BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
5 views

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रारंभिक वर्षों (नरम दल काल) के दौरान ब्रिटिश शासन के प्रति दृष्टिकोण और कार्यप्रणालियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. नरमपंथी नेताओं (जैसे दादाभाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता और सुरेंद्रनाथ बनर्जी) का ब्रिटिश न्यायप्रियता में दृढ़ विश्वास था, जिसके कारण उन्होंने 'प्रार्थना, याचिका और विरोध' (Prayer, Petition and Protest) की पद्धति को अपनी मुख्य राजनीतिक रणनीति बनाया।
  2. 2. गोपाल कृष्ण गोखले द्वारा वर्ष 1905 में स्थापित 'सर्वेंट्स ऑफ़ इंडिया सोसाइटी' (Servants of India Society) का मुख्य उद्देश्य देश में राजनीतिक आंदोलनों को उग्र बनाना और ब्रिटिश वस्तुओं के पूर्ण बहिष्कार का प्रचार करना था।
  3. 3. नरमपंथियों द्वारा ब्रिटिश शासन के आर्थिक शोषण के सिद्धांत (Drain of Wealth) को उजागर किया गया, जिसके तहत दादाभाई नौरोजी ने अपनी प्रसिद्ध कृति 'पावर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' में यह दर्शाया कि किस प्रकार भारत की संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा ब्रिटेन की ओर बह रहा है।
  4. 4. कांग्रेस के 1907 के सूरत अधिवेशन में नरमदल और गरमदल के बीच हुए विभाजन का मुख्य कारण लाला लाजपत राय को कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए निर्वाचित करना था, जिसका नरमपंथियों ने कड़ा विरोध किया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि नरमपंथी नेता ब्रिटिश न्यायप्रियता में विश्वास रखते थे और संवैधानिक दायरे में रहकर अपनी माँगे मनवाने के लिए 'प्रार्थना और याचिका' की नीति अपनाते थे। कथन 2 गलत है क्योंकि गोपाल कृष्ण गोखले द्वारा स्थापित 'सर्वेंट्स ऑफ़ इंडिया सोसाइटी' का उद्देश्य राजनीतिक आंदोलन चलाना या बहिष्कार करना नहीं, बल्कि विभिन्न जातियों और धर्मों के भारतीयों को देश सेवा के लिए प्रशिक्षित करना और समाज सुधार के कार्य करना था। कथन 3 सही है क्योंकि दादाभाई नौरोजी ने 'धन की निकासी' (Drain of Wealth) के सिद्धांत का प्रतिपादन किया था। कथन 4 गलत है क्योंकि 1907 के सूरत अधिवेशन में गरमदल वाले लाला लाजपत राय या बाल गंगाधर तिलक को अध्यक्ष बनाना चाहते थे, जबकि नरमपंथियों ने रासबिहारी घोष को अध्यक्ष बनवा दिया था, जो विभाजन का तात्कालिक कारण बना। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Share:

Related Questions

अकबर के दरबार के "नवरत्नों" में से कौन सा रत्न अपनी हाजिरजवाबी और बुद्धिमानी के लिए प्रसिद्ध था? अकबर की धार्मिक नीति का मूल मंत्र "सुलह-ए-कुल" था, इसका क्या अर्थ है? गुप्तकालीन अर्थव्यवस्था, भूमि अनुदान व्यवस्था (Land Grants) और कर प्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गुप्त काल में राजाओं द्वारा ब्राह्मणों, बौद्ध विहारों और मंदिरों को दिए जाने वाले भूमि अनुदानों की प्रथा (अग्रहार व्यवस्था) में भारी वृद्धि हुई, जिसके परिणामस्वरूप प्रशासनिक और न्यायिक अधिकारों का विकेंद्रीकरण शुरू हो गया तथा अनुदान प्राप्तकर्ताओं को कई मामलों में 'कर-मुक्ति' (Aghara) प्रदान की गई। 2. गुप्त शिलालेखों और अभिलेखों में विभिन्न प्रकार के करों का उल्लेख मिलता है, जिनमें 'विष्टि' (बेगार या जबरन श्रम) एक प्रमुख कर था, जिसे किसानों से नियमित नगद मुद्रा के रूप में वसूला जाता था और राज्य के राजस्व का मुख्य आधार यही था। 3. गुप्त सम्राटों ने कुषाणों की तुलना में अत्यधिक मात्रा में स्वर्ण मुद्राएँ (दीनार) जारी की थीं, जो आर्थिक समृद्धि का प्रतीक थीं, किंतु स्कंदगुप्त के शासनकाल के बाद के गुप्त सिक्कों में सोने की शुद्धता में भारी कमी और मिलावट देखने को मिलती है, जो विदेशी व्यापार के ह्रास और मौद्रिक संकुचन का संकेत देती है। 4. गुप्त काल के दौरान भूमि की पैमाइश और वर्गीकरण के लिए 'क्षेत्र' (कृषि योग्य भूमि), 'वापस' (निवास योग्य भूमि), 'अपहत' (जंगली या बिना जोती गई भूमि) और 'अप्राहत' जैसी शब्दावलियों का प्रयोग किया जाता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? प्रसिद्ध संस्कृत ग्रंथ "मधुरा विजयम" (Madura Vijayam) की रचयिता गंगादेवी किसकी पत्नी थीं? सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान ब्रिटिश सरकार द्वारा बुलाई गई गोलमेज सम्मेलनों और 'गांधी-इरविन समझौते' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1930 में आयोजित प्रथम गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस ने भाग नहीं लिया था, किंतु तेजबहादुर सप्रू, एम. आर. जयकर और मोहम्मद अली जिन्ना जैसे उदारवादी व मुस्लिम लीग के नेताओं ने लंदन में इसमें सक्रिय रूप से भाग लिया था। 2. मार्च 1931 में संपन्न गांधी-इरविन समझौते के तहत वायसराय लॉर्ड इरविन ने उन सभी राजनीतिक बंदियों को तुरंत रिहा करने पर सहमति व्यक्त की थी, जिन पर हिंसा के गंभीर आरोप (जैसे हत्या या शारीरिक हिंसा) सिद्ध हो चुके थे। 3. कराची अधिवेशन (1931) में कांग्रेस ने गांधी-इरविन समझौते का समर्थन करते हुए आधिकारिक रूप से इसे स्वीकार किया और इसी अधिवेशन में पहली बार 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक नीति' संबंधी ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.