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Child Development
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत 'सार्वभौमिक डिजाइन फॉर लर्निंग' (Universal Design for Learning - UDL) के तीन मुख्य वैधानिक और मनोवैज्ञानिक सिद्धांत—अधिगम के लिए बहुविध साधन (Multiple Means of Engagement), बहुविध निरूपण (Multiple Means of Representation), और बहुविध अभिव्यक्ति एवं कार्रवाई (Multiple Means of Action and Expression)—का सूक्ष्म विश्लेषण करते समय, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इन तीनों सिद्धांतों के वास्तविक और वैज्ञानिक उद्देश्य को सबसे सटीक रूप से परिभाषित करता है?

Detailed Explanation

सार्वभौमिक डिजाइन फॉर लर्निंग (UDL) एक ऐसा शिक्षण ढांचा है जो अधिगम की बाधाओं को कम करने और सभी शिक्षार्थियों को सीखने के समान अवसर प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके तीन मूल सिद्धांत छात्रों की सहभागिता, जानकारी के प्रस्तुतिकरण और उनके प्रदर्शन के तरीकों में विविधता लाने पर जोर देते हैं ताकि विविध आवश्यकताओं वाले बच्चों का सफल समावेशन संभव हो सके। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
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Related Questions

एक शिक्षक के लिए 'निदानात्मक मूल्यांकन' (Diagnostic Evaluation) क्यों आवश्यक है? कौन-सा सहकारी अधिगम का सिद्धान्त नहीं है? सिग्मंड फ्रायड के मनो-लैंगिक विकास सिद्धांत (Psychosexual Development Theory) के संदर्भ में, यदि एक 4 से 5 वर्ष की आयु का बालक अपनी माँ के प्रति अत्यधिक लगाव और पिता के प्रति प्रतिद्वंद्विता या ईर्ष्या की भावना प्रदर्शित करता है, जिसके समाधान के परिणामस्वरूप वह अंततः अपने पिता के साथ तादात्म्य (Identification) स्थापित कर लेता है, तो फ्रायड के इस सिद्धांत के अनुसार इस विशिष्ट मनोवैज्ञानिक अवस्था और इससे जुड़ी जटिलता को किस रूप में जाना जाता है? थार्नडाइक के 'प्रयत्न एवं भूल' (Trial and Error) सिद्धांत, पावलव के 'शास्त्रीय अनुबंधन' (Classical Conditioning) तथा स्किनर के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन' (Operant Conditioning) के बीच उद्दीपक (Stimulus) और अनुक्रिया (Response) के स्वरूप तथा नियंत्रण के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा विश्लेषणात्मक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक है? प्रगतिशील शिक्षा (Progressive Education) और बाल-केंद्रित शिक्षाशास्त्र (Child-Centric Pedagogy) के तात्विक, दार्शनिक तथा मनोवैज्ञानिक स्वरूप का गहन विश्लेषण करने पर, यदि कोई विद्यालय जॉन डेवी के 'करके सीखना' (Learning by Doing) के सिद्धांत को आधार बनाते हुए पारंपरिक शिक्षक-केंद्रित, पाठ्यपुस्तक-आधारित और कठोर कक्षा-कक्ष परिवेश को पूरी तरह नकार देता है, तथा इसके स्थान पर विद्यार्थियों की व्यक्तिगत रुचियों, क्षमताओं, अनुभवों और सहयोगात्मक समस्या-समाधान (Collaborative Problem Solving) को अधिगम की धुरी बनाता है, तो इस आधुनिक शैक्षिक प्रतिमान के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से सत्य है?
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