालों को मृत्युदंड देना था।
3. अशोक के अपने धम्म महामात्रों की नियुक्ति के माध्यम से समाज में नैतिक संहिता को बढ़ावा दिया गया, किंतु उनके 'स्तंभ लेख IV' से यह स्पष्ट होता है कि उन्होंने न्याय प्रशासन में एकरूपता लाते हुए मृत्युदंड प्राप्त कैदियों को क्षमादान देने या उनकी सजा माफ करने के लिए तीन दिन का अतिरिक्त 'जीवन-दान' अवकाश प्रदान किया था।
4. मौर्य काल में राज्य के प्रत्यक्ष नियंत्रण वाले उद्योगों (जैसे खान, वस्त्र और मदिरा उत्पादन) में कार्यरत श्रमिकों और कारीगरों के नियमन के लिए अर्थशास्त्र में कड़े दंडों का विधान था, और विदेशी व्यापारियों के आवागमन व गतिविधियों की निगरानी के लिए अलग से 'अतिथियों' (विदेशी पर्यटकों/व्यापारियों) के विभाग की व्यवस्था थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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अलाउद्दीन खिलजी ने दुधारू पशुओं पर लगने वाले "चरी" कर का निर्धारण किस आधार पर किया था?
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मुगल चित्रकला में "शिकार के दृश्यों" और "प्रकृति चित्रण" को सबसे अधिक बढ़ावा किसने दिया?
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माउंटबेटन योजना (3 जून 1947) और भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के प्रावधानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. माउंटबेटन योजना के तहत ब्रिटिश भारत को भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र डोमिनियन में विभाजित करने का प्रस्ताव था, तथा पंजाब और बंगाल की प्रांतीय विधानसभाओं को अपनी-अपनी विधानसभाओं के विभाजन के पक्ष या विपक्ष में मतदान करने का अधिकार दिया गया था।
2. इस योजना के अंतर्गत उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में से किसी एक को शामिल करने के निर्णय हेतु जनमत संग्रह (Referendum) कराए जाने का प्रावधान किया गया था।
3. ब्रिटिश संसद द्वारा जुलाई 1947 में पारित 'भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम' के अनुसार, 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश सम्राट का भारतीय मामलों से प्रभुत्व समाप्त हो गया, किंतु दोनों नए डोमिनियनों के लिए एक साझा गवर्नर-जनरल के रूप में लॉर्ड माउंटबेटन का बने रहना अनिवार्य कर दिया गया था, जिससे वे स्वेच्छा से हट नहीं सकते थे।
4. सिंध प्रांत की विधानसभा को यह अधिकार दिया गया था कि वह स्वयं निर्णय ले कि उसे पाकिस्तान संविधान सभा में शामिल होना है या नहीं, और सिंध ने पाकिस्तान के पक्ष में मतदान किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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