त्वरित लिंक्स
History of India
7 views
19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्थापित 'प्रार्थना समाज' और 'सत्यशोधक समाज' के वैचारिक दृष्टिकोण, उनके संस्थापकों तथा सामाजिक सुधार के एजेंडे के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बंबई में केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से स्थापित प्रार्थना समाज ने मुख्य रूप से अंतर-जातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह, स्त्री शिक्षा और दलित जातियों के उत्थान पर जोर दिया, तथा इसके प्रमुख नेताओं में महादेव गोविंद रामाडे (M.G. Ranade) और आर. जी. भंडाकर शामिल थे।
- 2. ज्योतिराव फुले द्वारा वर्ष 1873 में स्थापित 'सत्यशोधक समाज' का मुख्य उद्देश्य ब्राह्मणवादी वर्चस्व को चुनौती देना, शूद्रों और अति-शूद्रों (दलितों) को वैचारिक और सामाजिक रूप से जागरूक करना तथा धार्मिक पुरोहित वर्ग के बिना विवाह संस्कारों का संचालन करना था।
- 3. प्रार्थना समाज के विपरीत, ज्योतिराव फुले ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'गुलामगिरी' (Gulamgiri) में अमेरिकी दास प्रथा और भारत की शूद्र-अतिशूद्र जनता की सामाजिक स्थिति के बीच वैचारिक समानता स्थापित करते हुए ब्राह्मण वर्चस्ववादी व्यवस्था की कड़ी आलोचना की थी।
- 4. प्रार्थना समाज और सत्यशोधक समाज दोनों ने पारंपरिक रूढ़िवादी हिंदू धर्म के पुनरुत्थान और वेदों की अचूकता को स्वीकार करने का समर्थन किया था, तथा पश्चिमी आधुनिक शिक्षा के प्रभाव को समाज के लिए पूरी तरह हानिकारक माना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
इस प्रश्न के कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। प्रार्थना समाज की स्थापना बंबई में 1867 में हुई थी, जिसका उद्देश्य अंतर-जातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और दलित उत्थान जैसे सुधार करना था। एम. जी. रानाडे इसके प्रमुख स्तंभ थे। ज्योतिराव फुले ने 1873 में 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की, जिसका उद्देश्य शूद्रों और अति-शूद्रों को ब्राह्मणवादी वर्चस्व से मुक्त कराना और 'गुलामगिरी' जैसी कृतियों के माध्यम से उनकी दुर्दशा को उजागर करना था। इसके विपरीत, कथन 4 असत्य है क्योंकि इन दोनों ही सुधारवादी संगठनों ने वेदों की अचूकता या पारंपरिक रूढ़िवादी हिंदू धर्म के पुनरुत्थान का समर्थन नहीं किया था, बल्कि वे अंधविश्वास और सामाजिक असमानता के विरोधी थे। विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
गुप्तकालीन प्रशासन, अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त काल में 'विष्टि' (बेगार या निःशुल्क श्रम) को एक कर के रूप में मान्यता प्राप्त थी, जिसका उल्लेख विभिन्न अभिलेखों (जैसे जूनागढ़ और मंदसौर अभिलेख) में मिलता है, और यह प्रशासनिक कार्यों या सेना के आवागमन के समय आम जनता से अनिवार्य रूप से लिया जाता था।
2. इस काल में सुदूर देशों के साथ होने वाले व्यापार में भारी गिरावट आने के कारण सोने के सिक्कों (जिसे गुप्त अभिलेखों में 'दीनार' कहा गया है) का प्रचलन पूरी तरह समाप्त हो गया था, और अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ग्रामीण और स्थानीय विनिमय पर आधारित हो गई थी।
3. गुप्त साम्राज्य की प्रांतीय प्रशासनिक इकाइयों में 'भुक्ति' (प्रान्त) के ऊपर 'विषय' (ज़िला) और 'वीथी' (उप-ज़िला) का प्रशासनिक क्रम था, तथा भुक्ति के प्रमुख अधिकारियों को 'उपरिक' कहा जाता था जिनकी नियुक्ति सीधे सम्राट द्वारा होती थी।
4. कालिदास, आर्यभट्ट और वराहमिहिर जैसे महान विद्वान इसी काल की देन थे, तथा इस काल में अजंता की गुफाओं (विशेषकर गुफा संख्या 16, 17 और 19) की भित्ति चित्रकारी का विकास बड़े पैमाने पर हुआ, जिसे वाकाटक-गुप्त शैली का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, राजस्व सुधारों और सैन्य संगठनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शेरशाह सूरी द्वारा प्रारंभ की गई 'रैयतवारी' तर्ज पर आधारित भूमि सर्वेक्षण और माप की पद्धति को अकबर के शासनकाल में राजा टोडरमल ने 'दहसाला' (या आयन-ए-दहसाला) व्यवस्था के रूप में विकसित किया, जिसके अंतर्गत पिछले दस वर्षों के उत्पादन और औसत मूल्यों के आधार पर मालगुजारी का निर्धारण किया गया था।
2. जहाँगीर के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था में 'दुस्पासिह-अस्पासिह' (दो या तीन घोड़ों वाली सैनिक रैंक) प्रणाली की शुरुआत की गई, जिसके तहत मनसबदारों को अपने मूल सवार पद से अधिक घोड़े रखने की अनुमति दी जाती थी, जिसके लिए उन्हें अतिरिक्त भत्ता मिलता था।
3. शाहजहाँ के काल में वास्तुकला और चित्रकला ने अपने चरमोत्कर्ष को छुआ, किंतु इस दौरान मनसबदारी प्रणाली में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए 'चाँद-सितारा' और 'मशरूत' (सशर्त पद) जैसी नई व्यवस्थाएँ लागू की गईं, जिससे सम्राट के व्यक्तिगत खर्चों में भारी वृद्धि हुई।
4. औरंगजेब के शासनकाल में मनसबदारों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि होने के कारण 'जागीर संकट' (Jagir Crisis) उत्पन्न हो गया, क्योंकि उपलब्ध खाली जागीरें (पैबाकी) कम पड़ गईं और मनसबदारों को उनकी जागीर से समय पर राजस्व प्राप्त नहीं हो पा रहा था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
दक्षिण भारत के प्राचीन राजवंशों और उनकी सांस्कृतिक एवं स्थापत्य उपलब्धियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पल्लव वंश के शासक नरसिंहवमन् प्रथम (महामल्ल) ने महाबलीपुरम (मामलपुरम) में एक ही विशाल चट्टान को काटकर प्रसिद्ध 'रथ मंदिरों' (सप्त पगोडा) का निर्माण करवाया था, और उसके शासनकाल के दौरान ही चीनी बौद्ध यात्री ह्वेनसांग ने पल्लव राजधानी कांचीपुरम की यात्रा की थी।
2. बादामी के चालुक्य राजवंश के अधीन निर्मित 'विरुपाक्ष मंदिर' (पट्टदकल) का निर्माण विक्रमादित्य द्वितीय की रानी लोकमहादेवी द्वारा करवाया गया था, जो द्रविड़ शैली की वास्तुकला से अत्यधिक प्रभावित है और इसमें कांची के कैलाशनाथ मंदिर की शैली का स्पष्ट प्रभाव झलकता है।
3. राष्ट्रकूट वंश के शासक कृष्ण प्रथम ने एलोरा में प्रसिद्ध 'कैलाश मंदिर' (गुफा संख्या 16) का निर्माण करवाया था, जो द्रविड़ वास्तुकला का एक अद्भुत आश्चर्य है और इसे एक ही चट्टान को ऊपर से नीचे की ओर (Monolithic rock-cut architecture) तराशकर बनाया गया है।
4. चोल साम्राज्य की स्थानीय स्वशासन प्रणाली (ग्राम प्रशासन) का सबसे प्रामाणिक विवरण 'उत्तरामेरूर अभिलेख' से मिलता है, जो परांतक प्रथम के शासनकाल से संबंधित है और इसमें ग्राम सभा (सभा या महासभा) के सदस्यों के चयन के लिए 'कुरावै' (लॉटरी) पद्धति का विस्तृत नियम दिया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना और नरम दल-गरम दल काल के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कांग्रेस के प्रारंभिक वर्षों (1885-1905) में नरमपंथियों की कार्यपद्धति 'प्रार्थना, याचिका और विरोध' (Prayer, Petition and Protest) की नीति पर आधारित थी, और उन्होंने वर्ष 1892 के भारतीय परिषद अधिनियम (Indian Councils Act 1892) को अपनी पहली बड़ी वैधानिक सफलता माना था, हालांकि वे इसके सीमित दायरे से पूर्णतः संतुष्ट नहीं थे।
2. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस के विभाजन के पीछे मुख्य वैधानिक और वैचारिक मतभेद यह था कि गरम दल (लाल-बाल-पाल) स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को केवल बंगाल तक सीमित रखना चाहते थे, जबकि नरम दल इसे पूरे देश में लागू करने के पक्षधर थे।
3. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पहली बार 'स्वराज' (Self-Government) को अपने राजनीतिक लक्ष्य के रूप में स्वीकार किया, जिसे नरमपंथियों और चरमपंथियों के बीच एक अस्थायी समझौते के रूप में देखा गया था।
4. ब्रिटिश सरकार ने उग्रवादी राष्ट्रवादी आंदोलन को कुचलने के लिए वर्ष 1908 में 'विस्फोटक पदार्थ अधिनियम' (Explosive Substances Act) और 'समाचार पत्र (अपराधों के लिए प्रोत्साहन) अधिनियम' जैसे दमनकारी कानून पारित किए, जिसके तहत बाल गंगाधर तिलक को राजद्रोह के आरोप में छह वर्ष की कैद की सजा देकर मांडले (बर्मा) जेल भेज दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान बिहार में बाबू वीर कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह के नेतृत्व तथा सैन्य अभियानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आरा की प्रसिद्ध विजय के पश्चात वीर कुंवर सिंह ने अपनी सैन्य रणनीति का विस्तार करते हुए उत्तर प्रदेश के बलिया, आजमगढ़ और गोरखपुर क्षेत्रों तक अभियान चलाया और अंग्रेजों को कड़ी टक्कर दी।
2. वीर कुंवर सिंह की मृत्यु के पश्चात उनके छोटे भाई अमर सिंह ने कैमूर की पहाड़ियों (जंगल) से अंग्रेजों के विरुद्ध गुरिल्ला युद्ध (छापामार युद्ध) का सफल संचालन जारी रखा और एक समानांतर सरकार जैसी व्यवस्था स्थापित की।
3. अमर सिंह के नेतृत्व में चलाए गए इस प्रतिरोध को दबाने के लिए ब्रिटिश अधिकारी मेजर विंसेंट आयर और जनरल लुगार्ड को भारी संघर्ष करना पड़ा था, और अमर सिंह को पकड़कर सार्वजनिक रूप से फाँसी पर लटका दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.