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History of India
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शाहजहाँ के शासनकाल के इतिहास का वर्णन करने वाले ग्रंथ "पादशाहनामा" के लेखक कौन हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अब्दुल हमीद लाहोरी पादशाहनामा के मुख्य लेखक थे।
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वर्ष 1857 के विद्रोह की असफलता के मुख्य कारणों और उसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 1857 के विद्रोह का नेतृत्व करने वाले अधिकांश भारतीय शासकों और सामंतों में किसी साझा राष्ट्रीय एजेंडे या सुस्पष्ट राजनीतिक दूरदर्शिता का अभाव था, और वे अंग्रेजों के विरुद्ध एकीकृत विकल्प देने के बजाय मुख्य रूप से अपनी खोई हुई जागीरें और रियासतें वापस पाने तक ही सीमित रहे।
2. इस विद्रोह में आधुनिक हथियारों, संचार प्रणालियों (जैसे टेलीग्राफ और रेलवे) तथा सैन्य अनुशासन का गंभीर अभाव था, जिसका भरपूर लाभ उठाते हुए अंग्रेजों ने अपनी संगठित सैन्य शक्ति से इसका दमन किया।
3. भारत के अधिकांश शिक्षित वर्गों, बड़े व्यापारियों और संभ्रांत समाजों ने इस विद्रोह में सक्रिय रूप से भाग लिया और विद्रोही ताकतों को भारी वित्तीय सहायता प्रदान की, जिससे यह पूरे देश में एक सफल जन-क्रांति बन सका।
4. मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को यद्यपि इस विद्रोह का प्रतीकात्मक सर्वोच्च नेता घोषित किया गया था, परंतु विभिन्न क्षेत्रों के नेतृत्वकर्ताओं (जैसे नाना साहब, रानी लक्ष्मीबाई और कुंवर सिंह) के बीच आपसी समन्वय और एक केंद्रीय सैन्य कमान का पूर्ण अभाव था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और तदुपरांत चले स्वदेशी आंदोलन के ऐतिहासिक संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन का निर्णय आधिकारिक रूप से 20 जुलाई 1905 को घोषित किया गया था, जिसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में ऐतिहासिक बैठक हुई और 'स्वदेशी आंदोलन' का औपचारिक प्रस्ताव पारित किया गया।
2. 16 अक्टूबर 1905 को जब बंगाल विभाजन प्रभावी हुआ, तब संपूर्ण बंगाल में इस दिन को 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, जहाँ लोगों ने उपवास रखा, नंगे पाँव प्रभात फेरियां निकालीं और एक-दूसरे की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर एकता का संदेश दिया।
3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक मोर्चे पर भी अभूतपूर्व जागृति आई, जिसके तहत अवनिन्द्रनाथ ठाकुर ने 'इंडियन सोसाइटी ऑफ ओरिएंटल आर्ट' की स्थापना की और प्रसिद्ध राष्ट्रवादी गीत 'आमार सोनार बांग्ला' की रचना की गई।
4. कलकत्ता में राष्ट्रीय शिक्षा के प्रसार के लिए नवंबर 1905 में 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (National Council of Education) की स्थापना की गई, जिसके प्रथम अध्यक्ष सतेंद्र प्रसाद सिन्हा (एस. पी. सिन्हा) बनाए गए थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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लोदी काल में समाज में किन जातियों का प्रभाव राजनैतिक रूप से बढ़ गया था?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरjis कादिर को अवध का नवाब घोषित किया और लखनऊ में ब्रिटिश रेजीडेंसी के खिलाफ हुए विद्रोह का नेतृत्व किया, तथा बाद में अंग्रेजों द्वारा पराजित होने के बाद नेपाल शरण लेने चली गईं।
2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'फैजाबाद का डंका शाह' भी कहा जाता है, ने रुहेलखंड और अवध के सीमावर्ती क्षेत्रों में ब्रिटिश सेना के खिलाफ सशस्त्र प्रतिरोध का नेतृत्व किया तथा ब्रिटिश जनरल कैंपबेल के साथ कई भयंकर लड़ाइयां लड़ीं।
3. ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने गोरखा रेजीमेंट और अन्य सैन्य टुकड़ियों की सहायता से अंततः मार्च 1858 में लखनऊ पर पुनः अधिकार कर लिया, जिसके दौरान बेगम हजरत महल और अहमदुल्लाह शाह दोनों ने अंग्रेजों के समक्ष बिना शर्त आत्मसमर्पण कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और असहयोग आंदोलन (1920-22) के ऐतिहासिक घटनाक्रम और उनके वैचारिक तथा सामाजिक प्रभावों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा किसानों पर 'तीनकथा पद्धति' के तहत अपनी भूमि के 3/20वें हिस्से पर नील की अनिवार्य खेती करने का दबाव डाला जा रहा था, और इस आंदोलन की सफलता से प्रेरित होकर महात्मा गांधी ने भारत में पहली बार सविनय अवज्ञा का सफल प्रयोग किया था।
2. चंपारण जाँच समिति के एक सदस्य के रूप में महात्मा गांधी ने बागान मालिकों द्वारा किसानों से अवैध रूप से वसूले गए धन का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा वापस करने का सफल समझौता कराया था।
3. फरवरी 1922 में चौरी-चौरा की हिंसक घटना के कारण महात्मा गांधी द्वारा असहयोग आंदोलन को अचानक वापस लिए जाने के निर्णय से क्षुब्ध होकर चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने कांग्रेस से अलग होकर 'स्वराज पार्टी' की स्थापना की थी।
4. असहयोग आंदोलन के दौरान पहली बार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मंच से विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा के प्रसार के साथ-साथ ब्रिटिश संसद और अदालतों का बहिष्कार करने का भी खुला आह्वान किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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