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History of India
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भक्ति आंदोलन के प्रमुख संतों (विशेषकर रामभक्ति और कृष्णभक्ति शाखा) तथा उनके दार्शनिक एवं सामाजिक योगदान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. रामानंद ने उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन के प्रसार में अग्रणी भूमिका निभाई और उन्होंने जाति-पाति के बंधनों को अस्वीकार करते हुए अपने शिष्यों में शूद्रों और महिलाओं (जैसे कबीर, रैदास और पद्मावती) को भी सम्मिलित किया था।
- 2. वल्लभाचार्य ने 'शुद्धद्वैतवाद' दर्शन का प्रतिपादन किया और पुष्टिमार्ग की स्थापना की, जिसके अंतर्गत भगवान कृष्ण की बाल-लीला और उनकी अगाध कृपा (पुष्टि) को मोक्ष का एकमात्र साधन माना गया है।
- 3. चैतन्य महाप्रभु ने बंगाल में 'अचिंत्य भेदाभेदवाद' का सिद्धांत दिया तथा संकीर्तन आंदोलन के माध्यम से जातिगत भेदभाव का कड़ा विरोध करते हुए सभी वर्गों के लोगों को प्रेम और भक्ति के मार्ग पर जोड़ा।
- 4. मीराबाई ने दादू पंथ के प्रभाव में आकर मेवाड़ को पूरी तरह त्याग दिया था और उन्होंने निर्गुण ब्रह्म की उपासना को ही अपनाते हुए कभी भी कृष्ण को सगुण रूप में नहीं पूजा था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
भक्ति आंदोलन के अंतर्गत रामानंद ने उत्तर भारत में भक्ति की अलख जगाई और अपनी उदारवादी विचारधारा के कारण समाज के सभी वर्गों को अपने साथ जोड़ा। वल्लभाचार्य ने शुद्धद्वैतवाद और पुष्टिमार्ग की स्थापना की, जबकि चैतन्य महाप्रभु ने बंगाल में अचिंत्य भेदाभेदवाद और संकीर्तन परंपरा को लोकप्रिय बनाया। इसके विपरीत, मीराबाई ने निर्गुण नहीं बल्कि भगवान कृष्ण की सगुण उपासना (गिरिधर गोपाल) की थी, अतः कथन 4 असत्य है। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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औरंगजेब के सेनापति मीर जुमला ने उत्तर-पूर्व के किस राज्य को जीतकर वहाँ संधि की थी?
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वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और उसके विरोध में उपजे स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन के निर्णय की आधिकारिक घोषणा 20 जुलाई 1905 को की गई थी, जिसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में आयोजित एक ऐतिहासिक बैठक में 'स्वदेशी आंदोलन' की औपचारिक शुरुआत की गई और 'बहिष्कार प्रस्ताव' पारित किया गया।
2. 16 अक्टूबर 1905 को जब बंगाल विभाजन प्रभावी हुआ, तो पूरे बंगाल में इसे 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, जहाँ लोगों ने उपवास रखा, गंगा स्नान किया और 'अमार सोनार बांग्ला' गीत गाते हुए सड़कों पर जुलूस निकाले।
3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक बहिष्कार और रचनात्मक कार्यों के साथ-साथ राष्ट्रीय शिक्षा के प्रसार पर विशेष बल दिया गया, जिसके तहत नवंबर 1905 में 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (National Council of Education) की स्थापना की गई।
4. कांग्रेस के बनारस अधिवेशन (1905) में गोपालकृष्ण गोखले ने स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को केवल बंगाल तक ही सीमित रखने पर जोर दिया, क्योंकि नरमपंथी नेता इसे संपूर्ण भारत में विस्तारित करने के पक्ष में नहीं थे और उनका मानना था कि यह ब्रिटिश सरकार के साथ सीधे टकराव का कारण बन सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल साम्राज्य के प्रशासन, आर्थिक व्यवस्था और सैन्य सुधारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अकबर के शासनकाल में राजा टोडरमल द्वारा लागू की गई 'दहसाला' (या जरबती) राजस्व प्रणाली के अंतर्गत पिछले दस वर्षों के उत्पादन और प्रचलित मूल्यों के औसत के आधार पर मालगुजारी निश्चित की जाती थी, जिसमें ज़मीन को पोलज, परती, चाचर और बंजर श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया था।
2. जहाँगीर के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था में 'दुअस्पा-सिंहअस्पा' (दो-घोड़ा और तीन-घोड़ा) की नई पद-मर्यादा जोड़ी गई, जिसके माध्यम से बिना जात मनसब बढ़ाए सैनिकों की संख्या (सवार मनसब) को दोगुना किया जा सकता था।
3. शाहजहां के काल में प्रांतीय प्रशासन के अंतर्गत सूबों की संख्या बढ़कर 20 हो गई थी, और इसी समय मुगल स्थापत्य कला में संगमरमर के प्रयोग के साथ-साथ 'पिएत्रा ड्यूरा' (Pietra Dura) यानी संगमरमर पर रंगीन पत्थरों को जड़ने की कला का चरमोत्कर्ष देखा गया।
4. औरंगजेब की आर्थिक नीतियों के तहत 'राहती' और 'पाएबागी' जैसी अतिरिक्त उपकर (Abwab) व्यवस्थाओं को प्रोत्साहित किया गया, तथा उसने अपने शासनकाल के शुरुआत में ही हिन्दू मंदिरों के निर्माण पर प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ राज्य की आय बढ़ाने के लिए मराठों के विरुद्ध 'चौरथ' और 'सरदेशमुखी' करों को अनिवार्य कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सविनय अवज्ञा आंदोलन के कालखंड, गोलमेज सम्मेलनों और गांधी-इरविन समझौते के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 5 मार्च 1931 को हस्ताक्षरित 'गांधी-इरविन समझौते' के तहत सरकार ने उन राजनीतिक कैदियों को तुरंत रिहा करने पर सहमति व्यक्त की थी जिन पर हिंसा का प्रत्यक्ष आरोप नहीं था, तथा समुद्र तट के निकट रहने वाले लोगों को नमक बनाने का अधिकार दिया गया था।
2. प्रथम गोलमेज सम्मेलन (नवंबर 1930 - जनवरी 1931) में कांग्रेस ने भाग नहीं लिया था, किंतु इस सम्मेलन में मुस्लिम लीग और अन्य समूहों की सहभागिता के कारण ब्रिटिश सरकार ने भारत को तुरंत 'डोमिनियन स्टेटस' प्रदान करने की घोषणा कर दी थी।
3. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (सितंबर-दिसंबर 1931) में महात्मा गांधी ने कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था, किंतु यह सम्मेलन मुख्य रूप से सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के विवाद के कारण बिना किसी ठोस निर्णय के समाप्त हो गया।
4. वर्ष 1932 में लंदन में आयोजित तृतीय गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस ने भाग लिया था और इसी सम्मेलन के दौरान दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल के मुद्दे पर गांधीजी और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के बीच 'पूना पैक्ट' पर हस्ताक्षर हुए थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विजयनगर और बहमनी राज्यों के बीच संघर्ष का मुख्य कारण किस क्षेत्र पर अधिकार करना था?
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