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History of India
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में हुए संघर्ष और उनके दमन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व करने वाले मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया था, जिन्हें ब्रिटिश सेनापति कैंपबेल और थॉमस रीने द्वारा पराजित किया गया था।
- 2. बरेली में रोहेलखंड के भूतपूर्व नवाब के उत्तराधिकारी खान बहादुर खान ने विद्रोह की कमान संभाली थी, किंतु अंततः ब्रिटिश जनरल कॉलिन कैंपबेल ने इस विद्रोह का क्रूरता से दमन कर दिया।
- 3. इलाहाबाद (प्रयागराज) में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी लियाकत अली ने किया था, और इस महत्वपूर्ण रणनीतिक केंद्र पर पुनः अधिकार प्राप्त करने के लिए ब्रिटिश अधिकारी कर्नल नील ने अत्यधिक क्रूर दमनकारी नीतियां अपनाई थीं।
- 4. फैजाबाद के विद्रोही नेता मौलवी अहमदुल्लाह शाह को अंग्रेजों ने युद्ध के मैदान में ही मार गिराया था, जबकि खान बहादुर खान और लियाकत अली को ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा गिरफ्तार करके बाद में फांसी पर लटका दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद में मौलवी अहमदुल्लाह शाह, बरेली में खान बहादुर खान और इलाहाबाद में लियाकत अली ने ब्रिटिश सत्ता को कड़ी चुनौती दी थी। मौलवी अहमदुल्लाह शाह को 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता था। इन सभी केंद्रों पर ब्रिटिश सेनापतियों (जैसे कैंपबेल और कर्नल नील) द्वारा अत्यंत क्रूरता के साथ विद्रोह का दमन किया गया था। अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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मध्यकालीन भारत के इतिहास में भक्ति और सूफी आंदोलनों के प्रसार तथा उनके दार्शनिक दृष्टिकोण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सूफी मत के 'चिश्ती सिलसिले' के प्रसिद्ध संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के शिष्य और उत्तराधिकारी ख्वाजा बख्तियार काकी थे, जिनके सम्मान में दिल्ली में कुतुब मीनार का निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया था।
2. भक्ति आंदोलन के प्रणेता के रूप में प्रसिद्ध संत रामानंद ने जातिगत भेदभाव को नकारते हुए सभी जातियों के लोगों को अपने शिष्य बनाया, जिनमें कबीर (जुलाहा), रैदास (मोची), सेना (नाई) और पीपा (राजपूत शासक) प्रमुख थे।
3. दक्षिण भारत के अलवार (विष्णु भक्त) और नयनार (शिव भक्त) संतों ने अपनी कविताओं और भजनों में तमिल भाषा को माध्यम बनाया तथा 'नलइरा दिव्य प्रबंधम' को तमिल वेद के रूप में मान्यता दिलाई।
4. सूफी संतों की विचारधारा में 'वल्दत-उल-वुजूद' (अस्तित्व की एकता) का सिद्धांत इब्न-अरबी द्वारा प्रतिपादित किया गया था, जिसका अर्थ है कि सृष्टिकर्ता और उसकी रचना में कोई वास्तविक भेद नहीं है, जो अद्वैत वेदांत दर्शन के काफी निकट है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल काल में "परगना" का मुख्य कोषाध्यक्ष क्या कहलाता था?
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मुगल काल में "साहिबे तौजी" (Sahib-e-Tawji) का पद किससे संबंधित था?
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बंगाल विभाजन (1905) और इसके विरोध में चलाए गए 'स्वदेशी आंदोलन' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लॉर्ड कर्ज़न द्वारा 20 जुलाई 1905 को बंगाल विभाजन के निर्णय की घोषणा के पश्चात, 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में आयोजित ऐतिहासिक बैठक में 'स्वदेशी आंदोलन' की औपचारिक घोषणा की गई और प्रसिद्ध 'बहिष्कार प्रस्ताव' पारित किया गया।
2. बंगाल विभाजन औपचारिक रूप से 16 अक्टूबर 1905 को लागू किया गया, जिसे पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया और इस दिन लोगों ने एक-दूसरे के हाथों में राखियाँ बाँधकर भाईचारे और एकजुटता का संदेश दिया, जिसकी प्रेरणा रबींद्रनाथ ठाकुर के आह्वान पर मिली थी।
3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक बहिष्कार के साथ-साथ रचनात्मक कार्यों (Constructive Programme) पर भी बल दिया गया, जिसके तहत कलकत्ता में आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय द्वारा 'बंगाल केमिकल एंड फार्मास्युटिकल वर्क्स' जैसी स्वदेशी वस्त्रों और उद्योगों की स्थापना की गई।
4. स्वदेशी आंदोलन का प्रभाव केवल बंगाल तक सीमित रहा और मद्रास प्रेसीडेंसी में वी. ओ. चिदंबरम पिलई (VO Chidambaram Pillai) तथा आंध्र प्रदेश के डेल्टा क्षेत्रों (वंदे मातरम् आंदोलन) में इसका कोई संगठनात्मक प्रभाव देखने को नहीं मिला।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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