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History of India
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वर्ष 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' और सुभाष चंद्र बोस द्वारा संचालित 'आजाद हिंद फौज' (INA) की गतिविधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बंबई के गोवालिया टैंक मैदान में कांग्रेस के ऐतिहासिक प्रस्ताव के बाद महात्मा गांधी ने 'करेंगे या मरेंगे' (Do or Die) का मंत्र दिया था, तथा इस आंदोलन की एक बड़ी विशिष्टता देश के कई हिस्सों में 'समानांतर सरकारों' (Parallel Governments) का गठन था, जिसमें बलिया, ताम्रलिप्त और सतारा की सरकारें प्रमुख थीं।
  2. 2. जापान के सहयोग से पुनर्गठित इंडियन नेशनल आर्मी (INA) का सर्वोच्च नेतृत्व ग्रहण करने के पश्चात, सुभाष चंद्र बोस ने अक्टूबर 1943 में सिंगापुर में 'आर्जि हुकूमत-ए-आजाद हिंद' (स्वतंत्र भारत की अनंतिम सरकार) की स्थापना की थी, जिसे जापान सहित कुल नौ धुरी और मित्र राष्ट्र-समर्थक देशों ने आधिकारिक मान्यता प्रदान की थी।
  3. 3. सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर से सिंगापुर रेडियो के माध्यम से 6 जुलाई 1944 को प्रसारित अपने एक संबोधन में महात्मा गांधी को संबोधित करते हुए उन्हें पहली बार 'राष्ट्रपिता' (Father of the Nation) कहकर पुकारा था और भारत की पूर्ण मुक्ति के लिए उनके आशीर्वाद की कामना की थी।
  4. 4. आजाद हिंद फौज के सैनिकों पर लाल किले (Red Fort Trials) में चलाए गए बहुचर्चित मुकदमों के दौरान ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध बचाव पक्ष के वकीलों की मुख्य समिति के प्रमुख वकील भूलाभाई देसाई थे, जबकि इस ऐतिहासिक कानूनी दल में तेज बहादुर सप्रू, कैलाश नाथ काटजू और जवाहरलाल नेहरू जैसे प्रसिद्ध विधिवेत्ता भी सक्रिय रूप से शामिल थे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए कथनों में कथन 1, 3 और 4 पूरी तरह सही हैं, जबकि कथन 2 आंशिक रूप से गलत है क्योंकि 'आर्जि हुकूमत-ए-आजाद हिंद' को जापान के अलावा जर्मनी, इटली, बर्मा, मानचुकुओ, फिलीपींस, नानकिंग (चीन की कठपुतली सरकार), क्रोएशिया और थाईलैंड जैसे कुल नौ धुरी राष्ट्रों और उनके सहयोगियों द्वारा मान्यता दी गई थी, न कि मित्र राष्ट्रों द्वारा। भारत छोड़ो आंदोलन और आजाद हिंद फौज भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दो अत्यंत महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी अध्याय रहे हैं। विकिपीडिया संदर्भ
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