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मानव नेत्र के किस भाग पर प्रतिबिंब बनता है?

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रेटिना (दृष्टिपटल) पर प्रतिबिंब बनता है।
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दुधवा? आवृतबीजी (Angiosperms) पौधों में प्रकाश संश्लेषण के कैल्विन चक्र (C3 चक्र) और C4 पौधों की आंतरिक शारीरिकी (Kranz anatomy) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. C3 पौधों में प्रकाश संश्लेषण के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड का प्रथम स्थायी उत्पाद 3-कार्बन यौगिक (3-Phosphoglyceric acid) होता है, और इसमें RuBisCO एंजाइम कार्बोक्सिलेशन के साथ-साथ ऑक्सीजनेशन (Photorespiration) की क्रिया भी उत्प्रेरित करता है। 2. C4 पौधों में 'क्रान्ज शारीरिकी' (Kranz anatomy) पाई जाती है, जहाँ पर्णमध्योतक (Mesophyll) कोशिकाओं में PEP carboxylase एंजाइम द्वारा $CO_2$ का स्थिरीकरण होता है, जिससे मैलिक एसिड या ऑक्जेलोएसेटिक एसिड बनता है जो बाद में पूch-आच्छद (Bundle sheath) कोशिकाओं में स्थानांतरित हो जाता है। 3. प्रकाश श्वसन (Photorespiration) एक ऊर्जा-व्यर्थ करने वाली प्रक्रिया है जो C3 पौधों में उच्च प्रकाश तीव्रता, कम $CO_2$ और उच्च $O_2$ सांद्रता के कारण होती है, जबकि C4 पौधों में इस प्रक्रिया का अभाव होता है क्योंकि उनमें RuBisCO उच्च $CO_2$ सांद्रता वाले क्षेत्र में रहता है। 4. पादप हार्मोन 'साइटोकाइनिन' (Cytokinin) और 'एब्सिसिक एसिड' (ABA) दोनों प्रकाश संश्लेषण को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं, जहाँ साइटोकाइनिन क्लोरोफिल के क्षس को रोकता है और हरित लवक के विकास को प्रेरित करता है, जबकि एब्सिसिक एसिड पर्णरंध्रों को खोलकर $CO_2$ के प्रवेश को अधिकतम करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं? मानव शरीर में उत्पन्न होने वाले विभिन्न संक्रामक रोगों, उनके रोगकारकों (Pathogens) और उनके नैदानिक परीक्षणों (Diagnostic Tests) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. स्वाइन फ्लू (H1N1 इनफ्लूएंजा) एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जिसके संपुष्टि परीक्षण के लिए 'रियल-टाइम रिवर्स ट्रांसक्रिपटेस पॉलीमरेज चेन रिएक्शन' (rRT-PCR) विधि का उपयोग किया जाता है। 2. उपदंश (Syphilis) एक यौन संचारित बैक्टीरियल संक्रमण है जो 'ट्रेपोनेमा पैलिडम' नामक स्पिरोकीट जीवाणु के कारण होता है, और इसके निदान के लिए 'वीडीआरएल' (VDRL) परीक्षण किया जाता है। 3. डिप्थीरिया मुख्य रूप से 'कोरिबैक्टीरियम डिप्थिरिया' जीवाणु के संक्रमण से होता है, जिसमें बनने वाला एक्सोटॉक्सिन श्वास नली में एक स्रावी झिल्ली (Pseudomembrane) बनाता है, और इसकी संवेदनशीलता की जांच 'शिस परीक्षण' (Schick test) द्वारा की जाती है। 4. कुष्ठ रोग (Leprosy), जिसे हैनसेन रोग भी कहा जाता है, एक विषाणु जनित संक्रामक बीमारी है जो तंत्रिका तंत्र और त्वचा को प्रभावित करती है, और इसके परीक्षण के लिए 'लीप्रोमिन परीक्षण' (Lepromin test) का उपयोग किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? सर्चलाइट का परावर्तक? रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण (Acids, Bases and Salts) के वैचारिक और मात्रात्मक पहलुओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लुईस अम्ल (Lewis Acids) वे रासायनिक स्पीशीज हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म (Electron pair) को ग्रहण कर सकती हैं, और सभी धनावेशित आयन तथा केंद्रीय परमाणु के संयोजी कोष में अष्टक अपूर्ण रखने वाले यौगिक (जैसे $BF_3$) लुईस अम्ल की श्रेणी में आते हैं। 2. जब एक दुर्बल अम्ल ($CH_3COOH$) को उसके प्रबल क्षार ($NaOH$) के साथ उदासीनीकरण कराया जाता है, तो बनने वाले लवण का जल-अपघटन (Hydrolysis) होने के कारण तुल्यांकी बिंदु पर विलयन का pH मान 7 से कम (अम्लीय) होता है। 3. ब्रॉन्स्टेड-लाउरी अवधारणा के अनुसार, किसी प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार (Conjugate base) अत्यंत दुर्बल होता है, जबकि जल की उभयधर्मी (Amphoteric) प्रकृति के कारण यह एक ही समय में ब्रॉन्स्टेड अम्ल और ब्रॉन्स्टेड क्षार दोनों के रूप में कार्य कर सकता है। 4. बफर विलयन (Buffer solution) वे विलयन होते हैं जो अपने अंदर थोड़ी मात्रा में अम्ल या क्षार मिलाने पर अपने pH मान में परिवर्तन का विरोध करते हैं, और अम्लीय बफर विलयन का एक उत्कृष्ट उदाहरण दुर्बल अम्ल और उसके प्रबल क्षार से बने लवण का जलीय मिश्रण है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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