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History of India
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बाजीराव प्रथम ने किस युद्ध के बाद निजाम को "मुंगी शिवगाँव की संधि" के लिए मजबूर किया?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
पालखेड़ के युद्ध के बाद यह संधि हुई थी।
Related Questions
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1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों और उनके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जुलाई 1857 में दानापुर छाउनी के 7वें, 8वें और 40वें रेजीमेंट के सिपाहियों ने ब्रिटिश सेना के विरुद्ध विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर आरा (शाहाबाद) पहुँचकर बाबू कुंवर सिंह के नेतृत्व में शामिल हो गए।
2. पटना में 30 जून 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक स्थानीय पुस्तक विक्रेता पीर अली खान ने किया था, जिसे ब्रिटिश अधिकारी विलियम टेलर के आदेश पर गिरफ्तार कर सार्वजनिक रूप से फाँसी दे दी गई थी।
3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) के क्षेत्रों में विद्रोह का प्रसार करने तथा सैनिकों और स्थानीय जनता को संगठित करने में दानापुर से आए विद्रोही सिपाहियों और स्थानीय जमींदारों ने प्रमुख भूमिका निभाई थी।
4. बाबू कुंवर सिंह ने आरा पर अधिकार करने के बाद ब्रिटिश सेना के विरुद्ध guerilla (छापामार) युद्ध की रणनीति अपनाई और अंग्रेजों के खिलाफ अंतिम समय तक संघर्ष करते हुए अप्रैल 1858 में वीरगति को प्राप्त हुए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल सम्राट के घरेलू विभाग और शाही कारखानों का प्रभारी अधिकारी कौन होता था?
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गुप्त साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, कला-संस्कृति तथा विज्ञान के विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त काल में 'कुमारामार्त्य' सबसे महत्वपूर्ण प्रांतीय और केंद्रीय अधिकारी होते थे, जिनकी नियुक्ति सीधे सम्राट द्वारा की जाती थी, और इन्हें प्रशासनिक सुविधा के लिए 'विषय' (ज़िलों) के प्रशासन से भी जोड़ा जाता था जिनका प्रमुख 'विषयपति' कहलाता था।
2. इस काल में तांबे के सिक्कों की तुलना में सोने के सिक्के (दीनार) बहुत कम मात्रा में जारी किए गए क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पूरी तरह से समाप्त हो चुका था और अर्थव्यवस्था पूरी तरह वस्तु-विनिमय प्रणाली पर आधारित हो गई थी।
3. गुप्तकालीन वास्तुकला में पहली बार ईंटों और पत्थरों से बने पक्के मंदिरों के निर्माण की शुरुआत हुई, जिसमें उत्तर भारत में 'नागर शैली' के मंदिरों (जैसे देवगढ़ का दशावतार मंदिर और भुमाराम का शिव मंदिर) का उत्कृष्ट विकास देखने को मिलता है।
4. गणित और खगोल विज्ञान के क्षेत्र में आर्यभट्ट ने अपनी पुस्तक 'आर्यभटिय' में पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमने (घूर्णन) तथा सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण के वास्तविक वैज्ञानिक कारणों का प्रतिपादन किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित आज़ाद हिंद फौज (INA) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब अखिल भारतीय कांग्रेस समिति ने मुंबई में प्रस्ताव पारित किया, तब महात्मा गांधी ने 'करो या मरो' (Do or Die) का मंत्र दिया था, लेकिन सुभाष चंद्र बोस देश के भीतर इस आंदोलन के भूमिगत नेतृत्व (Underground Leadership) का हिस्सा थे और उन्होंने राम मनोहर लोहिया तथा अरुणा आसफ अली के साथ मिलकर इसकी योजना बनाई थी।
2. जापान के नियंत्रण वाले सिंगापुर में रास बिहारी बोस के प्रयासों से स्थापित 'इंडियन इंडिपेंडेंस लीग' और 'आज़ाद हिंद फौज' का सर्वोच्च सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व जब सुभाष चंद्र बोस के हाथों में आया, तो उन्होंने सिंगापुर में 'अस्थाई आज़ाद भारत सरकार' (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) की स्थापना की थी।
3. आज़ाद हिंद फौज के सैनिकों ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर नियंत्रण प्राप्त करने के बाद उनका नाम क्रमशः 'शहीद द्वीप' और 'स्वराज द्वीप' रखा था, तथा सुभाष चंद्र बोस ने ही सिंगापुर से रेडियो प्रसारण के दौरान महात्मा गांधी को सर्वप्रथम 'राष्ट्रपिता' (Father of the Nation) कहकर संबोधित किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनके संस्थापकों तथा वैचारिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और पुरोहितवाद का कड़ा विरोध करते हुए एकेश्वरवाद और उपनिषदों की तार्किकता पर बल दिया, तथा केशव चंद्र सेन के नेतृत्व में ब्रह्म समाज के विभाजन के बाद 'साधारण ब्रह्म समाज' की स्थापना हुई जिसने बाल विवाह के विरुद्ध कानून बनवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' (Back to the Vedas) का नारा दिया और वेदों को अपौरुषेय एवं अचूक मानते हुए मूर्तिपूजा, अवतारवाद, श्राद्ध और जाति व्यवस्था (जन्म आधारित) का समर्थन किया।
3. ज्योतिराव फुले ने वर्ष 1873 में 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य शूद्रों और अति-शूद्रों (दलितों) को वैचारिक रूप से ब्राह्मणवादी वर्चस्व और धार्मिक रूढ़ियों से मुक्त कराना था, तथा उनकी प्रसिद्ध पुस्तक 'गुलामगिरी' में इस विचारधारा का स्पष्ट दस्तावेज मिलता है।
4. प्रार्थना समाज की स्थापना आत्माराम पांडुरंग ने वर्ष 1867 में बॉम्बे में की थी, जिसे एम.जी. रानाडे और आर.जी. भंडारकर जैसे विद्वानों का सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ, और इसका मुख्य ध्यान अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और स्त्री शिक्षा जैसे सामाजिक सुधारों पर था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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