त्वरित लिंक्स
History of India
9 views
किस इतिहासकार ने कहा कि "पानीपत का युद्ध यह तय नहीं कर पाया कि भारत पर कौन राज करेगा, बल्कि यह तय किया कि कौन नहीं करेगा"?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
यह प्रसिद्ध कथन सिडनी ओवेन का है।
Related Questions
→
मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, आर्थिक नियंत्रण और अशोक के धम्म तथा अधिकारियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार मौर्य केंद्रीय प्रशासन में अट्ठारह प्रमुख प्रशासनिक विभागों (जिन्हें 'तीर्थ' कहा जाता था) का उल्लेख मिलता है, जिनके शीर्ष अधिकारियों को 'महामात्र' कहा जाता था, और 'समाहर्ता' साम्राज्य के कर संग्रहण तथा आय-व्यय के ब्योरे के रखरखाव के लिए उत्तरदायी था।
2. सम्राट अशोक के धम्म की नीति मुख्य रूप से बौद्ध धर्म का राजनीतिक प्रचार करने या किसी नए धर्म की स्थापना करने के लिए नहीं थी, बल्कि यह विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच सहिष्णुता, बड़ों का आदर, शिष्टाचार और नैतिक मूल्यों पर आधारित एक सार्वभौमिक आचार संहिता थी।
3. अशोक के अभिलेखों में प्रयुक्त 'रज्जुक' अधिकारी केवल न्यायिक कार्यों तक ही सीमित थे और उन्हें ग्रामीण जनता की भूमि की पैमाइश या कर निर्धारण के मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं था।
4. मौर्यकालीन प्रांतीय प्रशासन के अंतर्गत साम्राज्य चार प्रमुख प्रांतों में विभाजित था, जिनकी राजधानियाँ क्रमशः तक्षशिला, उज्जैन, सुवर्णगिरि और तोसाली थीं, और इन प्रांतों का शासन प्रायः शाही परिवार के कुमार या आर्यपुत्र नामक राजकुमारों द्वारा चलाया जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों, संघ व्यवस्था तथा ऐतिहासिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बौद्ध धर्म के 'प्रतीत्यसमुत्पाद' (Dependent Origination) का सिद्धांत यह प्रतिपादित करता है कि संसार की प्रत्येक वस्तु किसी न किसी कारण या शर्त पर आधारित है और यह सनातन शाश्वत सत्ता के अस्तित्व को अस्वीकार करता है, जबकि जैन धर्म का 'स्यादवाद' या 'सप्तभंगीनय' यह स्वीकार करता है कि ज्ञान सापेक्ष होता है और सत्य को एकांगी रूप से नहीं देखा जा सकता।
2. बौद्ध संघ में महिलाओं (भिक्षुणियों) के प्रवेश का मार्ग महात्मा बुद्ध द्वारा अपने प्रिय शिष्य आनंद के विशेष अनुरोध पर वैशाली में खोला गया था, वहीं जैन धर्म के श्वेतांबर और दिगंबर दोनों संप्रदाय यह एकमत से स्वीकार करते हैं कि महिलाओं के लिए इसी जन्म में मोक्ष प्राप्ति संभव है।
3. जैन धर्म ने आत्मा (जीव) के अस्तित्व को शाश्वत और अजर-अमर माना है, तथा कर्म के बंधन से मुक्ति के लिए घोर तपस्या, कायाक्लेश और संलेखना (संथारा) को साधन बताया है, जबकि बौद्ध धर्म अनात्मवादी (Anatta) है और वह आत्मा के स्थायी अस्तित्व को अस्वीकार करते हुए पुनर्जन्म को 'विज्ञान की धारा' के रूप में स्वीकार करता है।
4. महात्मा बुद्ध ने वैदिक यज्ञों, पशुबलि और ब्राह्मणवादी सर्वोच्चता का कड़ा विरोध किया था, किंतु उन्होंने वेदों की प्रमाणिकता और अपौरुषेयता को आंशिक रूप से स्वीकार किया था, जबकि महावीर स्वामी ने वेदों के साथ-साथ जैन आगमों में भी जाति व्यवस्था के जन्मजात भेदभाव को पूर्णतः वैध ठहराया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी सेना के लिए स्थायी और नकद वेतन प्रणाली की शुरुआत की तथा घोड़ों को दागने (दाग) और सैनिकों का हुलिया लिखने की प्रथा को सख्ती से लागू किया।
2. मुहम्मद बिन तुगलक ने दोआब क्षेत्र में कर में वृद्धि की, जो अकाल और कुप्रबंधन के कारण असफल रही, तथा इसी काल में चीन की कागजी मुद्रा से प्रेरित होकर 'प्रतीक मुद्रा' (Token Currency) के रूप में तांबे और कांसे के सिक्के चलाए गए।
3. फिरोजशाह तुगलक ने इक्तादारी व्यवस्था को वंशानुगत बना दिया तथा राजस्व सुधारों के तहत 'हक-ए-शर्ब' (सिंचाई कर) नामक एक नया कर लगाया, जो शरियत द्वारा मान्यता प्राप्त सिंचाई स्रोतों से पानी लेने पर किसानों से वसूला जाता था।
4. सल्तनत काल में कृषि भूमि के वर्गीकरण के तहत 'महतत' और 'खालसा' भूमि सीधे केंद्रीय नियंत्रण में आती थी, जहाँ से प्राप्त होने वाले राजस्व का उपयोग सीधे सुल्तान के व्यक्तिगत खर्चों और शाही दरबार के रख-रखाव के लिए किया जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
अलाउद्दीन खिलजी के समय "बिस्वा" को क्या माना गया?
→
1857 के महान विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश प्रशासनिक ढाँचे में हुए व्यापक परिवर्तनों और भारत सरकार अधिनियम 1858 (क्वीन विक्टोरिया की घोषणा) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत सरकार अधिनियम 1858 के द्वारा भारत का शासन कंपनी के हाथों से सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन कर दिया गया, जिसके तहत 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' को समाप्त कर उनके समस्त अधिकार 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) और उसकी सहायता के लिए गठित 15 सदस्यीय 'इंडिया काउंसिल' को सौंप दिए गए।
2. क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा (जिसे इलाहाबाद दरबार में 1 नवंबर 1858 को लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़ा गया था) में यह घोषणा की गई कि ब्रिटिश सरकार अब भारतीय रियासतें हड़पने की अपनी पुरानी विस्तारवादी नीतियों (जैसे गोद निषेध प्रथा या 'Doctrine of Lapse') को और अधिक सख्ती से लागू करेगी।
3. इस घोषणा में भारतीयों को यह स्पष्ट आश्वासन दिया गया कि ब्रिटिश सरकार उनकी प्राचीन धार्मिक आस्थाओं, रीति-रिवाजों और सामाजिक परंपराओं का पूर्ण सम्मान करेगी तथा नस्ल, वर्ण या धर्म के भेदभाव के बिना बिना किसी बाधा के सभी योग्य नागरिकों को लोक सेवाओं (Public Services) में उच्च पद प्रदान किए जाएंगे।
4. विद्रोह की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए ब्रिटिश सेना का पूर्ण पुनर्गठन किया गया, जिसके अंतर्गत सेना में यूरोपीय सैनिकों का अनुपात बढ़ाया गया तथा तोपखाने (Artillery) जैसे संवेदनशील सैन्य विभागों पर पूर्णतः यूरोपीय नियंत्रण रखा गया, जबकि 'भर्ती के संतुलन' (Balance of Power) सिद्धांत के तहत अवध, बिहार और मध्य भारत के सैनिकों की भर्ती कम करके गोरखा, सिख और पठानों को अधिक प्राथमिकता दी गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.