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History of India
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किस मुगल सम्राट ने तांबे का "दाम" (Dam) सिक्का चलाया था जो विनिमय का मुख्य माध्यम था?

Detailed Explanation

अकबर ने दाम नामक तांबे का सिक्का प्रचलित किया था।
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मुगल कालीन प्रशासनिक व्यवस्था और नीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अकबर द्वारा वर्ष 1582 में शुरू की गई 'दहसाला प्रणाली' (Todar Mal's Bandobast) के अंतर्गत पिछले दस वर्षों के उत्पादन और औसत मूल्यों का आकलन करके भू-राजस्व का निर्धारण किया जाता था। 2. जहांगीर के शासनकाल में मुगल चित्रकला अपने स्वर्णकाल पर पहुँची, जहाँ चित्रों में प्राकृतिक दृश्यों, पक्षियों और चित्रों के किनारों (Border) को सजाने की कला का अभूतपूर्व विकास हुआ। 3. शाहजहां के शासनकाल के अंतिम वर्षों में दारा शिकोह और औरंगजेब के बीच उत्तराधिकार को लेकर संघर्ष हुआ, जिसमें 'सामूगढ़ का युद्ध' निर्णायक साबित हुआ और इसी विजय के बाद औरंगजेब ने दिल्ली में अपना प्रथम राज्याभिषेक कराया। 4. औरंगजेब ने अपने शासनकाल के दौरान सिक्कों पर कलमा खुदवाने की प्रथा को समाप्त कर दिया तथा संगीत और चित्रकला को बढ़ावा देते हुए दरबार में चित्रकारों को शाही संरक्षण प्रदान करना जारी रखा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में, पल्लव राजवंश और चालुक्य राजवंश के प्रशासनिक, सांस्कृतिक एवं सैन्य संघर्षों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पल्लव नरेश नरसिंहवर्मन प्रथम ने चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय को 'मणिमंगलम् के युद्ध' में निर्णायक रूप से पराजित किया था और वातापी पर अधिकार करने के उपरांत 'वातापीकोंड' की उपाधि धारण की थी। 2. बादामी के चालुक्य वंश के प्रसिद्ध शासक पुलकेशिन द्वितीय के 'ऐहोल अभिलेख' की रचना उसके दरबारी कवि रवि कीर्ति ने की थी, जिसमें कालिदास और भारवि की कीर्ति का उल्लेख मिलता है तथा नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन पर उसकी विजय का वर्णन है। 3. पल्लव शासक महेंद्रवर्मन प्रथम ने अपने शासन के प्रारंभिक काल में जैन धर्म का अनुयायी होने के कारण बौद्ध धर्म का घोर उत्पीड़न किया था, किंतु शैव संत अप्पर के प्रभाव में आकर उसने शैव धर्म अपना लिया और त्रिचिरापल्ली तथा महाबलीपुरम में भव्य रॉक-कट मंदिरों का निर्माण करवाया। 4. महाबलीपुरम के प्रसिद्ध 'रथ मंदिरों' (सप्त पगोडा) का निर्माण पल्लव राजा नरसिंहवर्मन द्वितीय (राजसिंह) के शासनकाल में करवाया गया था, जो महाबलीपुरम के समुद्रतट मंदिर (Shore Temple) के समकालीन हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका तथा उनके रणनीतिक संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरjis कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व संभाला और ब्रिटिश रेजीडेंसी की घेराबंदी के दौरान सैन्य संचालन का प्रभावी निर्देशन किया। 2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'फैजाबाद का डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता है, ने अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया और चिनहट के युद्ध में ब्रिटिश सेनापति हेनरी लॉरेंस को पराजित करने में प्रमुख सैन्य भूमिका निभाई। 3. लखनऊ के पतन के उपरांत बेगम हजरत महल ने आत्मसमर्पण कर दिया और ब्रिटिश सरकार से पेंशन स्वीकार कर कलकात्ता में निवास करने लगीं, जबकि अहमदुल्लाह शाह रोहिलखंड और नेपाल की तराई में अंग्रेजों के विरुद्ध छापामार युद्ध जारी रखते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। 4. ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल और जेम्स आउट्राम ने अंततः गोरखा रेजिमेंट और अन्य सैन्य टुकड़ियों की सहायता से मार्च 1858 में लखनऊ पर पुनः पूर्ण नियंत्रण स्थापित किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? बौद्ध धर्म एवं जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों और ऐतिहासिक विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जैन धर्म के 'अनेकांतवाद' और 'स्याद्वाद' के सिद्धांत के अनुसार, परम सत्य या वास्तविकता को किसी एक दृष्टिकोण से पूर्णतः व्यक्त नहीं किया जा सकता, जबकि बौद्ध धर्म के 'प्रतीतसमुत्पाद' (Dependent Origination) सिद्धांत के अनुसार सभी वस्तुएं और घटनाएं हेतु-प्रत्यय (कारण और शर्त) के अधीन होने के कारण अनित्य और सापेक्ष हैं। 2. बौद्ध धर्म के महायान संप्रदाय में 'बोधिसत्व' की संकल्पना को सर्वोच्च स्थान दिया गया है, जिसमें वे प्राणीमात्र के उद्धार के लिए बुद्धत्व प्राप्त करने से पूर्व अपने निर्वाण को स्थगित कर देते हैं, जबकि जैन धर्म में 'तीर्थंकर' की अवधारणा के अंतर्गत केवल वे ही मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं जिन्होंने पूर्ण संन्यास लेकर कैवल्य ज्ञान प्राप्त किया हो। 3. जैन धर्म में मोक्ष प्राप्ति के लिए 'त्रिरत्न' (सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चरित्र) का विधान किया गया है, तथा इसके साथ ही कर्मों के बंधन से पूरी तरह मुक्ति पाने के लिए संलेखना (संथारा) पद्धति द्वारा शरीर का त्याग करना अनिवार्य एवं एकमात्र साधन माना गया है। 4. बौद्ध संगीतों (Councils) के क्रम में, चतुर्थ बौद्ध संगीति कुषाण सम्राट कनिष्क के शासनकाल में कश्मीर के कुंडलवन में आयोजित की गई थी, जिसकी अध्यक्षता वासुमित्र ने की थी और इसी संगीति में बौद्ध धर्म स्पष्ट रूप से 'स्थविरवाद' (हीनयान) और 'महायान' संप्रदायों में विभाजित हो गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की सामाजिक, आर्थिक एवं नगरीय विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सिंधु घाटी सभ्यता के नगरों में घरों के दरवाजे मुख्य सड़कों की ओर खुलने की सामान्य परंपरा थी, जिससे व्यापारियों और राहगीरों को आवागमन में सुविधा हो सके, तथा लगभग प्रत्येक घर में निजी कुएँ और स्नानघर के अवशेष मिले हैं। 2. लोथल और चान्हूदो दोनों ही स्थलों से मनके (Beads) बनाने के कारखानों के प्रमाण मिले हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह सभ्यता उन्नत हस्तशिल्प और आभूषण निर्माण तकनीक से परिचित थी। 3. सिंधु घाटी सभ्यता के मोहरों पर 'पशुपति शिव' (आद्य-शिव) का अंकन मिलता है, जिनके चारों ओर बाघ, हाथी, गैंडा और भैंसा तथा उनके पैरों के पास दो हिरण बैठे हुए हैं, जो इस काल की धार्मिक मान्यताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। 4. इस सभ्यता के लोग लोहे की धातुकर्म तकनीक से भली-भांति परिचित थे और उन्होंने अपने कृषि उपकरणों तथा रक्षात्मक हथियारों के निर्माण में लोहे का बड़े पैमाने पर उपयोग किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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