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History of India
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने एकेश्वरवाद का समर्थन किया और वेदों की अचूकता या अपौरुषेयता (Infallibility) के सिद्धांत को कभी स्वीकार नहीं किया।
- 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और वेदों को समस्त ज्ञान का स्रोत मानते हुए उनकी अपौरुषेयता को प्रतिपादित किया, किंतु उन्होंने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और अवतारवाद का खंडन किया।
- 3. बंबई में आत्माराम पांडुरंग द्वारा स्थापित 'प्रार्थना समाज' ने वेदों की सर्वोच्चता को पूरी तरह अस्वीकार करते हुए सनातन धर्म की रूढ़ियों को मजबूत किया और विधवा पुनर्विवाह का कड़ा विरोध किया।
- 4. स्वामी विवेकानंद ने वर्ष 1897 में 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना की, जिसका उद्देश्य वेदांत के संदेशों का प्रचार करना और व्यावहारिक वेदांत के माध्यम से मानव सेवा करना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 4 सही हैं। राजा राममोहन राय के ब्रह्म समाज ने किसी भी एक ग्रंथ या वेद को अचूक (infallible) नहीं माना। स्वामी दयानंद सरस्वती ने वेदों को अपौरुषेय और ज्ञान का आधार माना, लेकिन मूर्तिपूजा और अवतारवाद का तीव्र खंडन किया। स्वामी विवेकानंद ने 1897 में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। कथन 3 गलत है क्योंकि प्रार्थना समाज ने विधवा पुनर्विवाह, अंतर्जातीय विवाह और महिला शिक्षा का समर्थन किया था, न कि रूढ़ियों का समर्थन। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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मराठा साम्राज्य के प्रशासन, राजस्व व्यवस्था और छत्रपति शिवाजी महाराज की सैन्य व प्रशासनिक नीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी ने प्रशासनिक सुधारों के अंतर्गत दक्कन के सुल्तानों और मलिक अंबर की भू-राजस्व प्रणाली को आधार बनाते हुए भूमि की पैमाइश करवाई और राज्य अधिकारियों को जागीर देने की प्रथा को हतोत्साहित करते हुए उन्हें नकद वेतन देने की नीति अपनाई।
2. 'चौथ' मराठा साम्राज्य के स्वराज्य क्षेत्र से वसूला जाने वाला मुख्य भू-राजस्व कर था, जबकि 'सरदेशमुखी' उस क्षेत्र से वसूला जाता था जहाँ मराठों का प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं था बल्कि वे उसकी सुरक्षा का आश्वासन देते थे।
3. शिवाजी की केंद्रीय मंत्रिपरिषद 'अष्टप्रधान' के अंतर्गत प्रत्येक मंत्री प्रशासनिक और सैन्य मामलों में सीधे राजा के प्रति उत्तरदायी होता था, किंतु ये पद वंशानुगत नहीं थे और इसमें मंत्रियों का प्रशासनिक कार्य मुख्य रूप से राजा को सलाह देना था।
4. शिवाजी की सेना में घुड़सवार सेना (पगा और बारगीर) और पैदल सेना (मावळे) के साथ-साथ एक सुदृढ़ नौसेना (Navy) का भी गठन किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य पश्चिमी तट पर सिडियों और यूरोपीय ताकतों के विरुद्ध समुद्री व्यापार की रक्षा करना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक स्वरूप, आर्थिक सुधारों और विभिन्न राजवंशों (विशेषकर खिलजी और तुगलक काल) की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अलाउद्दीन खिलजी द्वारा प्रशासनिक नियंत्रण और मूल्य नियंत्रण को सख्ती से लागू करने के लिए बाज़ार नियंत्रण प्रणाली की स्थापना की गई थी, जिसके तहत खाद्यान्न, वस्त्र और दासों के क्रय-विक्रय के लिए क्रमशः 'शाहरुख-ए-मंडी', 'बराय-ए-अदल' और घोड़ों की खरीद-फरोख्त हेतु विशेष बाजार बनाए गए थे, तथा इन बाजारों के निरीक्षण के लिए 'दीवान-ए-रियासत' और 'शहना-ए-मंडी' नामक अधिकारियों की नियुक्ति की जाती थी।
2. मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में कृषि विभाग के रूप में 'दीवान-ए-कोहकी' (या दीवान-ए-कोही) की स्थापना की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य कृषकों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता (तकावी ऋण या सौंधार) प्रदान करके बंजर भूमि को उपजाऊ बनाना था, किंतु यह योजना अपने कुप्रबंधन और अकाल के कारण पूरी तरह असफल सिद्ध हुई।
3. फिरोजशाह तुगलक ने सल्तनत काल में सबसे अधिक नहरों का जाल बिछाया तथा सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कृषकों पर 'हर्ब-ए-शर्ब' (सिंचाई कर) लगाया, जो कुल उपज का 1/10 भाग होता था, और साथ ही उसने फिरोजाबाद, हिसार और जौनपुर जैसे नए नगरों की स्थापना की।
4. दिल्ली सल्तनत के दौरान 'इक्ता प्रणाली' को प्रारंभ करने का श्रेय इल्तुतमिश को जाता है, जिसके अंतर्गत सैन्य अधिकारियों और सैनिकों को वेतन के बदले भूमि का राजस्व क्षेत्र (इक्ता) आवंटित किया जाता था, किंतु फिरोजशाह तुगलक ने इस प्रणाली को आनुवंशिक (Hereditary) बना दिया जिससे प्रशासनिक व्यवस्था में शिथिलता आ गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली में हुए घटनाक्रम और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेरठ के सिपाहियों द्वारा 11 मई 1857 को दिल्ली पहुँचकर मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को भारत का 'शहेशाह-ए-हिंदुस्तान' घोषित किए जाने के पश्चात, जफर ने आरंभ में इस विद्रोह का नेतृत्व करने में अत्यधिक उत्साह दिखाया और स्वयं अपनी सेना का प्रत्यक्ष सैन्य संचालन किया।
2. दिल्ली में विद्रोहियों का वास्तविक सैन्य नेतृत्व और प्रशासनिक नियंत्रण एक 'सैन्य न्यायालय' (Court of Administrators) के हाथों में था, जिसमें लगभग 10 सिपाही और 6 नागरिक सदस्य शामिल थे, जो सम्राट के नाम पर शासन चलाते थे।
3. दिल्ली पर पुन: अधिकार करने के उद्देश्य से अंग्रेजी सेनाओं का नेतृत्व करने वाले जनरल जॉन निकलसन की कश्मीरी गेट पर संघर्ष के दौरान मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद मेजर जनरल आर्किड विल्सन के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना ने दिल्ली पर पुनः नियंत्रण स्थापित किया और बहादुर शाह जफर को हुमायूं के मकबरे से गिरफ्तार कर लिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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फ्रांसीसी यात्री बर्नियर और टैवर्नियर किसके शासनकाल में भारत आए थे?
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किस विदेशी यात्री ने विजयनगर को "दुनिया का सबसे भव्य शहर" और हम्पी के बाजारों की प्रशंसा की है?
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