त्वरित लिंक्स
History of India
7 views
हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) और भारतीय स्वतंत्रता के लिए चलाए गए क्रांतिकारी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. सितंबर 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) का पुनर्गठन करके 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) की स्थापना की गई थी, जिसमें समाजवाद को इसके घोषणापत्र का मुख्य उद्देश्य बनाया गया था।
- 2. भगत सिंह और उनके सहयोगियों द्वारा दिसंबर 1928 में लाहौर में ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन सॉंडर्स की हत्या का मुख्य उद्देश्य लाला लाजपत राय की लाठीचार्ज से हुई मृत्यु का बदला लेना था, जिसे साइमन कमीशन के विरोध के दौरान घायल किया गया था।
- 3. वर्ष 1929 में केंद्रीय विधानसभा (दिल्ली) में बम फेंकने की ऐतिहासिक घटना का नेतृत्व भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने किया था, जिसका उद्देश्य किसी की हत्या करना नहीं बल्कि 'बहरों को सुनना' और ट्रेड डिस्प्यूट बिल तथा पब्लिक सेफ्टी बिल के विरोध में अपनी आवाज बुलंद करना था।
- 4. चटगांव शस्त्रागार लूट कांड (1930) का नेतृत्व सूर्य सेन (मास्टर दा) ने किया था, जिन्होंने 'इंडियन रिपब्लिकन आर्मी' (IRA) की चटगांव शाखा के माध्यम से ब्रिटिश हथियारों पर कब्जा करने की योजना बनाई थी और इस दल में कल्पना दत्त एवं प्रीतिलता वाडेदार जैसी वीर महिलाएँ भी शामिल थीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। वर्ष 1928 में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में फिरोजशाह कोटला में 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' का नाम बदलकर 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' कर दिया गया था। साइमन कमीशन के विरोध में लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेने के लिए सॉंडर्स वध किया गया, और अप्रैल 1929 में भगत सिंह तथा बटुकेश्वर दत्त ने असेंबली में बम फेंका। इसके अतिरिक्त, सूर्य सेन के नेतृत्व में चटगांव आर्मरी रेड को अंजाम दिया गया था। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 'सोलह महाजनपदों' और मगध साम्राज्य के उत्थान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में छठी शताब्दी ईसा पूर्व के सोलह महाजनपदों की सूची मिलती है, जिसमें वज्जी और मल्ल संघ राजतंत्रात्मक व्यवस्था के स्थान पर गणतंत्रात्मक (Oligarchy/Republic) शासन प्रणाली का पालन करते थे।
2. मगध साम्राज्य के उत्थान में उसकी भौगोलिक स्थिति की महत्वपूर्ण भूमिका थी; इसकी प्रारंभिक राजधानी राजगृह (गिरिव्रज) पाँच पहाड़ियों से घिरी होने के कारण सामरिक दृष्टि से अत्यंत सुरक्षित थी और बाद में पाटलिपुत्र को राजधानी बनाए जाने से गंगा, सोन और गंडक नदियों के जलमार्गों पर नियंत्रण मिल गया।
3. हर्यक वंश के शासक बिम्बिसार (श्रेणिक) ने वैवाहिक संबंधों (जैसे कौशल, वैशाली और मद्र कुल की राजकुमारियों से विवाह) और अंग राज्य को जीतकर मगध की शक्ति का विस्तार किया, जबकि उसके पुत्र अजातशत्रु (कुणिक) ने अपने शासनकाल में लिच्छवियों और वज्जी संघ को पराजित कर मगध में मिला लिया था।
4. नंद वंश के संस्थापक महापद्मनंद को पुराणों में 'सर्वक्षत्रान्तक' (सभी क्षत्रियों का नाश करने वाला) और 'एकराट्' की उपाधि से विभूषित किया गया है, तथा इसी वंश के शासनकाल में सिकंदर ने भारत पर आक्रमण किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34), प्रथम गोलमेज सम्मेलन (1930) तथा गांधी-इरविन समझौते (1931) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1930 में महात्मा गांधी द्वारा आरंभ किए गए दांडी मार्च के साथ ही देश के विभिन्न भागों में 'चौकीदारी कर' का भुगतान न करने का अभियान, वन कानूनों का उल्लंघन तथा उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत में खान अब्दुल गफ्फार खान के नेतृत्व में 'खुदाई खिदमतगार' (लाल कुर्ती दल) द्वारा सविनय अवज्ञा आंदोलन का अत्यंत प्रभावी संचालन किया गया था।
2. 5 मार्च 1931 को हस्ताक्षरित 'दिल्ली समझौता' (गांधी-इरविन समझौता) के अंतर्गत सरकार ने हिंसा के मामलों में संलिप्त व्यक्तियों को छोड़कर सभी राजनीतिक कैदियों को रिहा करने पर सहमति व्यक्त की, तथा कांग्रेस ने सविनय अवज्ञा आंदोलन को स्थगित कर आगामी द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेना स्वीकार किया।
3. वर्ष 1930 से 1932 के मध्य लंदन में आयोजित तीनों गोलमेज सम्मेलनों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था, क्योंकि गांधी-इरविन समझौते के पश्चात कांग्रेस ने सभी सम्मेलनों में अपनी उपस्थिति अनिवार्य कर दी थी।
4. कराची में मार्च 1931 में आयोजित कांग्रेस के अधिवेशन में गांधी-इरविन समझौते का अनुमोदन किया गया, तथा इसी अधिवेशन में पहली बार 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम' से संबंधित ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया गया जिसकी अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों (स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लॉर्ड कार्नवालिस द्वारा 1793 में बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लागू किए गए 'स्थाई बंदोबस्त' (Permanent Settlement) के तहत जमींदारों को भूमि का वास्तविक स्वामी मान लिया गया, जिससे पारंपरिक कृषकों की स्थिति केवल किरायेदारों (Tenants) तक सीमित हो गई और 'सूर्योस्त कानून' (Sunset Law) के कारण अनेक जमींदारों की अपनी पुश्तैनी ज़मीनें भी नीलाम हो गईं।
2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी में विकसित 'रयतवारी व्यवस्था' में सरकार और किसान (रयत) के बीच सीधा भू-राजस्व समझौता हुआ, जिसमें बीच के बिचौलियों या जमींदारों को समाप्त कर दिया गया, किंतु अत्यधिक ऊँची लगान दरों और अकाल के समय भी कर में कोई छूट न मिलने के कारण किसान साहूकारों के चंगुल में फंसते चले गए।
3. हॉल्ट मैकेंज़ी द्वारा परिकल्पित और विलियम बेंटिंक के शासनकाल में उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के क्षेत्रों में लागू 'महालवारी व्यवस्था' के अंतर्गत भू-राजस्व का निर्धारण व्यक्तिगत किसान या पूरे गाँव (महाल) के स्तर पर सामूहिक रूप से किया गया, जिसमें गाँव के मुखिया या लंबरदार को राजस्व संग्रह की व्यक्तिगत और सामूहिक जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
4. इन तीनों प्रमुख भू-राजस्व प्रणालियों का दीर्घकालिक प्रभाव यह हुआ कि भारतीय कृषि का बड़े पैमाने पर व्यावसायीकरण (Commercialization of Agriculture) हुआ, जिससे खाद्यान्न उत्पादन में भारी वृद्धि हुई और भारतीय किसानों को वैश्विक बाजार का सीधा आर्थिक लाभ मिलने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत सुदृढ़ हो गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
शाहजहाँ ने किस वर्ष बीजापुर और गोलकुंडा के साथ संधि कर उन्हें कर देने के लिए विवश किया?
→
तुगलक वंश की स्थापना 1320 ई. में किसने की थी?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.