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History of India
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सविनय अवज्ञा आंदोलन, गांधी-इरविन समझौते और गोलमेज सम्मेलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मार्च 1931 में हुए गांधी-इरविन समझौते के तहत सरकार ने सभी राजनीतिक बंदियों (हिंसा के आरोपियों को छोड़कर) को रिहा करने पर सहमति जताई, और कांग्रेस ने सविनय अवज्ञा आंदोलन को स्थगित कर दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लेना स्वीकार किया।
  2. 2. वर्ष 1931 में आयोजित लंदन के द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में महात्मा गांधी ने कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया, किंतु सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के विवाद के कारण यह सम्मेलन बिना किसी ठोस परिणाम के समाप्त हो गया।
  3. 3. प्रथम और तृतीय गोलमेज सम्मेलनों का बहिष्कार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा किया गया था, जबकि डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने तीनों ही गोलमेज सम्मेलनों में भाग लिया था।
  4. 4. कराची अधिवेशन (1931) में गांधी-इरविन समझौते को औपचारिक रूप से अस्वीकार कर दिया गया था और कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज के प्रस्ताव को वापस लेते हुए केवल डोमिनियन स्टेटस की मांग पर मुहर लगाई थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

उपर्युक्त कथनों में से कथन 1, 2 और 3 सही हैं, जबकि कथन 4 गलत है। मार्च 1931 में दिल्ली समझौते (जिसे गांधी-इरविन समझौता कहा जाता है) के बाद कांग्रेस ने सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित किया और गांधीजी ने द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया। कराची अधिवेशन (1931) में इस समझौते को समर्थन दिया गया था तथा 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम' का ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया गया था, न कि पूर्ण स्वराज की मांग को वापस लिया गया था।
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