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History of India
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छठी शताब्दी ईसा पूर्व के महाजनपदों और मगध साम्राज्य के उत्कर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. अंग महाजनपद की राजधानी चंपा थी, जो व्यापार और वाणिज्य का एक प्रमुख केंद्र था, तथा हर्यक वंश के शासक बिम्बिसार ने अंग को जीतकर मगध साम्राज्य में मिला लिया था।
- 2. वत्स महाजनपद की राजधानी कौशाम्बी थी, और यहाँ के प्रसिद्ध शासक उदयन थे, जिनके प्रेम प्रसंग की कथाओं का विस्तृत वर्णन भास रचित नाटक 'स्वप्नवासदत्ता' में मिलता है।
- 3. अवंती महाजनपद उत्तर और दक्षिण दो भागों में बंटा हुआ था—उत्तरी अवंती की राजधानी उज्जैन और दक्षिणी अवंती की राजधानी माहिष्मती थी, तथा अवंती के राजा प्रद्योत के साथ बिम्बिसार के चिकित्सीय संबंध थे।
- 4. वज्जी संघ आठ कुलों का एक महासंघ था, जिसकी राजधानी वैशाली थी, और यह मगध की तरह एक राजतंत्रात्मक व्यवस्था के अंतर्गत संचालित होता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 सही हैं। अंग महाजनपद की राजधानी चंपा थी और बिम्बिसार ने इसे जीतकर मगध में मिलाया था। वत्स की राजधानी कौशाम्बी थी और उदयन इसके प्रसिद्ध शासक थे, जिनका उल्लेख भास के नाटक 'स्वप्नवासदत्ता' में है। अवंती दो भागों में विभाजित थी (उज्जैन और माहिष्मती) और प्रद्योत के यहाँ बिम्बिसार ने अपने राजवैद्य जीवक को भेजा था। कथन 4 गलत है क्योंकि वज्जी संघ राजतंत्र नहीं बल्कि एक गणतंत्रात्मक (Republic/Oligarchy) शासन प्रणाली वाला महासंघ था। भारतीय इतिहास के इस महत्वपूर्ण कालखंड के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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सविनय अवज्ञा आंदोलन, गांधी-इरविन समझौते और गोलमेज सम्मेलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गांधी-इरविन समझौते (5 मार्च 1931) के तहत वायसराय इरविन ने उन सभी राजनीतिक कैदियों को तुरंत रिहा करना स्वीकार कर लिया था जिन पर हिंसा के गंभीर आरोप थे या जो हत्या के मामलों में सजा काट रहे थे।
2. कराची में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1931 के अधिवेशन में गांधी-इरविन समझौते को समर्थन प्रदान किया गया था, और इसी अधिवेशन में महात्मा गांधी ने प्रसिद्ध यह कथन कहा था कि "गांधी मर सकता है, परंतु गांधीवाद हमेशा जीवित रहेगा।"
3. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931) में भाग लेने के लिए महात्मा गांधी 'एस.एस. राजपूताना' नामक जहाज से लंदन गए थे, जहाँ उन्होंने न केवल कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया, बल्कि 'कम्युनल अवार्ड' के मुद्दे पर डॉ. बी.आर. अंबेडकर के साथ हुए समझौते के तहत पृथक् निर्वाचन प्रणालियों को पूरी तरह से स्वीकार कर लिया था।
4. वर्ष 1932 में जब महात्मा गांधी यरवदा जेल में थे, तब ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडोनाल्ड द्वारा घोषित 'कम्युनल अवार्ड' के विरोध में उन्होंने आमरण अनशन शुरू किया, जिसके परिणामस्वरूप डॉ. अंबेडकर और गांधीजी के समर्थकों के बीच 'पूना पैक्ट' पर हस्ताक्षर हुए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिम कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ की रेजिडेंसी पर हुए हमलों का कुशल नेतृत्व किया और विद्रोह के दमन के पश्चात नेपाल की ओर प्रस्थान कर वहीं शरण ली।
2. 'फैजाबाद के मौलवी' के रूप में प्रसिद्ध अहमदुल्लाह शाह ने ब्रिटिश सेना के खिलाफ चिन्हाट के युद्ध में विद्रोहियों का सफल नेतृत्व किया, और अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ने के लिए पचास हजार रुपये का भारी इनाम घोषित किया था।
3. मौलवी अहमदुल्लाह शाह को अंततः ब्रिटिश सेना द्वारा जीवित पकड़ लिया गया और सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटका दिया गया, जबकि बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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गुप्तकालीन प्रशासन, अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त काल में 'विष्टि' (बेगार या निःशुल्क श्रम) को एक कर के रूप में मान्यता प्राप्त थी, जिसका उल्लेख विभिन्न अभिलेखों (जैसे जूनागढ़ और मंदसौर अभिलेख) में मिलता है, और यह प्रशासनिक कार्यों या सेना के आवागमन के समय आम जनता से अनिवार्य रूप से लिया जाता था।
2. इस काल में सुदूर देशों के साथ होने वाले व्यापार में भारी गिरावट आने के कारण सोने के सिक्कों (जिसे गुप्त अभिलेखों में 'दीनार' कहा गया है) का प्रचलन पूरी तरह समाप्त हो गया था, और अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ग्रामीण और स्थानीय विनिमय पर आधारित हो गई थी।
3. गुप्त साम्राज्य की प्रांतीय प्रशासनिक इकाइयों में 'भुक्ति' (प्रान्त) के ऊपर 'विषय' (ज़िला) और 'वीथी' (उप-ज़िला) का प्रशासनिक क्रम था, तथा भुक्ति के प्रमुख अधिकारियों को 'उपरिक' कहा जाता था जिनकी नियुक्ति सीधे सम्राट द्वारा होती थी।
4. कालिदास, आर्यभट्ट और वराहमिहिर जैसे महान विद्वान इसी काल की देन थे, तथा इस काल में अजंता की गुफाओं (विशेषकर गुफा संख्या 16, 17 और 19) की भित्ति चित्रकारी का विकास बड़े पैमाने पर हुआ, जिसे वाकाटक-गुप्त शैली का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका तथा उनके सैन्य एवं कूटनीतिक प्रयासों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कानपुर में 5 जून 1857 को विद्रोह का नेतृत्व संभालते हुए नाना साहब ने स्वयं को पेशवा घोषित किया और पेशवा बाजीराव द्वितीय के उत्तराधिकारी के रूप में मराठा गौरव को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया, तथा अजीमुल्ला खां उनके मुख्य सलाहकार और कूटनीतिक रणनीतिकार थे।
2. नाना साहब के सेनापति के रूप में तात्या टोपे ने कानपुर की रक्षा के लिए ब्रिटिश सेनापति जनरल सर ह्यू व्हीलर की सेना के खिलाफ कड़ा संघर्ष किया, किंतु ब्रिटिश सेना द्वारा नगर पर पुनः अधिकार किए जाने के बाद तात्या टोपे ने बिठूर से अपनी गतिविधियों का संचालन किया।
3. कानपुर में ब्रिटिश आत्मसमर्पण के उपरांत घटी 'बीबीघर नरसंहार' (Bibighar Massacre) की घटना के पश्चात ब्रिटिश कमांडर जनरल हैवलॉक और जेम्स आउट्राम की सेना ने कानपुर पर अधिकार कर लिया, जिसके बाद नाना साहब नेपाल की तराई की ओर प्रस्थान कर गए और उनका अंतिम जीवन रहस्यमय बना रहा।
4. अजीमुल्ला खां ने विद्रोह के वैचारिक और अंतरराष्ट्रीय समर्थन को जुटाने के लिए लंदन में ब्रिटिश संसद और तत्कालीन राजनीतिक हलकों में नाना साहब के दूत के रूप में पैरवी की थी और ब्रिटेन यात्रा के दौरान ही क्रीमिया युद्ध का प्रत्यक्ष अध्ययन किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के महान विद्रोह की असफलता और उसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 1857 के विद्रोह का नेतृत्व करने वाले अधिकांश प्रांतीय शासक और सामंत अपने खोए हुए अधिकारों या पेंशन की पुनः प्राप्ति के लिए लड़ रहे थे, जिसके कारण उनमें अखिल भारतीय स्तर की राजनीतिक दृष्टि और एक साझा प्रशासनिक विजन का पूर्ण अभाव था।
2. ब्रिटिश सेना के पास आधुनिक संचार साधनों (जैसे टेलीग्राफ) और तीव्र परिवहन (रेलवे) की सुविधा उपलब्ध थी, जबकि भारतीय विद्रोहियों के पास न तो कोई केंद्रीय समन्वय था और न ही वे एक सामंजस्यपूर्ण सैन्य रणनीति के तहत एकजुट होकर लड़ सके।
3. भारत के अधिकांश बड़े रियासतों और शिक्षित मध्यम वर्ग ने विद्रोह का सक्रिय समर्थन किया तथा अंग्रेजों के खिलाफ खुलकर खड़े हो गए, जिससे ब्रिटिश साम्राज्य को शुरुआती हफ्तों में ही भारत छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था।
4. मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को विद्रोहियों द्वारा भारत का सम्राट घोषित जरूर किया गया था, किंतु उनकी वृद्धावस्था, अनिच्छा और सैन्य नेतृत्व क्षमता की कमी के कारण विद्रोह को कोई प्रभावी केंद्रीय और दिशा-निर्देशन नहीं मिल सका।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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