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History of India
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह के दमन तथा उनके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
- 1. फैजाबाद: यहाँ विद्रोह का नेतृत्व मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने किया था, और इस क्षेत्र में विद्रोह का दमन ब्रिटिश सेनापति कर्नल नील द्वारा क्रूरतापूर्वक किया गया था।
- 2. बरेली: यहाँ रोहिल्ला सेना के अंतिम शासक के वंशज खान बहादुर खान ने विद्रोह की कमान संभाली थी, जिन्हें अंततः ब्रिटिश जनरल सर कॉलिन कैंपबेल की सेना ने पराजित कर इस क्षेत्र पर पुनः नियंत्रण स्थापित किया था।
- 3. इलाहाबाद: यहाँ मौलवी लियाकत अली ने विद्रोह का नेतृत्व किया था, और इस महत्वपूर्ण सामरिक केंद्र पर ब्रिटिश अधिकार पुनः स्थापित करने का श्रेय जनरल कर्नल नील को जाता है, जिन्होंने यहाँ भीषण नरसंहार किया था।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी अहमदुल्लाह शाह (डंका शाह) ने किया था, किंतु फैजाबाद और इलाहाबाद दोनों ही स्थानों पर विद्रोह का क्रूरतापूर्वक दमन करने वाला ब्रिटिश अधिकारी जनरल कर्नल नील था। इसलिए युग्म 1 तकनीकी रूप से गलत हो जाता है क्योंकि फैजाबाद में जनरल नील का मुख्य सामना और दमन अभियान इलाहाबाद की तरह ही प्रमुखता से जुड़ा है, जबकि आधिकारिक तौर पर इलाहाबाद में भी कर्नल नील ने ही भीषण नरसंहार करके विद्रोह को कुचला था। बरेली में रोहिल्ला नेता खान बहादुर खान ने कमान संभाली थी और अंततः सर कॉलिन कैंपबेल ने वहाँ पुनः नियंत्रण स्थापित किया था। विकिपीडिया संदर्भ
Related Questions
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मुगलकालीन प्रशासनिक और सैन्य व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अकबर द्वारा प्रशासनिक सुधारों के तहत शुरू की गई 'मनसबदारी व्यवस्था' आंशिक रूप से मंगोलों की दशमलव पद्धति पर आधारित थी, जिसमें प्रत्येक मनसबदार को अपने पद के अनुसार 'जात' (व्यक्तिगत पद और वेतन) और 'सवार' (घुड़सवार सैनिकों की संख्या) का निर्धारण करना होता था।
2. जहांगीर के शासनकाल में चित्रकला अपने स्वर्ण युग पर थी, और इसी काल में नूरजहाँ ने एक शक्तिशाली राजनीतिक गुट ('जहाँगीर गुट' या ज्यूरी) का निर्माण किया था, जिसमें उनके पिता इत्तिमद उद्दौला और भाई आसफ खान शामिल थे।
3. शाहजहाँ के शासनकाल में स्थापत्य कला ने चरम सीमा को छुआ, किंतु इस काल में बर्नियर और ट्रैवर्नीयर जैसे विदेशी यात्रियों ने यह उल्लेख किया कि साम्राज्य की अत्यधिक केंद्रीकृत प्रशासनिक व्यवस्था और कृषि पर बढ़ते राजस्व बोझ के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय हो गई थी।
4. औरंगजेब द्वारा पुनः 'जिजिया' कर लगाया जाना तथा मंदिरों को तोड़ने की उसकी नीति केवल धार्मिक असहिष्णुता का परिणाम थी, और इस काल में मुगल साम्राज्य का कुल क्षेत्रफल अपने न्यूनतम स्तर पर आ गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वैदिक साहित्य और विशेष रूप से 'ब्राह्मण ग्रंथों' तथा 'उपनिषदों' केार्दार्शनिक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्राह्मण ग्रंथ वेदों के गद्य रूप में लिखे गए टीका-ग्रंथ हैं, जो यज्ञों के अनुष्ठानों, उनके सामाजिक और प्रतीकात्मक अर्थों की व्याख्या करते हैं; उदाहरण के लिए, शतपथ ब्राह्मण में विदेह माधव की कथा और कृषि की विभिन्न अवस्थाओं (जुताई, बुआई, कटाई और मड़ाई) का विस्तृत विवरण मिलता है।
2. उपनिषदों को 'वेदांत' भी कहा जाता है, क्योंकि ये वैदिक साहित्य के अंतिम भाग हैं और इनका मुख्य केंद्र बिंदु कर्मकांडीय यज्ञीय अनुष्ठान न होकर आत्मन् (आत्मा) और ब्रह्म (परम सत्य) के बीच के दार्शनिक संबंध का ज्ञान है।
3. ऋग्वैदिक काल में लोहे (श्याम अयस) की खोज हो चुकी थी और इसका उपयोग बड़े पैमाने पर बड़े कृषि उपकरणों तथा हथियारों के निर्माण के लिए किया जाता था, जिससे घुमंतू समाज पूरी तरह स्थिर कृषि समाज में बदल गया था।
4. वैदिक कालीन राजनीतिक संस्थाओं में 'सभा' और 'समिति' का विशेष महत्व था, जहाँ समिति में आम जनता की भागीदारी होती थी और वह राजा के निर्वाचन तथा नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी, जबकि सभा मुख्य रूप से कुलीन या वृद्ध लोगों की एक संस्था थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनके संस्थापकों तथा वैचारिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और पुरोहितवाद का कड़ा विरोध करते हुए एकेश्वरवाद और उपनिषदों की तार्किकता पर बल दिया, तथा वर्ष 1866 में केशव चंद्र सेन के नेतृत्व में ब्रह्म समाज के विभाजन के बाद 'साधारण ब्रह्म समाज' की स्थापना हुई जिसने बाल विवाह के विरुद्ध कानून बनवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और वेदों को अपौरुषेय मानते हुए मूर्तिपूजा, अवतारवाद, श्राद्ध और जन्म आधारित जाति व्यवस्था का कड़ा विरोध किया।
3. ज्योतिराव फुले ने वर्ष 1873 में 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य शूद्रों और अति-शूद्रों को वैचारिक रूप से ब्राह्मणवादी वर्चस्व और धार्मिक रूढ़ियों से मुक्त कराना था, तथा उनकी प्रसिद्ध पुस्तक 'गुलामगिरी' में इस विचारधारा का स्पष्ट दस्तावेज मिलता है।
4. प्रार्थना समाज की स्थापना आत्माराम पांडुरंग ने वर्ष 1867 में बॉम्बे में की थी, जिसे एम.जी. रानाडे और आर.जी. भंडारकर जैसे विद्वानों का सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ, और इसका मुख्य ध्यान अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और स्त्री शिक्षा जैसे सामाजिक सुधारों पर था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नाना साहब (पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र) ने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व संभाला और स्वयं को पेशवा घोषित करते हुए अंग्रेजों से ब्रिटिश पेंशन बहाल करने की माँग की, जिसे अस्वीकार किए जाने पर उन्होंने ब्रिटिश छावनी पर अधिकार कर लिया।
2. तात्या टोपे, जो नाना साहब के अत्यंत योग्य और विश्वासपात्र सैन्य कमांडर थे, ने कानपुर के पतन के बाद ग्वालियर में भी विद्रोही सेना का प्रभावी नेतृत्व किया और अंग्रेजों के विरुद्ध अत्यंत कुशल छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare) का संचालन किया।
3. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार और निष्ठावान सहयोगी थे, ने विद्रोह से पूर्व लंदन जाकर ब्रिटिश संसद के समक्ष नाना साहब की पेंशन से संबंधित मामलों की पैरवी की थी और बाद में विद्रोह के दौरान कूटनीतिक एवं प्रचार प्रसार की गतिविधियों में प्रमुख भूमिका निभाई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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मुगलकालीन प्रशासनिक संस्थाओं और नीतियों के विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अकबर के शासनकाल में वर्ष 1574-75 के आसपास मनसबदारी व्यवस्था की शुरुआत की गई थी, जिसमें 'जात' पद मनसबदार के व्यक्तिगत वेतन और पद-स्थिति को दर्शाता था, जबकि 'सवार' पद उसके द्वारा रखे जाने वाले घुड़सवार सैनिकों की संख्या को निश्चित करता था।
2. जहाँगीर ने मनसबदारी व्यवस्था में एक नया सुधार करते हुए 'दुअस्पा-सिंहअस्पा' प्रणाली की शुरुआत की, जिसके अंतर्गत बिना 'जात' पद बढ़ाए किसी मनसबदार को अपने निर्धारित 'सवार' घोड़ों की संख्या दोगुनी करने की अनुमति मिल जाती थी।
3. शाहजहाँ के शासनकाल के अंतिम वर्षों में मनसबदारों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि हो जाने के कारण उन्हें वेतन भुगतान के लिए पर्याप्त 'खलसा' और 'जागीर' भूमियाँ उपलब्ध नहीं हो पा रही थीं, जिसके परिणामस्वरूप उत्पन्न इस गंभीर वित्तीय असंतुलन को 'जागीर संकट' कहा जाता है।
4. औरंगजेब ने अपने शासनकाल में चित्रकला को पूरी तरह राजकीय संरक्षण से वंचित कर दिया, संगीत पर प्रतिबंध लगा दिया तथा प्रशासनिक अधिकारियों पर कठोर धार्मिक व नैतिक नियमों का पालन करने के लिए 'मुहतसिब' (जन आचरण के निरीक्षकों) की नियुक्ति की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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