त्वरित लिंक्स
History of India
7 views
बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों, उनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि तथा उनके प्रारंभिक संप्रदायों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बौद्ध धर्म के 'सर्वास्तिवाद' संप्रదాయ के अनुसार सभी धर्म (तत्त्व) भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों कालों में वास्तविक रूप से अस्तित्व रखते हैं, जबकि 'सौत्रान्तिक' संप्रదాయ बाह्य वस्तुओं के अस्तित्व को प्रत्यक्ष के बजाय केवल अनुमानगम्य मानता है।
- 2. जैन धर्म के 'स्यादवाद' या 'अनेकांतवाद' के सिद्धांत के अनुसार ज्ञान सापेक्ष और बहुआयामी होता है, जिसका मुख्य उद्देश्य किसी वस्तु के केवल एक एकांगी सत्य को ही पूर्ण सत्य के रूप में स्थापित करना है।
- 3. बौद्ध धर्म की महायान शाखा के अंतर्गत शून्यवाद (माध्यमिक दर्शन) के प्रवर्तक आचार्य नागार्जुन थे, जिन्होंने प्रतीत्यसमुत्पाद को ही शून्यता का पर्याय माना है, जिसका अर्थ है कि सभी धर्म स्वसंभाव से रहित हैं।
- 4. जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय के विपरीत दिगंबर संप्रदाय यह मानता है कि स्त्रियाँ अपने इसी शरीर के साथ मोक्ष प्राप्त करने की पूर्ण अधिकारिणी होती हैं और उन्हें तीर्थंकर बनने की भी अनुमति है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि सर्वास्तिवाद संप्रదాయ के अनुसार सभी धर्मों का अस्तित्व तीनों कालों (भूत, भविष्य और वर्तमान) में रहता है, और सौत्रान्तिक संप्रదాయ बाह्य जगत के अस्तित्व को अनुमान से सिद्ध मानता है। कथन 2 गलत है क्योंकि जैन धर्म का 'स्यादवाद' या 'अनेकांतवाद' किसी एक एकांगी सत्य को पूर्ण सत्य मानने का खंडन करता है और वस्तु के अनेक धर्मों की सापेक्षता को स्वीकार करता है। कथन 3 सही है क्योंकि माध्यमिक दर्शन के प्रणेता आचार्य नागार्जुन ने प्रतीत्यसमुत्पाद को शून्यता का ही रूप माना है। कथन 4 गलत है क्योंकि दिगंबर संप्रदाय के अनुसार महिलाओं के लिए मोक्ष प्राप्ति असंभव मानी गई है और उन्हें पुरुष योनि में जन्म लेना आवश्यक बताया गया है। बौद्ध धर्म के विस्तृत इतिहास और दर्शन के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Related Questions
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और इसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 1857 के विद्रोह का कोई केंद्रीयकृत और एकीकृत राजनीतिक नेतृत्व नहीं था; यद्यपि मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को प्रतीकात्मक नेता घोषित किया गया था, किंतु उनमें और विभिन्न क्षेत्रीय विद्रोहियों में रणनीतिक समन्वय का अभाव था।
2. विद्रोही नेताओं के पास आधुनिक सैन्य तकनीक, संचार साधनों (जैसे टेलीग्राफ और रेलवे जिनका उपयोग अंग्रेजों ने किया) तथा दूरदर्शी राजनीतिक एजेंडे की कमी थी, जिसके कारण वे ब्रिटिश साम्राज्यवाद का कोई ठोस वैकल्पिक राज्य मॉडल प्रस्तुत नहीं कर सके।
3. देश के अधिकांश बड़े जमींदार, अधिकांश रियासतों के शासक (जैसे हैदराबाद, ग्वालियर और इंदौर के शासक) तथा शिक्षित एवं आधुनिकतावादी मध्य वर्ग ने इस विद्रोह से तटस्थता बनाए रखी या ब्रिटिश शासन का सक्रिय समर्थन किया।
4. विद्रोहियों के पास वित्तीय संसाधनों और हथियारों की निरंतर आपूर्ति का अभाव था, और उनका संघर्ष मुख्य रूप से स्थानीय grievances (स्थानीय शिकायतों) तक ही सीमित रहा, जिससे यह संपूर्ण भारत में एक साथ एक ही दिशा में संचालित नहीं हो सका।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मराठा साम्राज्य के प्रशासन, राजस्व व्यवस्था और छत्रपति शिवाजी महाराज की सैन्य नीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी की केंद्रीय मंत्रिपरिषद 'अष्टप्रधान' के सभी आठ मंत्रियों के पद पूरी तरह से वंशानुगत थे, और यह एक नीति-निर्माता मंत्रिमंडल था जो राजा के आदेशों के बिना भी स्वतंत्र रूप से कानून बनाने का पूर्ण अधिकार रखता था।
2. 'चौथ' कर पड़ोसी गैर-मराठा क्षेत्रों से उनकी सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बदले वसूला जाने वाला कुल राजस्व का 25 प्रतिशत था, जबकि 'सरदेशमुखी' शिवाजी द्वारा संपूर्ण महाराष्ट्र के सर्वोच्च देशमुखी (प्रधान मुखिया) होने के दावे के आधार पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत कर के रूप में वसूला जाता था।
3. शिवाजी की घुड़सवार सेना में 'सिलहदार' वे सैनिक होते थे जिन्हें राज्य द्वारा घोड़े और अस्त्र-शस्त्र दिए जाते थे, जबकि 'बरगीर' अपने स्वयं के घोड़े और हथियार लेकर युद्ध में सम्मिलित होते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली पर अधिकार करने के पश्चात मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की स्थिति तथा विद्रोहियों और सम्राट के मध्य संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बहादुर शाह जफर ने स्वेच्छा से और प्रसन्नतापूर्वक विद्रोहियों का नेतृत्व स्वीकार किया था तथा वे ब्रिटिश शासन के विरुद्ध एक मजबूत और आक्रामक सैन्य रणनीति तैयार करने में पूरी तरह सक्रिय रहे।
2. दिल्ली में वास्तविक प्रशासनिक और सैन्य सत्ता 'कोर्ट ऑफ सोल्जर्स' (सैनिकों की अदालत) के हाथों में निहित थी, जिसके सदस्यों का चयन विभिन्न रेजिमेंटों से आए सिपाहियों द्वारा किया जाता था, और सम्राट के अधिकारिक आदेशों को भी इस अदालत की स्वीकृति की आवश्यकता होती थी।
3. सम्राट के नाम पर जारी शाही घोषणाओं और फरमानों में सभी वर्गों (विशेषकर हिंदू और मुस्लिम जनता) से अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद और सशस्त्र संघर्ष में शामिल होने की अपील की गई थी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों और रियासतों को एक प्रतीकात्मक वैधानिकता प्राप्त हुई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
बौद्ध धर्म एवं जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों तथा उनके ऐतिहासिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बौद्ध धर्म के अनुसार संसार का मूल आधार 'प्रतीत्यसमुत्पाद' (कारण-कार्य सिद्धांत) है, जिसके अनुसार प्रत्येक वस्तु किसी न किसी कारण से उत्पन्न होती है, जबकि जैन धर्म का 'स्याद्वाद' (सप्तभंगीनय) ज्ञान की सापेक्षता का सिद्धांत है जो यह मानता है कि प्रत्येक सत्य दृष्टिकोण-सापेक्ष होता है।
2. जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय के अनुयायी मोक्ष प्राप्ति के लिए नग्न रहना अनिवार्य मानते हैं और वे तीर्थंकरों की मूर्तियों को वस्त्रहीन और आभूषण-रहित पूजते हैं, जबकि दिगंबर संप्रदाय के भिक्षु श्वेत वस्त्र धारण करते हैं।
3. बौद्ध संघ की सदस्यता के लिए प्रारंभिक काल में जाति, वर्ण या लिंग का कोई बंधन नहीं था, और महात्मा गांधी के समकालीन बौद्ध ग्रंथों में महिलाओं को संघ में प्रवेश देने का उल्लेख है जिसमें सबसे पहले उनकी माता महाप्रजापति गौतमी को दीक्षित किया गया था।
4. जैन दर्शन में 'त्रिरत्न' (सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चरित्र) को मोक्ष का मार्ग बताया गया है, और जैन परंपरा के अनुसार महावीर स्वामी जैन धर्म के वास्तविक संस्थापक (प्रथम तीर्थंकर) माने जाते हैं, जिन्होंने पूर्ववर्ती विचारों को पूरी तरह खारिज कर एक नया दर्शन दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन एवं तत्पश्चात प्रारंभ हुए स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में हुए नवाचारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्वदेशी आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा की आवश्यकता को पूरा करने के लिए अगस्त 1906 में 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (National Council of Education) का गठन किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य साहित्यिक और वैज्ञानिक शिक्षा के साथ-साथ तकनीकी शिक्षा प्रदान करना था।
2. इस आंदोलन के रचनात्मक कार्यक्रमों के तहत आचार्य प्रफुल्ल चन्द्र राय ने स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 'बंगाल केमिकल एंड फार्मास्युटिकल वक्र्स' (Bengal Chemical and Pharmaceutical Works) की स्थापना की थी।
3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान सांस्कृतिक क्षेत्र में हुए पुनर्जागरण के अंतर्गत अवनिंद्रनाथ टैगोर ने 'इंडियन सोसाइटी ऑफ ओरिएंटल आर्ट' की स्थापना की, तथा उनकी प्रसिद्ध पेंटिंग 'भारत माता' ने राष्ट्रवादियों के बीच अपार लोकप्रियता हासिल की।
4. स्वदेशी आंदोलन का प्रभाव केवल बंगाल तक ही सीमित रहा, और बंबई, मद्रास या पंजाब जैसे अन्य प्रांतों के नेताओं ने ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार के प्रस्ताव को पूर्णतः अस्वीकार कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.