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History of India
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मध्यकालीन भारत के इतिहास में 'भक्ति और सूफी आंदोलन' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. दक्षिण भारत में भक्ति आंदोलन के प्रचार-प्रसार में आलवार (वैष्णव) और नयनार (शैव) संतों की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने तमिल भाषा में अपने भजनों (जैसे आलवारों के 'प्रबंधम्') के माध्यम से भक्ति का प्रसार किया और रूढ़िवादी जाति व्यवस्था तथा यज्ञीय कर्मकांडों का कड़ा विरोध किया।
- 2. उत्तर भारत में रामभक्ति धारा के प्रमुख संत रामानंद ने जातिगत भेदभाव को दरकिनार करते हुए शूद्रों और महिलाओं को भी अपने शिष्यमंडल में शामिल किया, तथा उनके बारह प्रमुख शिष्यों में कबीर, रैदास, धन्ना और सेना जैसे विभिन्न जातियों के संत शामिल थे।
- 3. सूफी संतों के 'सिलसिला' (संप्रदाय) के संदर्भ में, सुहरवर्दी सिलसिला भारत में सबसे अधिक लोकप्रिय हुआ, जिसकी स्थापना ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने अजमेर में की थी, और इस सिलसिले के संतों ने राजकीय दरबार से पूरी तरह दूर रहकर केवल भिक्षावृत्ति पर जीवन बिताने की नीति अपनाई थी।
- 4. सूफी संत शेख अहमद सरहिंदी (मुजद्दिद-उल-अल्फ-सानी), जो नक्शबंदी सिलसिला से संबंधित थे, ने अकबर की धार्मिक उदारवादी नीतियों ('दीन-ए-इलाही' और सुलह-कुल) का पुरजोर समर्थन किया और शरियत के नियमों को शिथिल करने की वकालत की।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि दक्षिण भारत में भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाने का मुख्य श्रेय आलवार (वैष्णव) और नयनार (शैव) संतों को जाता है, जिन्होंने तमिल भाषा के माध्यम से अपनी बात जन-जन तक पहुँचाई। कथन 2 सही है क्योंकि रामानंद ने उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन का प्रसार किया और जातिगत ऊँच-नीच को दरकिनार कर सभी वर्णों और महिलाओं को अपने शिष्य बनाए। उनके प्रसिद्ध 12 शिष्यों में कबीर, रैदास, सेन, धन्ना आदि शामिल थे। कथन 3 गलत है क्योंकि भारत में चिश्ती सिलसिला सबसे अधिक लोकप्रिय हुआ था, जिसकी स्थापना ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने अजमेर में की थी (सुहरवर्दी सिलसिला मुख्य रूप से सिंध और मुल्तान में सक्रिय था)। कथन 4 गलत है क्योंकि शेख अहमद सरहिंदी ने अकबर की धार्मिक उदारवादी नीतियों और 'सुलह-कुल' के सिद्धांत का कड़ा विरोध किया था तथा इस्लाम के रूढ़िवादी स्वरूप (शरियत) को पुनः स्थापित करने का प्रयास किया था। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों—स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी—के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा 1793 में लागू 'स्थाई बंदोबस्त' के तहत जमींदारों को भूमि का स्थायी स्वामी बना दिया गया, जहाँ राजस्व की दरें इतनी अधिक थीं कि 'सूर्यास्त कानून' (Sunset Law) के कठोर प्रावधानों के कारण शुरुआती वर्षों में ही कई पारंपरिक जमींदारों की संपत्तियां नीलाम हो गईं।
2. थॉमस मुनरो द्वारा मद्रास प्रेसीडेंसी में बड़े पैमाने पर लागू 'रयतवारी व्यवस्था' में बिचौलियों का पूर्ण रूप से उन्मूलन कर दिया गया और किसानों (रयतों) को भूमि का पूर्ण और सुरक्षित स्वामित्व दे दिया गया, जिससे किसानों पर महाजनों का आर्थिक शिकंजा पूरी तरह समाप्त हो गया।
3. हॉल्ट मैकेंज़ी और रॉबर्ट मार्टिन बर्ड द्वारा उत्तर-पश्चिम प्रांत और पंजाब के क्षेत्रों में विकसित 'महालवारी व्यवस्था' के अंतर्गत व्यक्तिगत किसानों को अलग से उत्तरदायी न मानकर पूरे ग्राम समुदाय या 'महाल' को संयुक्त रूप से भू-राजस्व भुगतान के लिए उत्तरदायी ठहराया गया।
4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों के संयुक्त परिणाम के रूप में भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था का तेजी से वाणिज्यीकरण (Commercialization of Agriculture) हुआ, जिसके फलस्वरूप खाद्यान्न फसलों के स्थान पर नकदी फसलों (जैसे नील, कपास, अफीम) के उत्पादन को बल मिला।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मराठा प्रशासन में "पेशवा" का पद किससे संबंधित था?
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मुगलकालीन वास्तुकला और चित्रकला के विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हुमायूं के मकबरे का निर्माण उसकी विधवा बेगम हाजी बेगम (बेगा बेगम) की देखरेख में फारसी वास्तुकार मिर्जा घियास द्वारा करवाया गया था, जिसमें पहली बार बड़े पैमाने पर सफेद संगमरमर के दोहरे गुंबद (Double Dome) का भारतीय वास्तुकला में सफलतापूर्वक प्रयोग किया गया था।
2. जहांगीर के शासनकाल में मुगल चित्रकला अपने स्वर्ण युग में पहुँची, जहाँ उसने छविचित्र (Portraiture) और प्राकृतिक दृश्यों (Flora and Fauna) के चित्रण को विशेष प्रोत्साहन दिया, तथा उस्ताद मंसूर को पक्षियों और फूलों के यथार्थवादी चित्रण के लिए 'नादिर-उल-असर' की उपाधि प्रदान की थी।
3. शाहजहां के काल में वास्तुकला में संगमरमर का प्रयोग और 'पित्रा दुरा' (Pietra Dura) यानी संगमरमर पर बहुमूल्य रत्नों की जड़ाई कला अपने चरम पर पहुँची, किंतु औरंगजेब ने संगीत, चित्रकला और दरबार में झरोखा दर्शन जैसी प्रथाओं को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया, जिससे शाही दरबार के कलाकारों ने प्रांतीय रियासतों और राजपूत राजाओं के यहाँ शरण ली।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय स्वतंत्रता और देश के विभाजन के संदर्भ में माउंटबेटन योजना (3 जून 1947 की योजना) के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस योजना के अंतर्गत पंजाब और बंगाल की प्रांतीय विधानसभाओं की बैठक बुलाई गई, जिसमें इन दोनों प्रांतों के हिंदू और मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के सदस्यों ने अलग-अलग बैठक कर प्रांत के विभाजन के पक्ष या विपक्ष में मतदान किया।
2. उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में से किसी एक के चयन के लिए जनमत संग्रह (Referendum) कराया गया था, जिसमें NWFP के लोगों ने भारी बहुमत से भारत में शामिल होने का निर्णय लिया।
3. रियासतों (Princely States) को यह स्पष्ट स्वतंत्रता दी गई कि वे अपनी भौगोलिक स्थिति और जनसांख्यिकीय इच्छा के अनुसार या तो भारत डोमिनियन या पाकिस्तान डोमिनियन में शामिल हो सकते हैं अथवा अपनी स्वतंत्र संप्रभुता बनाए रख सकते हैं।
4. भारत और पाकिस्तान के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के निर्धारण और सीमा-विवादों को सुलझाने के लिए सर रेडक्लिफ की अध्यक्षता में दो अलग-अलग 'सीमा आयोगों' (Boundary Commissions) का गठन किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मौर्योत्तर काल एवं गुप्त साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मौर्योत्तर काल में सातवाहन शासकों ने ब्राह्मणों और बौद्ध भिक्षुओं को कर-मुक्त भूमि अनुदान (अग्रहार व्यवस्था) देने की परंपरा को बड़े पैमाने पर आरंभ किया, तथा सातवाहन राजाओं के सिक्के मुख्यतः सीसे, प्रोटीन, तांबे और कांसे के बने होते थे।
2. गुप्त काल में भूमि के स्वामित्व और उसके प्रशासन का विवरण देने वाले अभिलेखों में 'निवर्तना' और 'द्रोणवाप' जैसे माप के पैमानों का उल्लेख मिलता है, जो भूमि की पैमाइश और उसकी उत्पादकता से संबंधित थे।
3. गुप्त राजवंश के दौरान हूणों के आक्रमणों का सामना करने वाले और उन्हें पराजित करने वाले प्रमुख शासक कुमारगुप्त प्रथम और स्कंदगुप्त थे, जिनके सिक्कों और अभिलेखों (जैसे भीतरी स्तंभ लेख) में हूण आक्रमणों का स्पष्ट विवरण मिलता है।
4. गुप्त साम्राज्य की प्रशासनिक इकाइयों का सही अवरोही क्रम 'भुक्ति' (प्रांत), 'विषय' (जिला), 'वीथी' (तहसील/उप-जिला) और 'ग्राम' (सबसे छोटी इकाई) था, जिसके प्रशासनिक प्रमुखों को क्रमशः उपरिक, विषयपति और ग्रामिक कहा जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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