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History of India
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सत्रहवीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित मराठा साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, सैन्य संगठन और राजस्व प्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. शिवाजी की केंद्रीय मंत्रिपरिषद, जिसे 'अष्टप्रधान' कहा जाता था, में मंत्रियों के पद वंशानुगत होते थे और प्रत्येक मंत्री राजा के अधीन न होकर अपने सैन्य विभाग का स्वतंत्र प्रमुख होता था।
- 2. राजस्व प्रशासन के अंतर्गत शिवाजी ने मलिक अंबर की भू-राजस्व व्यवस्था के आधार पर ज़मीन की पैमाइश कराई और उपज का प्रारंभिक 33% हिस्सा राज्य को कर के रूप में निर्धारित किया, जिसे बाद में बढ़ाकर 40% कर दिया गया था।
- 3. मराठा साम्राज्य के दायरे से बाहर के मुगल क्षेत्रों से सुरक्षा प्रदान करने के बदले वसूला जाने वाला 'चौथ' कर कुल राजस्व का 25% होता था, जबकि 'देशमुखी' कर उन क्षेत्रों से वसूला जाता था जहाँ मराठों का पारंपरिक वंशागत राजस्व अधिकार स्वीकार किया गया था।
- 4. शिवाजी की सेना में घुड़सवार सेना का भाग अत्यधिक महत्वपूर्ण था, जिसमें नियमित और स्थायी घुड़सवार सैनिकों को 'बरगीर' कहा जाता था, जबकि वे सैनिक जो अपने स्वयं के घोड़े और शस्त्र लेकर युद्ध में भाग लेते थे, उन्हें 'सिलहदार' कहा जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि शिवाजी की 'अष्टप्रधान' मंत्रिपरिषद में मंत्रियों के पद वंशानुगत नहीं होते थे और न ही उनके पास कोई स्वतंत्र सैन्य अधिकार था; वे विशुद्ध रूप से राजा के सचिव (सहायक) के रूप में कार्य करते थे और प्रत्येक मंत्री के विभाग के कार्यों की देखरेख स्वयं राजा करता था। कथन 2, 3 और 4 सत्य हैं। शिवाजी ने मलिक अंबर की पद्धति पर भूमि की पैमाइश कराकर उपज का 33% (जो बाद में 40% कर दिया गया) राजस्व निर्धारित किया। 'चौथ' कर बाहरी क्षेत्रों से सुरक्षा की एवज में 25% वसूला जाता था, जबकि 'देशमुखी' (या सरदेशमुखी) 10% अतिरिक्त कर था। सैन्य संगठन में 'बरगीर' राज्य द्वारा सुसज्जित सैनिक होते थे और 'सिलहदार' अपने संसाधनों से युद्ध में शामिल होते थे। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों—विशेषकर पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा—में हुई गतिविधियों तथा उनके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व पीर अली खान नामक एक पुस्तक विक्रेता ने किया था, जिसे कमिश्नर विलियम टेलर के आदेश पर गिरफ्तार कर सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी।
2. दानापुर छावनी के 7वीं, 8वीं और 40वीं रेजिमेंट के सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर आरा के बाबू कुंवर सिंह से जा मिले, जिनके नेतृत्व में इस विद्रोह ने एक व्यापक रूप धारण किया।
3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) क्षेत्रों में विद्रोह का प्रसार करने में स्थानीय जमींदारों के साथ-साथ दानापुर से आए विद्रोही सैनिकों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, तथा छपरा में मोहम्मद हुसैन खान के नेतृत्व में अंग्रेजों के विरुद्ध प्रशासनिक मशीनरी को चुनौती दी गई थी।
4. दानापुर के सैनिकों के विद्रोह के तुरंत बाद ब्रिटिश कमिश्नर विलियम टेलर ने पटना में संभावित खतरे को भांपते हुए दो प्रमुख वहाबी नेताओं—मौलाना अहमदुल्लाह और शाह मुहम्मद हुसैन—को नजरबंद कर लिया था, जिससे शहर में अंग्रेजों के विरुद्ध तीव्र प्रतिक्रिया हुई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों (स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लॉर्ड कार्नवालिस द्वारा 1793 में बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लागू किए गए 'स्थाई बंदोबस्त' (Permanent Settlement) के तहत जमींदारों को भूमि का वास्तविक स्वामी मान लिया गया, जिससे पारंपरिक कृषकों की स्थिति केवल किरायेदारों (Tenants) तक सीमित हो गई और 'सूर्योस्त कानून' (Sunset Law) के कारण अनेक जमींदारों की अपनी पुश्तैनी ज़मीनें भी नीलाम हो गईं।
2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी में विकसित 'रयतवारी व्यवस्था' में सरकार और किसान (रयत) के बीच सीधा भू-राजस्व समझौता हुआ, जिसमें बीच के बिचौलियों या जमींदारों को समाप्त कर दिया गया, किंतु अत्यधिक ऊँची लगान दरों और अकाल के समय भी कर में कोई छूट न मिलने के कारण किसान साहूकारों के चंगुल में फंसते चले गए।
3. हॉल्ट मैकेंज़ी द्वारा परिकल्पित और विलियम बेंटिंक के शासनकाल में उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के क्षेत्रों में लागू 'महालवारी व्यवस्था' के अंतर्गत भू-राजस्व का निर्धारण व्यक्तिगत किसान या पूरे गाँव (महाल) के स्तर पर सामूहिक रूप से किया गया, जिसमें गाँव के मुखिया या लंबरदार को राजस्व संग्रह की व्यक्तिगत और सामूहिक जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
4. इन तीनों प्रमुख भू-राजस्व प्रणालियों का दीर्घकालिक प्रभाव यह हुआ कि भारतीय कृषि का बड़े पैमाने पर व्यावसायीकरण (Commercialization of Agriculture) हुआ, जिससे खाद्यान्न उत्पादन में भारी वृद्धि हुई और भारतीय किसानों को वैश्विक बाजार का सीधा आर्थिक लाभ मिलने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत सुदृढ़ हो गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 'सोलह महाजनपदों और मगध साम्राज्य के उदय' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में सोलह महाजनपदों की सूची मिलती है, जिनमें 'अश्मक' एकमात्र ऐसा महाजनपद था जो दक्षिण भारत में गोदावरी नदी के तट पर स्थित था।
2. मगध साम्राज्य की प्रारंभिक राजधानी राजगृह (गिरिव्रज) थी, जो पाँच पहाड़ियों से घिरी होने के कारण सामरिक दृष्टि से अत्यंत सुरक्षित थी, और बाद में कालाशोक ने अपनी राजधानी पाटलिपुत्र स्थानांतरित की थी।
3. हरक वंश के शासक बिम्बिसार (श्रेणिक) ने वैवाहिक संबंधों और विजय की नीति के माध्यम से मगध की शक्ति को सुदृढ़ किया, जबकि उसके पुत्र अजातशत्रु (कुणिक) ने वज्जी संघ को पराजित करने के लिए अपने मंत्री वसकार की कूटनीति का सहारा लिया था।
4. मगध के उत्थान का एक प्रमुख भौगोलिक और आर्थिक कारण यह था कि यहाँ के क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में लौह अयस्क की खदानें उपलब्ध थीं, जिससे मगध के शासकों ने सबसे पहले उन्नत किस्म के अस्त्र-शस्त्र और कृषि उपकरण बनाए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल साम्राज्य के प्रशासनिक, सैन्य और आर्थिक विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अकबर के शासनकाल में स्थापित 'दहसाला' (या जरबती) प्रबंध व्यवस्था राजा टोडरमल के वित्तीय सुधारों पर आधारित थी, जिसके अंतर्गत पिछले दस वर्षों के दौरान विभिन्न फसलों के औसत उत्पादन और उनके प्रचलित बाजार मूल्यों का आकलन कर मालगुजारी का निर्धारण किया जाता था।
2. जहाँगीर के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था के अंतर्गत 'सिंहस्पा' (दो-अस्पा और सिंह-अस्पा) प्रणाली की शुरुआत की गई, जिसके तहत बिना मनसबदारों का जात पद बढ़ाए उनके सवार पदों में वृद्धि की जाती थी ताकि सेना की युद्धक क्षमता को मजबूत किया जा सके।
3. शाहजहां के शासनकाल में जागीरदारी संकट अपने चरम पर पहुँच गया था, क्योंकि दक्षिण भारत के अभियानों के कारण मनसबदारों और जागीरों की संख्या में भारी असंतुलन पैदा हो गया था तथा उपलब्ध उपजाऊ जागीरें कम पड़ने लगी थीं।
4. औरंगजेब के शासनकाल में जारी किए गए फरमानों के अनुसार, साम्राज्य के भीतर सभी धार्मिक समुदायों पर से जज़िया कर हमेशा के लिए समाप्त कर दिया गया था और हिंदू मंदिरों के निर्माण पर पूर्ण छूट प्रदान की गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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ब्रिटिश शासनकाल के दौरान भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व व्यवस्थाओं—स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी—के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लॉर्ड कार्नवालिस द्वारा वर्ष 1793 में लागू किए गए 'स्थाई बंदोबस्त' (Permanent Settlement) के तहत भू-राजस्व की दर को हमेशा के लिए निश्चित कर दिया गया, जिसमें भूमि का स्वामित्व कृषकों के स्थान पर जमींदारों को सौंप दिया गया था।
2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम भारत में मुख्य रूप से लागू की गई 'रयतवारी व्यवस्था' में सरकार और कृषक (रयत) के बीच सीधा अनुबंध होता था, जिसमें राजस्व का निर्धारण भूमि की उर्वरता के आधार पर होता था और राजस्व की दरें कभी भी संशोधित नहीं की जाती थीं।
3. उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में लागू की गई 'मahalwari व्यवस्था' के अंतर्गत भू-राजस्व के निर्धारण और भुगतान की जिम्मेदारी व्यक्तिगत कृषक के बजाय संपूर्ण ग्राम समुदाय (महाल या गाँव) को सामूहिक रूप से सौंपी गई थी।
4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों का दीर्घकालिक परिणाम यह हुआ कि पारंपरिक भारतीय कृषि का वाणिज्यीकरण तेजी से हुआ, जिससे खाद्यान्न उत्पादन में भारी वृद्धि हुई और भारतीय किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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