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History of India
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वैदिक साहित्य और संस्कृति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ऋग्वैदिक काल में पर्णकुटी और रथ निर्माण के अतिरिक्त तांबे और कांस्य जैसी धातुओं के व्यापक उपयोग के साक्ष्य मिलते हैं, जिन्हें ऋग्वेद में 'अयस' (Ayas) कहा गया है।
- 2. उत्तर वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था अत्यधिक कठोर हो गई थी और समाज में गोत्र (Gotra) व्यवस्था की स्थापना हुई, जिसका मूल अर्थ वह स्थान था जहाँ संपूर्ण कुल का गोधन (मवेशी) एक साथ पाला जाता था।
- 3. शतपथ ब्राह्मण में कृषि की विभिन्न प्रक्रियाओं (जुताई, बुआई, कटाई और मड़ाई) का विस्तृत विवरण मिलता है, जिसमें लौह तकनीक के प्रारंभिक उपयोग का भी संकेत है।
- 4. वैदिक काल में प्रयुक्त 'निष्म' (Nishka) मूल रूप से गले में पहना जाने वाला एक प्रकार का स्वर्ण आभूषण था, जिसका उपयोग बाद के उत्तर वैदिक काल में विनिमय के साधन (मुद्रा) के रूप में भी होने लगा था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वैदिक सभ्यता भारतीय इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण कालखंड है। ऋग्वैदिक काल में धातु के रूप में 'अयस' (तांबा या कांसा) का ज्ञान था। उत्तर वैदिक काल में लोहे की खोज से कृषि और अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन आए। 'गोत्र' शब्द का शाब्दिक अर्थ वह स्थान है जहाँ गोधन (मवेशी) को एक साथ रखा जाता था, जो बाद में वंश या कुल की पहचान बन गया। शतपथ ब्राह्मण में कृषि कर्मकांडों और उसकी चारों अवस्थाओं का स्पष्ट उल्लेख मिलता है। 'निष्म' आरंभ में स्वर्ण आभूषण था, जो विनिमय का कार्य भी करता था। विस्तृत अध्ययन के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और असहयोग आंदोलन (1920-22) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर लागू की जाने वाली 'तीनकथा प्रणाली' के विरुद्ध महात्मा गांधी ने जब जांच शुरू की, तब सरकार ने दबाव में आकर 'चंपारण कृषि अधिनियम' (Champaran Agrarian Act) पारित किया, जिसके तहत तीनकथा प्रणाली को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया और किसानों से अवैध रूप से वसूले गए धन का 25 प्रतिशत हिस्सा वापस लौटाने का प्रावधान किया गया।
2. वर्ष 1920 के कलकत्ता के विशेष अधिवेशन में असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव का विरोध चित्तरंजन दास (C.R. Das) ने किया था, किंतु उसी वर्ष दिसंबर में हुए नागपुर के वार्षिक अधिवेशन में उन्होंने ही असहयोग आंदोलन के मुख्य प्रस्ताव को प्रस्तुत किया, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया।
3. असहयोग आंदोलन के दौरान स्थापित 'काशी विद्यापीठ' और 'जामिया मिलिया इस्लामिया' जैसे राष्ट्रीय शिक्षण संस्थानों के पहले कुलपतियों के रूप में क्रमशः महात्मा गांधी और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ने कार्यभार संभाला था।
4. असहयोग आंदोलन के दौरान चौरी-चौरा की घटना (5 फरवरी 1922) के पश्चात महात्मा गांधी ने बारडोली में हुई कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में आंदोलन को पूरी तरह स्थगित करने का निर्णय लिया, जिससे प्रेरित होकर सीआर दास और मोतीलाल नेहरू ने कांग्रेस के भीतर ही 'स्वराज पार्टी' की स्थापना की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह का नेतृत्व करने वाले नेताओं तथा उनके दमन से संबंधित ब्रिटिश अधिकारियों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद — मौलवी अहमदullah शाह (नेतृत्व) एवं कर्नल नील (दमन)
2. बरेली — खान बहादुर खान (नेतृत्व) एवं सर 콜िन कैंपबेल (दमन)
3. इलाहाबाद — लियाकत अली (नेतृत्व) एवं जनरल नील (दमन)
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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वारंगल के किस शासक ने मलिक काफूर को अपनी सोने की मूर्ति गले में जंजीर डालकर भेंट की थी?
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सविनय अवज्ञा आंदोलन और गांधी-इरविन समझौते (1931) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गांधी-इरविन समझौते के तहत सरकार ने उन सभी राजनीतिक कैदियों को तुरंत रिहा करने पर सहमति व्यक्त की थी जिन पर हिंसा का प्रत्यक्ष आरोप था, तथा कराची अधिवेशन में कांग्रेस ने इस समझौते का पूर्ण समर्थन करते हुए सविनय अवज्ञा आंदोलन को स्थगित करने की आधिकारिक घोषणा की थी।
2. इस समझौते के प्रावधानों के अंतर्गत कांग्रेस ने प्रथम गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने से इनकार कर दिया था, किंतु द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में महात्मा गांधी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था।
3. समझौते के दौरान गांधी जी ने पुलिस की ज्यादतियों और दमनकारी नीतियों की निष्पक्ष न्यायिक जांच की अपनी मांग पर अत्यधिक जोर दिया था, जिसे वायसराय लॉर्ड इरविन ने बिना किसी शर्त के पूरी तरह स्वीकार कर लिया था।
4. सविनय अवज्ञा आंदोलन के दूसरे चरण के दौरान (दांडी मार्च के पश्चात) भारत के तटीय क्षेत्रों में लोगों को अपने उपभोग के लिए नमक बनाने और एकत्र करने का कानूनी अधिकार मिल गया था, जिसे इरविन ने समझौते में मान्यता दी थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 'सोलह महाजनपदों' और मगध साम्राज्य के उत्कर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंगुट्ठ निकाय और भगवती सूत्र जैसे बौद्ध एवं जैन ग्रंथ प्राचीन भारत के सोलह महाजनपदों की सूची प्रदान करते हैं, जिनमें मगध, वत्स, अवंती और कोसल प्रमुख शक्तिशाली राजतंत्र थे, जबकि वज्जी और मल्ला संघ प्रणाली (गसंघ) पर आधारित थे।
2. मगध साम्राज्य की प्रारंभिक राजधानी राजगृह (गिरिव्रज) थी, जो पाँच पहाड़ियों से घिरी होने के कारण प्राकृतिक रूप से अत्यंत सुरक्षित थी, और बाद में रणनीतिक व व्यावसायिक दृष्टिकोण से अधिक महत्वपूर्ण होने के कारण पाटलिपुत्र को इसकी राजधानी बनाया गया।
3. बिम्बिसार (श्रेणिक) ने अपने साम्राज्य के विस्तार के लिए आक्रामक सैन्य विजयों के साथ-साथ वैवाहिक संधियों की नीति अपनाई, जिसके तहत उसने कौशल, मद्र और लिच्छवि राजवंशों की राजकुमारियों से विवाह कर अपनी स्थिति मजबूत की थी।
4. मगध के उत्कर्ष में उसके प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों का भी विशेष योगदान था, जिसमें इस क्षेत्र में भारी मात्रा में उपलब्ध तांबे के खदानों ने मगध की सेना को उन्नत अस्त्र-शस्त्र से लैस करने में निर्णायक भूमिका निभाई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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