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History of India
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सत्रहवीं और अठारहवीं शताब्दी के दौरान यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और पुर्तगाली/ब्रिटिश सत्ता की स्थापना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. भारत में पुर्तगाली शक्ति के वास्तविक संस्थापक अल्बुकर्क ने 1510 ई. में बीजापुर के आदिल शाह से गोवा छीनकर उसे अपनी राजधानी बनाया तथा भारतीय महिलाओं के साथ विवाह को प्रोत्साहित कर पुर्तगाली बस्तियों को स्थायी बनाने की नीति अपनाई।
  2. 2. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत में व्यापार करने का पहला औपचारिक चार्टर 1600 ई. में महारानी एलिजाबेथ प्रथम से प्राप्त हुआ था, जबकि जहांगीर के दरबार में व्यापारिक छूट प्राप्त करने के लिए आने वाला पहला अंग्रेजी दूत विलियम हॉकिंस था जो 'हेक्टर' नामक जहाज से सूरत पहुँचा था।
  3. 3. फ्रांसीसी कंपनी (French East India Company) की स्थापना लुई चौदहवें के शासनकाल में मंत्री कोलबर्ट के प्रयासों से 1664 ई. में हुई थी, और फ्रांसीसियों ने भारत में अपनी पहली फैक्ट्री फ्रैंक कैरो के नेतृत्व में 1668 ई. में मसूलीपट्टनम में स्थापित की थी।
  4. 4. बंगाल में ब्रिटिश सत्ता की सुदृढ़ स्थापना से पूर्व अंग्रेजों को 1698 ई. में सूबेदार अजीम-उस-शान से सुताती, कलकत्ता और गोविंदपुर नामक तीन गाँवों की जमींदारी मिल गई थी, जहाँ बाद में जॉब चारनाक ने 'फोर्ट विलियम' की नींव रखी थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूरी तरह से सही हैं। अल्बुकर्क ने गोवा पर अधिकार कर पुर्तगाली साम्राज्य की नींव मजबूत की थी। विलियम हॉकिंस 1608 में 'हेक्टर' जहाज से सूरत आया था। फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1664 में हुई और पहली फैक्ट्री 1668 में मसूलीपट्टनम में लगी। साथ ही, 1698 में अंग्रेजों को तीन गाँवों की जमींदारी मिली थी जिससे कलकत्ता शहर का विकास हुआ। विस्तृत ऐतिहासिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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भारतीय स्वतंत्रता और माउंटबेटन योजना (1947) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली द्वारा 20 फरवरी 1947 को हाउस ऑफ कॉमन्स में की गई ऐतिहासिक घोषणा के अनुसार, अंग्रेजों द्वारा भारत को सत्ता हस्तांतरित करने की अंतिम तिथि 30 जून 1948 निर्धारित की गई थी। 2. लॉर्ड माउंटबेटन द्वारा 3 जून 1947 को प्रस्तुत की गई विभाजन योजना के तहत पंजाब और बंगाल की प्रांतीय विधानसभाओं की बैठकों में हिंदू और मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के सदस्यों को अलग-अलग बैठकर प्रांत के विभाजन पर निर्णय लेने का प्रावधान किया गया था। 3. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 (Indian Independence Act 1947) को ब्रिटिश संसद द्वारा जुलाई 1947 में पारित किया गया, जिसके प्रावधानों के अनुसार 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र डोमिनियन अस्तित्व में आए, तथा लॉर्ड माउंटबेटन को दोनों नए राष्ट्रों का संयुक्त गवर्नर-जनरल नियुक्त किया गया था। 4. पंजाब और बंगाल में सीमाओं के निर्धारण के लिए सर सिरिल रेडक्लिफ की अध्यक्षता में गठित 'सीमा आयोग' (Boundary Commissions) ने अपनी रिपोर्ट स्वतंत्रता प्राप्ति से ठीक पूर्व 14 अगस्त 1947 को सौंप दी थी, जिसे उसी दिन सार्वजनिक कर दिया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? साहू महाराज और ताराबाई के बीच 1707 ई. में कौन सा युद्ध हुआ था? मुगल साम्राज्य के प्रशासन, आर्थिक व्यवस्था और सैन्य सुधारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अकबर के शासनकाल में राजा टोडरमल द्वारा लागू की गई 'दहसाला' (या जरबती) राजस्व प्रणाली के अंतर्गत पिछले दस वर्षों के उत्पादन और प्रचलित मूल्यों के औसत के आधार पर मालगुजारी निश्चित की जाती थी, जिसमें ज़मीन को पोलज, परती, चाचर और बंजर श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया था। 2. जहाँगीर के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था में 'दुअस्पा-सिंहअस्पा' (दो-घोड़ा और तीन-घोड़ा) की नई पद-मर्यादा जोड़ी गई, जिसके माध्यम से बिना जात मनसब बढ़ाए सैनिकों की संख्या (सवार मनसब) को दोगुना किया जा सकता था। 3. शाहजहां के काल में प्रांतीय प्रशासन के अंतर्गत सूबों की संख्या बढ़कर 20 हो गई थी, और इसी समय मुगल स्थापत्य कला में संगमरमर के प्रयोग के साथ-साथ 'पिएत्रा ड्यूरा' (Pietra Dura) यानी संगमरमर पर रंगीन पत्थरों को जड़ने की कला का चरमोत्कर्ष देखा गया। 4. औरंगजेब की आर्थिक नीतियों के तहत 'राहती' और 'पाएबागी' जैसी अतिरिक्त उपकर (Abwab) व्यवस्थाओं को प्रोत्साहित किया गया, तथा उसने अपने शासनकाल के शुरुआत में ही हिन्दू मंदिरों के निर्माण पर प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ राज्य की आय बढ़ाने के लिए मराठों के विरुद्ध 'चौरथ' और 'सरदेशमुखी' करों को अनिवार्य कर दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? गुप्तकालीन राजनीतिक व्यवस्था, प्रशासनिक संरचना और आर्थिक जीवन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गुप्त काल में 'कुमारमात्य' साम्राज्य के सर्वोच्च और सबसे महत्वपूर्ण अधिकारी होते थे, जिनका चयन मुख्य रूप से मंत्रिपरिषदों के माध्यम से वंशीय आधार पर न होकर केवल उच्च प्रशासनिक योग्यता के आधार पर सम्राट द्वारा किया जाता था। 2. इस काल में भूमि राजस्व की दर उपज का सामान्यतः 1/6 से 1/4 भाग हुआ करती थी, तथा कृषि भूमि के वर्गीकरण के अंतर्गत 'क्षेत्र' (जुतने योग्य भूमि), 'वास्तु' (वास योग्य भूमि), और 'अपहता' (जंगली या बिना जोती गई भूमि) शब्दों का उल्लेख मिलता है। 3. गुप्त सम्राटों द्वारा जारी किए गए सोने के सिक्के (जिन्हें 'दिनार' कहा जाता था) कुषाणों के स्वर्ण सिक्कों की तुलना में अधिक शुद्धता और कलात्मक सुंदरता से परिपूर्ण थे, जो इस काल के सुदृढ़ और समृद्ध वाणिज्यिक नेटवर्क को दर्शाते हैं। 4. गुप्त प्रशासन में 'संदिविग्रहिक' युद्ध और शांति मामलों का सर्वोच्च अधिकारी होता था, जो आवश्यकता पड़ने पर विदेश नीति का संचालन और युद्ध की घोषणा या संधि के मामलों में भी महत्वपूर्ण परामर्शदाता की भूमिका निभाता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और तदुपरांत प्रारंभ हुए स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल विभाजन के निर्णय की औपचारिक घोषणा 20 जुलाई 1905 को लॉर्ड कर्जन द्वारा की गई थी, और इसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में आयोजित ऐतिहासिक बैठक में 'स्वदेशी आंदोलन' का औपचारिक प्रस्ताव पारित किया गया था। 2. विभाजन की प्रभावी तिथि (16 अक्टूबर 1905) को पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, जहाँ लोगों ने उपवास रखा, एक-दूसरे के हाथों में राखियाँ बांधीं और रबींद्रनाथ ठाकुर के प्रसिद्ध गीत 'आमार सोनार बांग्ला' को इस आंदोलन का मुख्य प्रेरणास्त्रोत बनाया गया। 3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक बहिष्कार और स्वदेशी के प्रचार के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय चेतना जगाने के उद्देश्य से 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (National Council of Education) की स्थापना की गई थी, जिसके प्रथम अध्यक्ष महान वैज्ञानिक आर्चाय प्रफुल्ल चंद्र राय थे। 4. इस आंदोलन के दौरान उग्रवादी नेताओं (लाल-बाल-पाल) ने इसे बंगाल की सीमाओं से बाहर पूरे देश में फैलाने का प्रयास किया, जिसके तहत बाल गंगाधर तिलक ने बॉम्बे और पूना में, लाला लाजपत राय ने पंजाब में और सैयद حیدر رضا ने दिल्ली में स्वदेशी आंदोलन का नेतृत्व किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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