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History of India
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वर्ष 1857 के विद्रोह की प्रकृति और उसके वैचारिक आकलन के संदर्भ में विभिन्न इतिहासकारों और विचारकों के निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. इतिहासकार वी.डी. सावरकर ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस 1857' में इस महान विद्रोह को सुनियोजित ढंग से लड़ा गया भारत का 'प्रथम स्वतंत्रता संग्राम' करार दिया था।
- 2. ब्रिटिश इतिहासकार सर जॉन सीले ने 1857 के विद्रोह को 'पूर्णतः देशभक्तिहीन और स्वार्थी सैनिकों का विद्रोह' (A wholly unpatriotic and selfish sepoy mutiny) बताया था, जिसका उद्देश्य केवल सेना के भीतर असंतोष को दूर करना था।
- 3. प्रसिद्ध मार्क्सवादी इतिहासकार एस.एन. सेन ने अपनी आधिकारिक पुस्तक 'एटी फिफ्टी-सेवेन' (Eighteen Fifty-Seven) में यह निष्कर्ष निकाला था कि जो घटना 'धर्म के युद्ध' के रूप में आरंभ हुई थी, वह अंततः स्वतंत्रता के लिए एक सुनियोजित राष्ट्रीय राजनीतिक संघर्ष में परिवर्तित हो गई थी।
- 4. बंजामिन डिजरायली ने ब्रिटिश संसद में यह तर्क दिया था कि 1857 का यह संकट केवल एक साधारण सैन्य विद्रोह नहीं था, बल्कि यह ब्रिटिश शासन के विरुद्ध एक व्यापक राष्ट्रीय और लोकप्रिय विद्रोह था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 के विद्रोह के संबंध में विभिन्न इतिहासकारों और ब्रिटिश राजनेताओं के मत अत्यधिक चर्चित रहे हैं। कथन 1 सही है क्योंकि विनायक दामोदर सावरकर ने अपनी पुस्तक में इसे 'प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम' कहा था। कथन 2 सही है क्योंकि सर जॉन सीले और सर जॉन लॉरेंस जैसे ब्रिटिश इतिहासकारों ने इसे मात्र एक 'स्वार्थी और देशभक्तिहीन सिपाही विद्रोह' बताया था। कथन 3 गलत है क्योंकि प्रसिद्ध इतिहासकार एस.एन. सेन (Surendra Nath Sen) ने अपनी पुस्तक 'Eighteen Fifty-Seven' में यह निष्कर्ष निकाला था कि 'जो युद्ध धर्म के रूप में शुरू हुआ था, वह स्वतंत्रता के संग्राम के रूप में समाप्त हुआ' — उन्होंने इसे सुनियोजित राष्ट्रीय राजनीतिक संघर्ष नहीं माना था। कथन 4 सही है, ब्रिटिश कंजर्वेटिव नेता बेंजामिन डिजरायली ने संसद में स्वीकार किया था कि यह केवल एक सैन्य विद्रोह नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय विद्रोह था। 1857 के विद्रोह पर अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हर्षवर्द्धन ने अपने शासनकाल के प्रारंभिक वर्षों में कन्नौज को अपनी राजधानी बनाया और चीनी यात्री ह्वेनसांग (Hiuen Tsang) उसके शासनकाल में भारत आया था, जिसने हर्ष द्वारा आयोजित 'प्रयाग की महामोक्ष परिषद' का विस्तृत विवरण दिया है।
2. पल्लव शासक नरसिंहवर्मन् प्रथम ने चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय को पराजित किया और 'वातापिकोंड' की उपाधि धारण की, तथा इसी के शासनकाल में महाबलीपुरम में रथ मंदिरों का निर्माण कार्य शुरू हुआ।
3. चोल सम्राट राजराजा प्रथम ने श्रीलंका (सिंघल) के उत्तरी भाग पर अधिकार कर लिया था और नौसेना की शक्ति को सुदृढ़ करते हुए मालदीव द्वीपों को जीत लिया था, तथा तंजावुर में प्रसिद्ध 'राजराजेश्वर' (बृहदेश्वर) मंदिर का निर्माण करवाया था।
4. बादामी के चालुक्य वंश के अंतर्गत पुलकेशिन प्रथम ने अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया था और चालुक्यों की प्रारंभिक राजधानी 'ऐहोले' थी, जिसे 'मंदिरों का शहर' भी कहा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान विभिन्न ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों और उनके द्वारा विद्रोह दमन किए गए क्षेत्रों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. कर्नल जेम्स नील — बनारस और इलाहाबाद (प्रयागराज) क्षेत्र में अत्यधिक क्रूरता के साथ विद्रोह को कुचला।
2. मेजर जनरल हैवलॉक — कानपुर और लखनऊ में विद्रोही ताकतों के विरुद्ध अभियान का नेतृत्व किया।
3. जॉन निकलसन — दिल्ली पर पुनः अधिकार करने के लिए ब्रिटिश सेना का नेतृत्व करते हुए कश्मीरी गेट पर वीरगति को प्राप्त हुए।
4. सर कॉलिन कैंपबेल — झाँसी और ग्वालियर क्षेत्र में रानी लक्ष्मीबाई व तात्या टोपे की सेना को पराजित किया।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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गदर पार्टी और हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) जैसे क्रांतिकारी संगठनों के वैचारिक विकास, प्रकाशनों और गतिविधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1913 में सैन फ्रांसिस्को में स्थापित 'गदर पार्टी' द्वारा निकाले गए साप्ताहिक पत्र 'ग़दर' के प्रत्येक अंक के मुखपृष्ठ पर 'अंग्रेज़ी राज का कच्चा चिट्ठा' शीर्षक छपता था, जिसमें ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के आर्थिक शोषण और अत्याचारों का विवरण होता था।
2. लाला हरदयाल और सोहन सिंह भाकना द्वारा स्थापित गदर आंदोलन का मुख्य उद्देश्य केवल वैधानिक सुधार प्राप्त करना था, और उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना में भारतीय सैनिकों के बीच विद्रोह भड़काने की किसी भी योजना का पुरजोर विरोध किया था।
3. वर्ष 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) का पुनर्गठन करते हुए इसमें समाजवाद को मुख्य लक्ष्य के रूप में जोड़ा गया और इसका नाम बदलकर 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) कर दिया गया था।
4. भगत सिंह और भगवती चरण बोहरा द्वारा रचित प्रसिद्ध लेख 'द फिलॉसफी ऑफ द बॉम्ब' (बम का दर्शन) में यह स्पष्ट किया गया था कि हिंसा का आशय केवल अराजकता फैलाना नहीं है, बल्कि यह एक अन्यायपूर्ण व्यवस्था को ध्वस्त कर समतावादी समाज की स्थापना का साधन है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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महात्मा गांधी के प्रारंभिक भारतीय आंदोलनों—विशेषकर चंपारण सत्याग्रह (1917), खेड़ा सत्याग्रह (1918) तथा अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन (1918)—के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान, जहाँ यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा किसानों पर 'तिनकाठिया' प्रणाली थोपी गई थी, वहीं गांधीजी के इस आंदोलन की सफलता से प्रभावित होकर रविन्द्रनाथ टैगोर ने उन्हें 'महात्मा' की उपाधि से सम्मानित किया था।
2. खेड़ा सत्याग्रह में फसल बर्बाद होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा लगान वसूली पर अड़े रहने के कारण गांधीजी ने किसानों को लगान न चुकाने (no-tax campaign) का स्पष्ट निर्देश दिया था और इसी आंदोलन के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल गांधीजी के संपर्क में आए थे।
3. अहमदाबाद मिल हड़ताल के दौरान गांधीजी ने प्लेग बोनस को लेकर मिल मालिकों और मजदूरों के बीच मध्यस्थता करते हुए पहली बार भारत में भूख हड़ताल (Hunger strike) का सफल हथियार के रूप में प्रयोग किया था, जिसके परिणामस्वरूप मजदूरों को 50 प्रतिशत वेतन वृद्धि प्राप्त हुई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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