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History of India
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'आत्मीय सभा' (1815) का मुख्य उद्देश्य वेदों की सर्वोच्चता स्थापित करना तथा पश्चिमी शिक्षा के प्रभाव को पूरी तरह से नकारते हुए प्राचीन रूढ़िवादिता का समर्थन करना था।
  2. 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, अवतारवाद तथा जन्मजात जाति व्यवस्था का कड़ा विरोध किया।
  3. 3. केशव चंद्र सेन के नेतृत्व में ब्रह्म समाज में हुए वैचारिक मतभेदों के परिणामस्वरुप वर्ष 1866 में देवेंद्रनाथ ठाकुर ने 'आदि ब्रह्म समाज' की स्थापना की थी।
  4. 4. सत्यशोधक समाज की स्थापना ज्योतिराव फुले द्वारा 1873 में की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य शूद्रों और अतिशूद्रों को वैचारिक रूप से जागरूक करना तथा ब्राह्मणवादी वर्चस्व और धार्मिक पाखंडों को चुनौती देना था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि राजा राममोहन राय द्वारा 1815 में स्थापित 'आत्मीय सभा' का उद्देश्य एकेश्वरवादी विचारों का प्रचार करना और सामाजिक-धार्मिक कुप्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाना था, न कि वेदों की सर्वोच्चता स्थापित करते हुए रूढ़िवादिता का समर्थन करना। वेदों और उपनिषदों की तार्किक व्याख्या और एकेश्वरवाद का प्रसार ब्रह्म समाज का मुख्य आधार था। कथन 2, 3 और 4 पूरी तरह सत्य हैं। स्वामी दयानंद सरस्वती ने 1875 में विकिपीडिया संदर्भ की स्थापना की और वेदों की अचूकता में विश्वास व्यक्त करते हुए मूर्तिपूजा का विरोध किया। केशव चंद्र सेन के मतभेदों के बाद 1866 में देवेंद्रनाथ ठाकुर ने 'आदि ब्रह्म समाज' बनाया, तथा ज्योतिराव फुले ने 1873 में सत्यशोधक समाज की स्थापना की।
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