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History of India
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छठी शताब्दी ईसा पूर्व में 'सोलह महाजनपदों' के उदय और मगध साम्राज्य के अन्य महाजनपदों पर वर्चस्व स्थापित करने के सामरिक तथा भौगोलिक कारणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मगध की प्रारंभिक राजधानी 'राजगृह' (गिरिव्रज) पाँच पहाड़ियों से घिरी होने के कारण प्राकृतिक रूप से एक अत्यंत सुरक्षित और अभेद्य दुर्ग के रूप में थी, जिस पर बाहरी शत्रुओं द्वारा आक्रमण करना बेहद कठिन था।
  2. 2. मगध साम्राज्य के उत्कर्ष में उसकी भौगोलिक स्थिति का बहुत बड़ा योगदान था, क्योंकि इसके निकट क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में लौह अयस्क की उपलब्धता थी, जिससे उन्नत किस्म के अस्त्र-शस्त्र और कृषि उपकरण बनाना संभव हुआ।
  3. 3. बिम्बिसार और अजातशत्रु जैसे शक्तिशाली शासकों ने गंगा, सोन और पुनपुन नदियों के जलमार्ग पर नियंत्रण स्थापित कर आंतरिक व्यापार और सैन्य आवागमन को सुगम बनाया, जिससे उसकी आर्थिक और सामरिक स्थिति अत्यधिक मजबूत हुई।
  4. 4. मगध के शासकों ने अपनी सेना में सबसे पहले हाथियों के सामरिक महत्व को समझा और बड़े पैमाने पर जंगलों से जंगली हाथियों को पकड़कर अपनी सेना की गजसेना को अजेय बना लिया, जो उस समय के अन्य महाजनपदों के पास नहीं था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

छठी शताब्दी ईसा पूर्व में उत्तर भारत में राजनीतिक परिवर्तन के फलस्वरूप 'सोलह महाजनपदों' का उदय हुआ, जिनमें मगध सबसे शक्तिशाली साम्राज्य के रूप में उभरा। मगध के उत्कर्ष के पीछे इसके सामरिक, भौगोलिक और आर्थिक कारण प्रमुख थे। इसकी पहली राजधानी राजगृह पाँच पहाड़ियों से घिरी होने के कारण सुरक्षित थी। यहाँ के जंगलों में प्रचुर मात्रा में लौह अयस्क और हाथियों की उपलब्धता थी, और नदियों के जलमार्ग ने व्यापार व सैन्य संचालन को आसान बनाया। अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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भारतीय स्वतंत्रता और देश के विभाजन की पृष्ठभूमि में प्रस्तुत 'माउंटबेटन योजना' (3 जून योजना) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस योजना के अंतर्गत पंजाब और बंगाल की प्रांतीय विधानसभाओं की बैठकों में हिंदू और मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के सदस्यों को अलग से बैठक कर यह निर्णय लेने का प्रावधान था कि क्या प्रांत का विभाजन किया जाना चाहिए। 2. इस योजना में उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भविष्य का निर्धारण करने के लिए जनमत संग्रह (Referendum) कराए जाने का स्पष्ट प्रावधान किया गया था। 3. भारत और पाकिस्तान के बीच संपत्ति, आस्तियों, दायित्वों और सशस्त्र बलों के विभाजन तथा सीमा निर्धारण के कार्यों की देखरेख के लिए सर रेडक्लिफ की अध्यक्षता में गठित 'सीमा आयोग' (Boundary Commission) को 15 अगस्त 1947 से पूर्व ही अपनी रिपोर्ट प्रकाशित करने का निर्देश दिया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? मौर्योत्तर काल और गुप्त साम्राज्य के आर्थिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मौर्योत्तर काल में रोमन साम्राज्य के साथ होने वाले व्यापार में भारी वृद्धि हुई, जिसके परिणामस्वरूप भारत में बड़ी मात्रा में सोने के सिक्के (विशेष रूप से कुषाण शासकों द्वारा चलाए गए शुद्ध स्वर्ण सिक्के) और रोमन दीनार बड़ी संख्या में आए। 2. गुप्त काल में भूमि अनुदान की व्यवस्था ('अग्रहार' और देवदान) में अभूतपूर्व विस्तार हुआ, जिससे ब्राह्मणों और बौद्ध विहारों को कर-मुक्त भूमि के साथ-साथ प्रशासनिक व न्यायिक अधिकार भी हस्तांतरित होने लगे, जिससे सामंती व्यवस्था के बीज पड़े। 3. गुप्तकालीन अर्थव्यवस्था में श्रेणियों (Guilds) का अत्यधिक महत्व था, जिन्हें 'श्रेणी' या 'निगम' कहा जाता था, और ये अपने आंतरिक नियमों का संचालन करने के साथ-साथ बैंकों के रूप में भी कार्य करती थीं जो जमा स्वीकार कर ब्याज देती थीं। 4. कालिदास द्वारा रचित प्रसिद्ध नाटक 'मालविकाग्निमित्रम्' में पुष्यमित्र शुंग के अश्वमेध यज्ञ और उनके शासनकाल की राजनीतिक घटनाओं का विस्तृत विवरण मिलता है, जबकि शूद्रक की 'मच्छकटिकम्' गुप्तकालीन अभिजात वर्ग के जीवन पर आधारित है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के विद्रोह के आर्थिक कारणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रिटिश भू-राजस्व नीतियों (जैसे स्थायी बंदोबस्त, रैयतवाड़ी और महालवाड़ी व्यवस्था) के अत्यधिक कर निर्धारण के कारण पारंपरिक कृषक वर्ग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह तबाह हो गई, जिससे किसानों में अंग्रेजों के प्रति तीव्र आक्रोश उत्पन्न हुआ। 2. ब्रिटिश औद्योगिक क्रांति के परिणामस्वरूप भारत में ब्रिटेन से सस्ते मशीनी कपड़ों और वस्तुओं का बड़े पैमाने पर आयात किया गया, जिससे भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और कुटीर उद्योग नष्ट हो गए और कारीगरों की आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई। 3. डलहौजी की 'व्यपगत सिद्धांत' (डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स) और रियासतों के विलय की नीति के कारण हजारों की संख्या में सैनिक, दरबारी, कलाकार और शिल्पकार अपनी आजीविका खो बैठे, क्योंकि इन देशी रियासतों के पतन से उनके संरक्षक समाप्त हो गए थे। 4. ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए यहाँ के पारंपरिक व्यापारिक मार्गों पर से सभी प्रकार के आंतरिक और बाह्य चुंगी करों को पूरी तरह समाप्त कर दिया था, जिससे भारतीय व्यापारियों को भारी मुनाफा हुआ और उन्होंने विद्रोह का वित्तीय समर्थन किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में विद्रोह को दबाने वाले ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. दिल्ली - जॉन निकलसन 2. लखनऊ - सर कॉलिन कैंपबेल 3. झांसी और ग्वालियर - मेजर जनरल हैवलॉक 4. बनारस और इलाहाबाद - कर्नल जेम्स नीलि उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं? सविनय अवज्ञा आंदोलन, प्रथम गोलमेज सम्मेलन (1930-31) और गांधी-इरविन समझौते (1931) के घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नवम्बर 1930 में लंदन में आयोजित प्रथम गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस ने भाग नहीं लिया था, क्योंकि महात्मा गांधी समेत कांग्रेस के शीर्ष नेता सविनय अवज्ञा आंदोलन के कारण जेल में बंद थे और वायसराय लॉर्ड इरविन ने कांग्रेस की पूर्व शर्तों को मानने से इंकार कर दिया था। 2. मार्च 1931 में हुए 'गांधी-इरविन समझौते' के तहत ब्रिटिश सरकार ने हिंसात्मक गतिविधियों में लिفت राजनीतिक बंदियों को तुरंत रिहा करने और भारतीय को बिना किसी कर के निजी तथा घरेलू उपयोग हेतु समुद्र तट पर नमक बनाने का कानूनी अधिकार देने पर सहमति व्यक्त की थी। 3. गांधी-इरविन समझौते के तुरंत बाद आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कराची अधिवेशन (1931) में इस समझौते का सर्वसम्मति से बिना किसी विरोध के अनुमोदन किया गया था, और इसी अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू द्वारा 'मौलिक अधिकार एवं आर्थिक नीति' का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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