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Child Development
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प्रगतिशील शिक्षा (Progressive Education) के मूल दर्शन और बाल-केंद्रित शिक्षाशास्त्र (Child-Centric Pedagogy) के परिप्रेक्ष्य में, जॉन डीवी की 'रिफ्लेक्टिव थिंकिंग' (Reflective Thinking) और कार्ल रोजर्स की 'अनुभवात्मक अधिगम' (Experiential Learning) की अवधारणाओं का तात्विक विश्लेषण करने पर, यदि एक शिक्षक अपनी कक्षा को 'सहयोगात्मक समस्या-समाधान' और 'अनुसंधान आधारित अधिगम' का केंद्र बनाता है जहाँ बच्चे स्वयं अपने ज्ञान का निर्माण करते हैं, तो इस शैक्षणिक मॉडल की विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक है?

Detailed Explanation

प्रगतिशील शिक्षा और बाल-केंद्रित शिक्षाशास्त्र इस मान्यता पर आधारित हैं कि बच्चे निष्क्रिय प्राप्तकर्ता नहीं बल्कि सक्रिय ज्ञान निर्माता (Active Knowledge Constructors) हैं। अमेरिकी दार्शनिक और शिक्षाविद् जॉन डीवी ने 'लर्निंग बाय डूइंग' और आलोचनात्मक व reflective चिंतन पर जोर दिया। इसके बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ पढ़ सकते हैं। अतः विकल्प (b) इस pedagogical दृष्टिकोण की सबसे सटीक और प्रामाणिक व्याख्या करता है।
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत, जब किसी कक्षा में विभिन्न अक्षमताओं, सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों और सीखने की गति वाले बच्चे एक साथ अध्ययन करते हैं, तो 'सार्वभौमिक डिजाइन फॉर लर्निंग' (Universal Design for Learning - UDL) के तीन प्रमुख मूल सिद्धांतों - (1) सहभागिता के बहुविध साधन (Multiple Means of Engagement), (2) निरूपण या प्रस्तुति के बहुविध साधन (Multiple Means of Representation), और (3) अभिव्यक्ति के बहुविध साधन (Multiple Means of Expression) - का सही तात्विक एवं व्यावहारिक निहितार्थ निम्नलिखित में से क्या है? गेस्टाल्टवादी अधिगम सिद्धांत (सूझ या अंतर्दृष्टि का सिद्धांत) के संदर्भ में, पारंपरिक थार्नडाइक के प्रयास एवं त्रुटि (Trial and Error) सिद्धांत से यह किस प्रकार मौलिक रूप से भिन्न है और इसकी संज्ञानात्मक प्रक्रिया की सबसे प्रमुख विशेषता क्या है? शिक्षण विधियों के चयन और कक्षा-कक्षीय समस्याओं के वैज्ञानिक निराकरण के संदर्भ में 'क्रियात्मक अनुसंधान' (Action Research) की चक्रीय प्रक्रिया—जिसे स्टीफन कोरी (Stephen Corey) और कर्ट लेविन (Kurt Lewin) के मॉडलों में रेखांकित किया गया है—की तात्विक एवं व्यावहारिक गतिकी का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, इस अनुसंधान प्रक्रिया के चरणों का कौन-सा अनुक्रम सर्वाधिक तार्किक, प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से सत्य है? लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Moral Development Theory) के अंतर्गत, 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता' (Post-Conventional Morality) की अंतिम अवस्था यानी 'सार्वभौमिक नैतिक अंतःकरण अभिमुखीकरण' (Universal Ethical Principle Orientation) का सूक्ष्म विश्लेषण करते समय, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस अवस्था की तात्विक और दार्शनिक विशेषताओं को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है? लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Moral Development Theory) के अंतर्गत, 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता' (Post-Conventional Morality) की अंतिम अवस्था यानी 'सार्वभौमिक नैतिक अंतःकरण अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation) का सूक्ष्म विश्लेषण करते समय, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस अवस्था की तात्विक और दार्शनिक विशेषताओं को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है?
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