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History of India
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मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था और प्रांतीय शासन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. अकबर के शासनकाल के 24वें वर्ष (1582 ई.) में राजा टोडरमल की सहायता से 'दहसाला' (या जरबती) नामक नई राजस्व प्रणाली लागू की गई, जिसके अंतर्गत पिछले दस वर्षों के उत्पादन और मूल्यों के औसत के आधार पर मालगुजारी निश्चित की जाती थी।
- 2. शाहजहां के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था में 'दुअस्पा-सिंहअस्पा' (दो-घोड़ा और तीन-घोड़ा) की नई पद-मर्यादा जोड़ी गई, जिससे बिना जात मनसब बढ़ाए सवार मनसब को दोगुना किया जा सकता था।
- 3. औरंगजेब के शासनकाल में साम्राज्य के प्रांतों (सूबों) की संख्या सबसे अधिक थी, और उसके दक्षिण अभियानों के दौरान 'फौजदार' नामक अधिकारी को प्रांतीय स्तर पर धार्मिक मामलों और जजिया कर की वसूली का विशेष जिम्मा सौंपा गया था।
- 4. मुगल प्रशासनिक शब्दावली में 'अमीन' का मुख्य कार्य राजस्व का मूल्यांकन करना तथा भूमि की पैमाइश और वर्गीकरण में सहायता देना था, जबकि 'अरोरा' या 'पोदार' प्रांतीय खजाने का प्रमुख अधिकारी होता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मुगल प्रशासनिक और राजस्व व्यवस्था में राजा टोडरमल का महत्वपूर्ण योगदान था। कथन 1 सही है क्योंकि अकबर के 24वें वर्ष में 'दहसाला' प्रणाली लागू की गई थी। कथन 2 गलत है क्योंकि 'दुअस्पा-सिंहअस्पा' प्रणाली को जहांगीर ने अपनी मनसबदारी व्यवस्था में जोड़ा था, न कि शाहजहां ने। कथन 3 गलत है क्योंकि 'दुअस्पा-सिंहअस्पा' प्रणाली और फौजदार का कार्यक्षेत्र धार्मिक करों से अलग सैन्य व प्रशासनिक शांति बनाए रखना था। कथन 4 सही है क्योंकि अमीन का कार्य राजस्व मूल्यांकन व पैमाइश से जुड़ा था। इस काल की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों—विशेषकर पटना, दानापुर, आरा और मुजफ्फरपुर—में हुई घटनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पटना शहर में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक प्रसिद्ध पुस्तक विक्रेता पीर अली खान ने किया था, जिनके नेतृत्व में हुए इस संघर्ष के दौरान अफीम एजेंट डॉ. लायेल की हत्या कर दी गई थी और इसके तुरंत बाद अंग्रेजों द्वारा पीर अली को सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी।
2. दानापुर छावनी (Danapur Cantonment) में 25 जुलाई 1857 को 7वीं, 8वीं और 40वीं रेजिमेंट के भारतीय सैनिकों ने ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ खुला विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर सीधे जगदीशपुर के बाबू वीर कुंवर सिंह की सेना में शामिल होने के लिए प्रस्थान कर गए थे।
3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) क्षेत्रों में विद्रोह का नेतृत्व करने वाले स्थानीय असंतुष्ट जमींदारों और राजाओं ने ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकने के लिए संगठित होकर एक संयुक्त प्रांतीय सेना का गठन किया था, जिसे ब्रिटिश कमिश्नर विलियम टेलर ने अत्यंत प्रारंभिक चरण में ही बेरहमी से कुचल दिया था।
4. पटना के कमिश्नर विलियम टेलर ने विद्रोह की गंभीरता को भांपते हुए पटना के तीन प्रमुख मुस्लिम शख्सियतों—मौहम्मद हुसैन, अहमद अली और पीर अली—को गिरफ्तार करने के बजाय उनकी राजनीतिक वफादारी को देखते हुए उन्हें पटना का प्रशासन सौंप दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम 1858' और क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम के द्वारा भारत का शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन कर दिया गया तथा 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' की द्वैध शासन प्रणाली को समाप्त कर 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) के नवीन पद का सृजन किया गया, जिसकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय भारतीय परिषद का गठन किया गया।
2. क्वीन विक्टोरिया की घोषणा (जिसे 1 नवंबर 1858 को इलाहाबाद के दरबार में लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़ा गया) के माध्यम से भविष्य में ब्रिटिश भारत में किसी भी प्रकार के नए क्षेत्र विस्तार की नीति को औपचारिक रूप से त्यागने का आश्वासन दिया गया।
3. इस घोषणा में भारतीय रियासतों के शासकों को गोद लेने के अधिकार (दत्तक पुत्र की अनुमति) को मान्यता दी गई और यह स्पष्ट किया गया कि ब्रिटिश सरकार भारतीय जनता के धार्मिक, सामाजिक विश्वासों तथा प्राचीन परंपराओं में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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मध्यकालीन भारत के भक्ति और सूफी आंदोलन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण भारत के अलवार (विष्णु भक्त) और नयनार (शिव भक्त) संतों ने रूढ़िवादी ब्राह्मणवादी व्यवस्था और जातिगत कठोरता का विरोध करते हुए भक्ति मार्ग को लोक-भाषा (तमिल) के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया, जिसमें आंदाल (पर्गाल की मीरा) और करैक्कालअम्मैयार जैसी महिला संतों का भी महत्वपूर्ण योगदान था।
2. सूफी सिलसिले के 'चिशती' संप्रदाय ने भारत में संगीत और समअ (रहस्यवादी संगीत सत्र) की परंपरा को स्वीकार किया, जबकि इसके विपरीत 'सुहरावर्दी' संप्रदाय ने राजकीय संरक्षण और शाही अनुदान स्वीकार करने से कड़ाई से इनकार करते हुए पूर्णतः एकांत और निर्धनता का जीवन बिताया।
3. उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाने वाले रामानंद ने कबीर, रैदास (संत रविदास) और सेना जैसे विभिन्न जातियों और पृष्ठभूमियों के व्यक्तियों को अपना शिष्य बनाया, जिससे यह संकेत मिलता है कि भक्ति आंदोलन ने सामाजिक समानता के द्वार खोल दिए थे।
4. अकबर के समकालीन और नक्शबंदी सिलसिले के प्रमुख संत शेख अहमद सरहिंदी (मुजद्दिद-अलिफ-सानी) ने अकबर की धार्मिक सहिष्णुता की नीतियों (जैसे दीन-ए-इलाही और सुलह-कुल) का तीव्र विरोध करते हुए इस्लाम के शुद्धिकरण और रूढ़िवादी सिद्धांतों को पुनर्स्थापित करने का प्रयास किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 'सोलह महाजनपद' और मगध साम्राज्य के उत्थान के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंगुत्तर निकाय और भगवती सूत्र जैसे बौद्ध एवं जैन ग्रंथ प्राचीन भारत के सोलह महाजनपदों की सूची प्रदान करते हैं, जिनमें वज्जी और मल्ल संघ राजतंत्रात्मक व्यवस्था के स्थान पर गणतांत्रिक (Oligarchic/Republican) शासन प्रणाली का पालन करते थे।
2. मगध साम्राज्य के प्रारंभिक उत्कर्ष में उसकी भौगोलिक स्थिति की महत्वपूर्ण भूमिका थी; राजगृह (गिरिव्रज) पाँच पहाड़ियों से घिरा हुआ एक अभेद्य प्राकृतिक दुर्ग था और यह क्षेत्र प्रचुर मात्रा में उपलब्ध लौह अयस्क भंडारों के समीप स्थित था, जिससे उन्नत कृषि उपकरणों और अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण संभव हुआ।
3. हर्यक वंश के शासक बिम्बिसार ने अपनी साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए केवल क्रूर सैन्य आक्रमणों की नीति अपनाई, और उसने कौशला देवी तथा चेलना जैसी राजकुमारियों से वैवाहिक संबंध स्थापित करने की नीति से पूरी तरह परहेज किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा दक्षिण भारत में स्थापित मराठा साम्राज्य और उनकी सैन्य-प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी की राजस्व व्यवस्था मूल रूप से अहमदनगर के निजामशाही वजीर मलिक अंबर द्वारा तैयार की गई भू-राजस्व पद्धति पर आधारित थी, जिसमें भूमि की पैमाइश बीघा के स्थान पर काठी और मानक छड़ी के पैमाने से कराई जाती थी।
2. मराठा प्रशासनिक व्यवस्था में 'अष्टप्रधान' मंडल का प्रत्येक मंत्री युद्ध के समय व्यक्तिगत रूप से अपनी सेना का नेतृत्व करने के लिए बाध्य था, और इन सभी मंत्रियों के पद पूर्णतः वंशानुगत थे ताकि प्रशासनिक स्थिरता बनी रहे।
3. शिवाजी की घुड़सवार सेना में दो प्रमुख श्रेणियाँ थीं—'बरगीर', जिन्हें राज्य द्वारा घोड़े और शस्त्र प्रदान किए जाते थे, तथा 'सिलहदार', जो स्वयं अपने घोड़े और हथियार लेकर युद्ध में सम्मिलित होते थे।
4. मराठा साम्राज्य के नियंत्रण से बाहर के मुगल प्रांतों से सुरक्षा प्रदान करने के एवज में वसूला जाने वाला 'चौथ' कर कुल भू-राजस्व का 25 प्रतिशत होता था, जबकि 'सरदेशमुखी' कर 10 प्रतिशत अतिरिक्त कर के रूप में उन क्षेत्रों से वसूला जाता था जहाँ मराठे अपने पैतृक अधिकार का दावा करते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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