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History of India
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बंगाल विभाजन (1905) और स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. बंगाल विभाजन के विरोध में 16 अक्टूबर 1905 के दिन को पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, जिस दौरान लोगों ने उपवास रखा, नंगे पाँव जुलूस निकाले और रवींद्रनाथ ठाकुर के आह्वान पर एक-दूसरे के हाथों पर 'राखी' बाँधकर हिंदू-मु मुस्लिम एकता का संदेश दिया।
  2. 2. कलकत्ता के टाउन हॉल में 7 अगस्त 1905 को आयोजित ऐतिहासिक बैठक में प्रसिद्ध 'बहिष्कार प्रस्ताव' (Boycott Resolution) पारित किया गया, जिसके तहत केवल विदेशी कपड़ों और वस्तुओं के बहिष्कार का निर्णय लिया गया था, सरकारी नौकरियों, अदालतों और उपाधियों के त्याग का इसमें कोई प्रावधान नहीं था।
  3. 3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के उद्देश्य से आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय ने 'बंगाल केमिकल एंड फार्मास्युटिकल वक्र्स' की स्थापना की, तथा इस आंदोलन ने पारंपरिक मेलों (जैसे पुण्योत्सव और राष्ट्रीय मेलों) को जन-जागरूकता का एक सशक्त माध्यम बनाया।
  4. 4. आந்திர के डेल्टा क्षेत्रों में स्वदेशी आंदोलन को 'वंदे मातरम् आंदोलन' के नाम से जाना गया, जहाँ ब्रिटिश दमन के बावजूद स्थानीय जनता ने खुलकर भाग लिया और इस दौरान विपिन चंद्र पाल ने इस क्षेत्र का व्यापक दौरा कर राष्ट्रवादी भावनाओं को प्रज्वलित किया।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

बंगाल विभाजन (1905) और स्वदेशी आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण मोड़ था। 16 अक्टूबर 1905 को विभाजन प्रभावी होने पर पूरे बंगाल में शोक दिवस मनाया गया, रक्षा बंधन के रूप में राखियाँ बाँधी गईं और बंकिम चंद्र चटर्जी का 'वंदे मातरम्' इस आंदोलन का मुख्य नारा बना। बहिष्कार प्रस्ताव के दायरे में केवल विदेशी वस्त्रों, वस्तुओं का बहिष्कार ही नहीं, बल्कि धीरे-धीरे सरकारी स्कूलों, कॉलेजों, अदालतों, उपाधियों और सरकारी सेवाओं का बहिष्कार भी शामिल होता चला गया, जिससे कथन 2 आंशिक रूप से संकुचित होने के कारण गलत हो जाता है। आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय ने 'बंगाल केमिकल' की स्थापना कर स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा दिया। इस विषय पर विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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