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History of India
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और बंगाल में ब्रिटिश सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक दौर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वर्ष 1717 में मुगल सम्राट फारुकसियर द्वारा जारी फरमान के तहत ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल में 3,000 रुपये वार्षिक कर के एवज में बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के मुक्त व्यापार (दस्तक प्रणाली) का अधिकार मिला, जिससे कंपनी के निजी अधिकारियों को भी अपने व्यक्तिगत व्यापार पर इस छूट का उपयोग करने की पूर्ण स्वतंत्रता मिल गई थी।
- 2. अलीवर्दी खान ने यूरोपीय व्यापारियों की तुलना 'मधुमक्खियों' से करते हुए कहा था कि यदि उन्हें छेड़ा न जाए तो वे शहद देंगी, और यदि उन्हें काटा जाए तो वे डंक मारकर मार डालेंगी; उसने अंग्रेजों को अपनी मर्जी से बंगाल की किलाबंदी करने की कभी अनुमति नहीं दी।
- 3. सिराजुद्दौला के शासनकाल के दौरान अंग्रेजों द्वारा कलकत्ता की किलेबंदी को अवैध रूप से सुदृढ़ करने और 'दस्तक' प्रणाली के दुरुपयोग के विरोध में उसने जून 1756 में कलकत्ता (फोर्ट विलियम) पर आक्रमण कर उस पर अधिकार कर लिया था।
- 4. प्लासी के युद्ध (1757) में सिराजुद्दौला की पराजय के पश्चात मीर जाफर को बंगाल का नया नवाब बनाया गया, और इस युद्ध के ठीक बाद कंपनी को कलकत्ता के आसपास की जमींदारी के साथ-साथ उत्तरी सरकार के महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर भी पूर्ण स्वामित्व प्राप्त हो गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि फारुकसियर के फरमान द्वारा दी गई कर-मुक्त व्यापार की सुविधा केवल कंपनी के आधिकारिक व्यापार (Company's trade) के लिए थी, न कि कंपनी के कर्मचारियों के निजी व्यापार (Private trade) के लिए। निजी व्यापार पर कर चुकाना अनिवार्य था, लेकिन ब्रिटिश अधिकारी इस 'दस्तक' का दुरुपयोग अपने निजी व्यापार पर भी कर चोरी के लिए करते थे। कथन 2 सही है, अलीवर्दी खान ने यूरोपीय कंपनियों के संदर्भ में मधुमक्खी वाला प्रसिद्ध कथन कहा था और उसने अंग्रेजों तथा फ्रांसीसियों को अपने कारखानों की किलेबंदी करने से रोका था। कथन 3 सही है, सिराजुद्दौला ने कलकत्ता की अनधिकृत किलेबंदी और 'दस्तक' के भारी दुरुपयोग के कारण फोर्ट विलियम पर जून 1756 में आक्रमण कर अधिकार कर लिया था। कथन 4 गलत है क्योंकि प्लासी के युद्ध के बाद कंपनी को 'उत्तरी सरकार' (Northern Circars) का क्षेत्र तुरंत नहीं मिला था, बल्कि यह बाद में अंग्रेजों के नियंत्रण में आया था। इस ऐतिहासिक कालखंड के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के तात्कालिक कारणों और चर्बी वाले कारतूस की घटना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सेना में नए 'एनफील्ड' राइफल को शामिल किए जाने से पहले सैनिकों को प्रयुक्त होने वाले कारतूसों के बारे में यह अफ़वाह फैल गई थी कि उनके आवरण पर गाय और सुअर की चर्बी का लेप लगा हुआ है, जिसे लोड करने से पहले दांतों से काटना पड़ता था।
2. इस घटना की शुरुआत सर्वप्रथम जनवरी 1857 में दमदम (कोलकाता के पास) छावनी में हुई थी, जहाँ भारतीय सैनिकों ने इन कारतूसों के प्रयोग के विरुद्ध आधिकारिक रूप से खुलेआम बगावत कर दी थी।
3. बैरकपुर छावनी (34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को इन कारतूसों के प्रयोग के आदेश का कड़ा विरोध करते हुए ब्रिटिश अधिकारियों (लेफ्टिनेंट बॉग और सार्जेंट ह्यूसन) पर आक्रमण कर दिया था, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फाँसी दे दी गई थी।
4. चर्बी वाले कारतूस की इस घटना से उपजे असंतोष ने केवल भारतीय सैनिकों को ही प्रभावित किया, जबकि ग्रामीण इलाकों के किसानों, कारीगरों और पारंपरिक शिल्पकारों ने इस मुद्दे को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया था और वे ब्रिटिश प्रशासन के प्रति वफादार बने रहे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मराठा साम्राज्य के उत्कर्ष और छत्रपति शिवाजी द्वारा स्थापित प्रशासनिक एवं राजस्व व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी ने अपनी प्रशासनिक व्यवस्था में जागीरदारी प्रथा को पूर्णतः हतोत्साहित किया और उसके स्थान पर नगद वेतन देने की परंपरा को बढ़ावा दिया, हालांकि सेना के बड़े सरदारों को 'सरनौबत' के माध्यम से भूमि अनुदान (सरदेशमुखी के अधिकार सहित) दिए जाते थे।
2. 'चौथ' कर पड़ोसी मुगल क्षेत्रों या उन क्षेत्रों से वसूला जाता था जो मराठा आधिपत्य को स्वीकार करते थे, और यह कर उस क्षेत्र के कुल भू-राजस्व का एक-चौथाई हिस्सा होता था जिसके बदले मराठा शासक उस क्षेत्र की बाहरी आक्रमणों से सुरक्षा (मुगल आक्रमणों से मुक्ति) की गारंटी देते थे।
3. 'सरदेशमुखी' एक प्रकार का अतिरिक्त कर (अधिशुलक) था जो कुल उपज का 10 प्रतिशत होता था, जिसे शिवाजी महाराष्ट्र के अपने स्वराज्य क्षेत्र के साथ-साथ उन क्षेत्रों से भी वसूल करते थे जिन पर वे अपने वंशानुगत देशमुखी अधिकारों का दावा करते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 'नरम दल' और 'गरम दल' के वैचारिक संघर्ष, रणनीतियों तथा बंगाल विभाजन के उपरांत उत्पन्न राजनीतिक परिदृश्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस के विभाजन के पीछे मुख्य वैचारिक मतभेद यह था कि गरम दल के नेता स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को केवल बंगाल तक सीमित रखना चाहते थे, जबकि नरम दल के नेता इसे पूरे देश में प्रसारित करना चाहते थे।
2. लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और विपिन चंद्र पाल (जिन्हें 'लाल-बाल-पाल' त्रिपुटी कहा जाता है) ने प्रशासनिक सुधारों के लिए ब्रिटिश न्यायप्रियता में विश्वास रखने की नरमपंथियों की 'भिक्षुक वृत्ति' (Mendicancy) की तीखी आलोचना की और पूर्ण स्वराज या आक्रामक राजनीतिक संघर्ष पर बल दिया।
3. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पहली बार 'स्वराज' (Self-Government) को अपने राजनीतिक लक्ष्य के रूप में स्वीकार किया था, जिसे लेकर नरमपंथियों और उग्रवादियों के बीच तीखी तनातनी हुई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और उसके विरोध में उपजे स्वदेशी आंदोलन (1905) के ऐतिहासिक घटनाक्रम के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन के निर्णय की आधिकारिक घोषणा जुलाई 1905 में की गई थी, जिसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में ऐतिहासिक बैठक आयोजित करके 'बहिष्कार प्रस्ताव' पारित किया गया था।
2. जिस दिन (16 अक्टूबर 1905) बंगाल विभाजन प्रभावी हुआ, उस दिन को पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, जहाँ लोगों ने उपवास रखा, नंगे पाँव जुलूस निकाले और रवीन्द्रनाथ टैगोर के आह्वान पर एक-दूसरे की कलाई पर 'रक्षा बंधन' बांधकर एकता का प्रदर्शन किया।
3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए वर्ष 1906 में 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (National Council of Education) की स्थापना की गई थी, जिसके प्रथम अध्यक्ष सतेंद्र नाथ बसु बनाए गए थे।
4. कलकत्ता में आयोजित 1905 के कांग्रेस अधिवेशन में नरम दल और गरम दल के बीच वैचारिक मतभेदों के कारण स्वदेशी और बहिष्कार के प्रस्तावों को कांग्रेस के आधिकारिक मंच से पारित नहीं किया जाने दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप कांग्रेस का पहला औपचारिक विभाजन हुआ था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित 'आज़ाद हिंद फौज' (INA) के ऐतिहासिक घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के कई हिस्सों में 'समांतर सरकारों' (Parallel Governments) की स्थापना की गई थी, जिसमें बलिया में चित्तू पाण्डू के नेतृत्व में, ताम्रलिप्त (बंगाल) में 'जातीय सरकार' के तहत और सतारा में 'प्रती सरकार' (वाई.बी. चव्हाण और नाना पाटिल के नेतृत्व में) सबसे लंबे समय तक चलने वाली समांतर सरकारों में प्रमुख थीं।
2. सुभाष चंद्र बोस ने वर्ष 1943 में सिंगापुर में औपचारिक रूप से 'आज़ाद हिंद सरकार' (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) की स्थापना की और वे जापान के सहयोग से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर नियंत्रण प्राप्त करने के बाद क्रमशः उनका नाम 'शहीद द्वीप' और 'स्वराज द्वीप' रखा।
3. जापानी सेना की सहायता से आगे बढ़ते हुए INA की 'गांधी ब्रिगेड', 'सुभाष ब्रिगेड' और महिलाओं की एक अलग टुकड़ी 'झाँसी की रानी रेजिमेंट' ने इम्फाल और कोहिमा के मोर्चों पर ब्रिटिश सेना के विरुद्ध कड़ा संघर्ष किया, और इस पूरी सैन्य अभियान के दौरान जापानी सेना ने INA को रणनीतिक स्वायत्तता देते हुए कभी भी अपनी कमान के अधीन नहीं रखा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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