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आणविक भार?

Detailed Explanation

कुल भार।
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ऊष्मागतिकी के नियमों (Laws of Thermodynamics) और तापमापी प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऊष्मागतिकी का शून्यवाँ नियम (Zeroth Law of Thermodynamics) ताप की संकल्पना को परिभाषित करता है और यह बताता है कि यदि दो निकाय किसी तीसरे निकाय के साथ अलग-अलग तापीय साम्य में हैं, तो वे आपस में भी तापीय साम्य में होंगे। 2. कार्नो इंजन (Carnot Engine) एक आदर्श ऊष्मा इंजन है जिसकी दक्षता केवल स्रोत और सिंक के तापमान पर निर्भर करती है, और यह कार्य पदार्थ की प्रकृति पर बिल्कुल निर्भर नहीं करती है। 3. रुद्धोष्म प्रक्रम (Adiabatic process) के दौरान निकाय और परिवेश के बीच ऊष्मा का कोई आदान-प्रदान नहीं होता ($dQ = 0$), और इस प्रक्रिया में गैस का संपीडन करने पर उसका तापमान बढ़ जाता है। 4. जल का त्रिक बिंदु (Triple point of water), जिस पर बर्फ, द्रव जल और जलवाष्प सह-अस्तित्व में होते हैं, का मान केल्विन पैमाने पर 273.16 K होता है, और तापमापी के विभिन्न पैमानों के बीच रूपांतरण तथा ऊष्मीय प्रसार के बारे में विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? प्लांक नियतांक (Planck Constant) का मान SI इकाई में क्या है? समांग और विषमांग उत्प्रेरण (Homogeneous and Heterogeneous Catalysis) तथा विलयन के अणुसंख्यक गुणों (Colligative properties) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. समांग उत्प्रेरण में अभिकारक और उत्प्रेरक दोनों समान भौतिक अवस्था (सामान्यतः द्रव या गैस) में होते हैं, जबकि विषमांग उत्प्रेरण में ठोस उत्प्रेरकों की सतह पर अभिकारकों का अधिशोषी सक्रियण (Adsorptive activation) होता है, जो रासायनिक अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा (Activation energy) को कम कर देता है। 2. वाष्पशील विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलयन के वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन (Relative lowering of vapour pressure) विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, और यह 'राउल्ट का नियम' केवल आदर्श विलयनों द्वारा ही सभी सांद्रता सीमाओं पर सटीकता से पालन किया जाता है। 3. कोलॉइडी विलयनों (Colloidal solutions) में प्रक्षिप्त प्रावस्था (Dispersed phase) के कणों द्वारा आपतित प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण उत्पन्न होने वाले 'टिंडल प्रभाव' (Tyndall effect) को देखने के लिए यह आवश्यक है कि प्रक्षिप्त कणों का व्यास आपतित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य की तुलना में बहुत अधिक हो। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? विलयन और उत्प्रेरण (Solutions and Catalysis) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राउल्ट के नियम के अनुसार, किसी अवाष्पशील विलेय युक्त तनु विलयन के लिए वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन विलयन में विलेय के मोल अंश (Mole fraction) के ठीक बराबर होता है, और यह गुण विलेय की रासायनिक प्रकृति पर निर्भर न करके केवल कणों की संख्या पर निर्भर करता है। 2. 'वांट हॉफ गुणांक' ($i$) का मान वैद्युत अपघट्यों के वियोजन (Dissociation) की स्थिति में हमेशा एक से कम होता है, जबकि संगुणन (Association) की स्थिति में इसका मान एक से अधिक होता है। 3. 'विषमांगी उत्प्रेरण' के 'अधिशोषण सिद्धांत' (Adsorption theory) के अनुसार, अभिकर्मक अणु उत्प्रेरक की सतह पर आकर अधिशोषित होते हैं, जिससे उनकी प्रभावी सांद्रता में वृद्धि होती है और अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा ($E_a$) का मान कम हो जाता है। 4. 'एन्जाइम उत्प्रेरण' की क्रियाविधि में 'माइकलिस-मेंटेन नियतांक' ($K_m$) का मान जितना कम होता है, एंजाइम और सब्सट्रेट के बीच की बंधुता (Affinity) उतनी ही अधिक होती है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? विलयन के अणुसंख्यक गुणों (Colligative properties) और उत्प्रेरण (Catalysis) के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर वाष्प दाब में आपेक्षिक अवनवन (Relative lowering of vapour pressure) विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, और यह राऊल्ट के नियम का पालन करने वाले आदर्श विलयनों के लिए विलेय की प्रकृति पर निर्भर नहीं करता है। 2. वांट हॉफ गुणांक ($i$) का मान उन विलयनों के लिए एक से अधिक होता है जो जलीय माध्यम में वियोजित (Dissociation) होते हैं, जबकि संघनन (Association) दर्शाने वाले विलेय के लिए इसका मान एक से कम होता है। 3. विषमांगी उत्प्रेरण (Heterogeneous catalysis) के 'अधिशोषण सिद्धांत' के अनुसार, अभिकारक अणु उत्प्रेरक की सतह पर आकर भौतिक या रासायनिक रूप से अधिशोषित होते हैं, जिससे उनकी सतह पर सक्रिय ऊर्जा (Activation energy) का मान बढ़ जाता है और अभिक्रिया की दर मंद हो जाती है। 4. एंजाइम उत्प्रेरण 'ताला-कुंजी' (Lock and Key) प्रतिमान का पालन करता है, जिसमें उत्प्रेरक की विशिष्ट ज्यामितीय संरचना केवल विशिष्ट सबस्ट्रेट अणुओं को ही उनके सक्रिय स्थलों पर जुड़ने की अनुमति देती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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