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History of India
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सूरत विभाजन (1907) और उसके पश्चात उत्पन्न राजनीतिक परिदृश्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. सूरत अधिवेशन में गरम दल के नेता लोकमान्य तिलक को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाना चाहते थे, जबकि नरम दल के नेता रास बिहारी घोष को इस पद पर आसीन करने के पक्ष में थे।
- 2. सूरत विभाजन के उपरांत ब्रिटिश सरकार ने उग्रवादी राष्ट्रवादी नेतृत्व के विरुद्ध अत्यंत दमनकारी नीतियां अपनाईं, जिसके तहत वर्ष 1908 में लोकमान्य तिलक को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर छह वर्ष के कारावास के लिए मांडले (बर्मा) भेज दिया गया।
- 3. कांग्रेस के सूरत विभाजन के तुरंत बाद वर्ष 1908 के मद्रास अधिवेशन में नरमपंथियों ने कांग्रेस के संविधान में एक नया संशोधन किया, जिसके तहत कांग्रेस की सदस्यता के लिए ब्रिटिश साम्राज्य के प्रति निष्ठा की शपथ को अनिवार्य बना दिया गया, ताकि उग्रवादियों के प्रवेश को पूरी तरह रोका जा सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1907 का सूरत अधिवेशन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जहाँ नरम दल और गरम दल के वैचारिक मतभेदों के कारण कांग्रेस का औपचारिक विभाजन हो गया था। गरम दल के नेता चाहते थे कि अधिवेशन नागपुर में हो और लाला Lajpat Rai या लोकमान्य तिलक को अध्यक्ष बनाया जाए, जबकि नरमपंथियों ने अधिवेशन सूरत स्थानांतरित कर रास बिहारी घोष को अध्यक्ष चुना। विभाजन के बाद सरकार ने उग्रवादियों का दमन किया और तिलक को मांडले जेल भेज दिया गया। इसके अलावा, 1908 के मद्रास अधिवेशन में कांग्रेस ने अपना नया संविधान अपनाया जिसमें ब्रिटिश शासन के अंतर्गत स्वशासन के लक्ष्य को स्वीकार किया गया और पार्टी की सदस्यता के लिए नियमों को कड़ा किया गया। विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शुरुआती दौर और 'नरम दल-गरम दल' काल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में कांग्रेस के भीतर यह तीखा वैचारिक मतभेद उभर कर सामने आया कि बंगाल विभाजन के विरोध में चलाए जाने वाले स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को केवल बंगाल तक सीमित रखा जाए या पूरे देश में प्रसारित किया जाए, जिसकी अध्यक्षता गोपाल कृष्ण गोखले ने की थी।
2. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में कांग्रेस के मंच से पहली बार दादाभाई नौरोजी के अध्यक्षीय भाषण में 'स्वराज' शब्द का आधिकारिक रूप से उल्लेख और मांग की गई थी, जिसे लेकर नरमपंथियों और उग्रवादियों के मध्य तीखा तनाव उत्पन्न हो गया था।
3. वर्ष 1907 के प्रसिद्ध 'सूरत अधिवेशन' में गरम दल के नेता बाल गंगाधर तिलक को कांग्रेस का नया अध्यक्ष चुना जाना तय था, किंतु नरमपंथियों ने उनके इस प्रस्ताव का पुरजोर विरोध किया जिसके कारण कांग्रेस संगठन का यह पहला औपचारिक विभाजन हुआ।
4. उग्रवादी (गरम दल) नेताओं का यह स्पष्ट मानना था कि ब्रिटिश राज के प्रति '3P' (प्रार्थना, याचिका और विरोध प्रदर्शन - Prayer, Petition and Protest) की नीति से कोई ठोस परिणाम प्राप्त नहीं होने वाला है, और इसके स्थान पर जनता की सक्रिय राजनीतिक कार्रवाई और आत्म-बलदान की आवश्यकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक, सैन्य और आर्थिक सुधारों के संदर्भ में, तुगलक और खिलजी वंश के दौरान उठाए गए निम्नलिखित कदमों पर विचार कीजिए:
1. सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक ने दोआब क्षेत्र में कर वृद्धि के साथ-साथ राज्य की वित्तीय स्थिति को सुधारने और धातु की कमी से निपटने के लिए तांबे और कांसे के 'सांकेतिक सिक्के' (Token Currency) चलाए, जिन्हें राज्य द्वारा सोने-चांदी के सिक्कों के समान विनिमय मूल्य पर मान्यता दी गई थी, किंतु नकली सिक्कों के प्रचलन और प्रशासनिक विफलता के कारण यह प्रयोग असफल हो गया।
2. अलाउद्दीन खिलजी ने सल्तनत काल में सबसे पहले कृषकों से लिए जाने वाले सभी पुराने करों (जैसे गृह कर 'घरई' और चराई कर 'चराई') को पूरी तरह समाप्त कर दिया और केवल कृषि उपज पर लगने वाले भू-राजस्व को ही एकमात्र कर के रूप में स्वीकार किया।
3. फिरोजशाह तुगलक ने अपने शासनकाल में शरीयत के विरुद्ध लिए जाने वाले चौबीस कष्टदायक करों को समाप्त कर दिया और केवल चार करों (खराज, जकात, जजिया और खुम्स) को वैध रखा, तथा सिंचाई की सुविधा के लिए बड़ी संख्या में नहरों का निर्माण कराते हुए हक-ए-शर्ब (सिंचाई कर) नामक एक नया कर भी लगाया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारत के किस युद्ध में पहली बार "तोपखाने" का बड़े पैमाने पर सफल प्रयोग हुआ?
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टोडरमल किस विभाग के प्रमुख थे?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका तथा उनके संघर्षों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व संभाला और ब्रिटिश रेजिडेंसी की घेराबंदी के दौरान सैन्य रणनीतियों का प्रभावी संचालन किया।
2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता है, ने फैजाबाद और रोहिलखंड क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया और ब्रिटिश सेनापतियों को अपनी गुरिल्ला युद्ध शैली से कड़ी चुनौती दी।
3. लखनऊ की अंतिम रक्षा और ब्रिटिश नियंत्रण स्थापित करने के दौरान सर कॉलिन कैंपबेल और सर जेम्स आउट्राम ने मुख्य भूमिका निभाई, तथा बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया और पेंशन स्वीकार कर ली।
4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह पर अंग्रेजों ने अत्यधिक इनाम घोषित किया था, और अंततः पुवियाँ (पवैन) के राजा के विश्वासघात के कारण उन्हें अंग्रेजों द्वारा घेर लिया गया तथा युद्ध में उनकी मृत्यु हो गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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