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History of India
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मुगलकालीन वास्तुकला, धार्मिक नीतियों और प्रांतीय प्रशासन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. जहाँगीर के शासनकाल में मुगल चित्रकला ने अपने चरमोत्कर्ष को छुआ, जहाँ प्राकृतिक दृश्यों, पक्षियों (विशेषकर उस्ताद मंसूर द्वारा चित्रित) और पोर्ट्रेट पेंटिंग को विशेष प्रोत्साहन मिला, तथा इसी काल में वास्तुकला में संगमरमर का प्रयोग और 'पिएत्रा ड्यूरा' (जड़ाऊ काम) शैली की शुरुआत पूर्ण रूप से हुई।
  2. 2. शाहजहां के शासनकाल को मुगल वास्तुकला का 'स्वर्ण युग' कहा जाता है, जिसके अंतर्गत लाल किले के दीवान-ए-आम और दीवान-ए-खास के निर्माण में मयूर सिंहासन (तख्त-ए-ताऊस) की स्थापना की गई, जिसे बाद में नादिरशाह लूटकर ईरान ले गया था।
  3. 3. औरंगजेब की धार्मिक नीतियों के तहत संगीत, चित्रकला और झरोखा दर्शन को शाही दरबार में प्रतिबंधित कर दिया गया, तथा उसने अपने शासन के शुरुआती वर्षों में ही हिन्दू मंदिरों के निर्माण और उनके जीर्णोद्धार पर पूर्ण रोक लगा दी थी।
  4. 4. मुगल प्रशासनिक शब्दावली में 'मीर बख्शी' साम्राज्य का सैन्य विभाग और खुफिया विभाग दोनों का प्रमुख अधिकारी होता था, जो मनसबदारों के घोड़ों को दागने और सैनिकों के हुलिया का रिकॉर्ड रखने के लिए प्रत्यक्ष रूप से उत्तरदायी था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि 'पिएत्रा ड्यूरा' (जड़ाऊ काम) शैली का सबसे पहला और व्यापक प्रयोग शाहजहां के काल में ताजमहल और आगरा के किले के दीवान-ए-खास में देखने को मिलता है, जबकि जहाँगीर के काल में वास्तुकला में संगमरमर के प्रयोग की शुरुआत (जैसे एत्माउद्दौला का मकबरा) हुई थी, किंतु चरमोत्कर्ष शाहजहां का काल था। कथन 2 सत्य है, शाहजहां के काल को स्थापत्य कला का स्वर्ण युग कहा जाता है और मयूर सिंहासन (तख्त-ए-ताऊस) दीवान-ए-खास में रखा गया था। कथन 3 आंशिक रूप से अशुद्ध हो सकता है क्योंकि औरंगजेब ने 1659 में ही नए मंदिरों के निर्माण पर रोक लगाई थी, किंतु पूर्ण जीर्णोद्धार का प्रतिबंध संदर्भ जटिल है। सबसे सटीक रूप से कथन 2 और 4 पूर्णतया सत्य हैं। मीर बख्शी सैन्य विभाग का प्रमुख होता था। विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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