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History of India
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मध्यकालीन भारत के सूफी आंदोलनों के संदर्भ में, 'चिश्ती सिलसिले' और 'सुहरावर्दी सिलसिले' की कार्यप्रणालियों और उनके दार्शनिक दृष्टिकोणों के बीच निम्नलिखित में से कौन-सा प्रमुख अंतर सही है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मध्यकालीन भारत में सूफी मत के विकास के दौरान विभिन्न सिलसिलों (संप्रदायों) की कार्यपद्धति में स्पष्ट भिन्नता देखने को मिलती है। भारत में चिश्ती सिलसिले की नींव ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने रखी थी, जिसके संत जनता के बीच रहकर सादा जीवन जीते थे और शाही दरबार, राजकीय पदों तथा बड़े अनुदानों को स्वीकार करने से सख्त परहेज करते थे। इसके विपरीत, बहाउद्दीन जकारिया द्वारा स्थापित 'सुहरावर्दी सिलसिले' के संतों ने राज्य के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखे, राजकीय सहायता स्वीकार की और आर्थिक रूप से संपन्न जीवनशैली अपनाई। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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1857 के महान विद्रोह के दौरान झांसी की रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के सैन्य अभियानों तथा उनके संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1858 में सर ह्यूरोज के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना द्वारा झांसी के किले को घेर लिए जाने के बाद, रानी लक्ष्मीबाई ने अत्यंत साहस के साथ वीरतापूर्वक रक्षा की और कालपी की ओर प्रस्थान किया, जहाँ वे तात्या टोपे की सेना के साथ मिल गईं।
2. कालपी के पतन के बाद रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने ग्वालियर की ओर कूच किया तथा वहाँ के सिंधिया शासक (जयाजीराव सिंधिया) को पराजित कर ग्वालियर के किले पर अधिकार कर लिया, जहाँ नाना साहब के नाम से रानी को पेशवा घोषित किया गया।
3. ग्वालियर के पतन की खबर मिलते ही ब्रिटिश जनरल ह्यूरोज ने तत्काल ग्वालियर की ओर प्रहार किया, और 18 जून 1858 को कोटा की सराय के पास लड़ते हुए रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं।
4. रानी की मृत्यु के पश्चात तात्या टोपे नेपाल की तराई में चले गए, जहाँ ब्रिटिश सेना द्वारा उन्हें कभी पकड़ा नहीं जा सका और उन्होंने जीवनभर अज्ञातवास में ही स्वतंत्रता संग्राम की अलख जगाए रखी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह के दमन तथा उससे संबंधित प्रमुख क्रांतिकारियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद में मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने विद्रोह का नेतृत्व किया था, जिन्हें ब्रिटिश सेना द्वारा पकड़ने के लिए पचास हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था, तथा अंततः पवयां के राजा के यहाँ विश्वासघात के कारण वे मारे गए।
2. बरेली में खान बहादुर खान ने 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किया था, और विद्रोह के दमन के पश्चात ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने इस क्षेत्र पर पुनः अधिकार प्राप्त किया, जिसके उपरांत खान बहादुर खान नेपाल भाग गए थे जहाँ उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई।
3. इलाहाबाद (प्रयागराज) में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी लियाकत अली ने किया था, जिन्हें ब्रिटिश अधिकारी कर्नल जेम्स नील (Colonel James Neill) ने अत्यंत क्रूरता के साथ इस विद्रोह को कुचलते हुए पराजित किया था।
4. बरेली में विद्रोह के दमन के बाद खान बहादुर खान को गिरफ्तार कर लिया गया था और उन पर मुकदमा चलाकर 1860 में बरेली की जिला जेल के सामने सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटका दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मराठों के गौरव को बनाए रखने के लिए अंग्रेजों ने किस छोटे से राज्य की स्थापना कर शिवाजी के वंशज "प्रताप सिंह" को राजा बनाया?
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पानीपत के युद्ध में मराठा तोपखाने का नेतृत्व किसने किया था?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और इसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस विद्रोह का नेतृत्व करने वाले पारंपरिक भारतीय शासक (जैसे नाना साहब, बेगम हजरत महल और कुंवर सिंह) और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर अपने-अपने सीमित भौगोलिक क्षेत्रों और वैयक्तिक हितों से ऊपर उठकर एक सुसंगत अखिल भारतीय राजनीतिक दृष्टि का निर्माण करने में पूर्णतः असमर्थ रहे।
2. विद्रोहियों के पास न तो आधुनिक संचार साधनों और सैन्य प्रौद्योगिकी का अभाव था, बल्कि उनके पास एक केंद्रीय उच्च कमान (Central High Command) और एकीकृत सैन्य रणनीति का भी पूर्ण अभाव था, जिससे विभिन्न छावनियों के सैनिक बिना किसी सामंजस्य के स्वतंत्र रूप से लड़ते रहे।
3. देश के अधिकांश बड़े जमींदार, साहूकार और आधुनिक शिक्षित मध्यम वर्ग ने इस विद्रोह का पुरजोर समर्थन किया क्योंकि वे ब्रिटिश शासन के आर्थिक शोषण से त्रस्त थे और एक नई राष्ट्रीय व्यवस्था चाहते थे।
4. सिख रेजिमटों, गोरखा सैनिकों और सिंधिया तथा हैदराबाद जैसी कई देशी रियासतों के शासकों ने ब्रिटिश सेना का सक्रिय रूप से साथ दिया, जिसके कारण अंग्रेजों को इस व्यापक बगावत को कुचलने में भारी सैन्य बल और राजनीतिक संबल प्राप्त हुआ।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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