BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
9 views

19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के वैचारिक आधार, संस्थागत विकास और उनके सुधारकों के योगदान के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. राजा राममोहन राय द्वारा 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, सती प्रथा और जातिगत कठोरताओं का तीव्र विरोध किया तथा एकेश्वरवाद और उपनिषदों के तार्किक दर्शन पर विशेष बल दिया।
  2. 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा देते हुए वेदों को अपौरुषेय और ज्ञान का एकमात्र स्रोत माना, तथा पाखंड खंडणी पताका फहराते हुए मूर्तिपूजा, अवतारवाद और जन्म आधारित जाति व्यवस्था का कड़ा विरोध किया।
  3. 3. ज्योतिराव फुले द्वारा 1873 में स्थापित 'सत्यशोधक समाज' का मुख्य उद्देश्य ब्राह्मणवादी वर्चस्व, धार्मिक पाखंडों और रूढ़ियों का खंडन करते हुए शूद्रों, अति-शूद्रों (दलितों) और महिलाओं को शिक्षा तथा सामाजिक न्याय दिलाना था।
  4. 4. प्रार्थना समाज की स्थापना आत्माराम पांडुरंग द्वारा 1867 में केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से बंबई में की गई थी, जिसका मुख्य ध्यान हिंदू धर्म के भीतर व्याप्त कुरीतियों जैसे बाल विवाह, जाति भेद और विधवा पुनर्विवाह पर प्रतिबंध का समर्थन करना था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। राजा राममोहन राय के ब्रह्म समाज ने एकेश्वरवाद और समाज सुधार का मार्ग प्रशस्त किया। स्वामी दयानंद सरस्वती के आर्य समाज ने वेदों को सर्वोच्च मानते हुए रूढ़ियों का विरोध किया और ज्योतिराव फुले के सत्यशोधक समाज ने शोषित वर्गों व महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। कथन 4 असत्य है क्योंकि प्रार्थना समाज ने बाल विवाह, जाति भेद और विधवा पुनर्विवाह पर प्रतिबंध जैसी कुरीतियों का 'समर्थन' नहीं बल्कि कड़ा 'विरोध' किया था और समाज सुधार के लिए कार्य किया था। इस काल के आंदोलनों के विस्तृत अध्ययन के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

भारतीय स्वतंत्रता और देश के विभाजन के संदर्भ में माउंटबेटन योजना (3 जून 1947) और भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. माउंटबेटन योजना के तहत बंगाल और पंजाब की प्रांतीय विधानसभाओं को यह तय करने का अधिकार दिया गया था कि वे अपने-अपने प्रांतों का विभाजन चाहते हैं या नहीं, जिसके लिए मुस्लिम बहुसंख्यक और हिंदू बहुसंख्यक जिलों के सदस्यों की अलग-अलग बैठकें आयोजित की गईं। 2. ब्रिटिश संसद द्वारा जुलाई 1947 में पारित 'भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947' के प्रावधानों के अंतर्गत 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र डोमिनियन अस्तित्व में आए, तथा दोनों नवगठित देशों के लिए गवर्नर-जनरल के पद पर लॉर्ड माउंटबेटन को ही संयुक्त रूप से नियुक्त करने का निर्णय लिया गया था। 3. उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में से किसके साथ शामिल होना है, इसका निर्णय लेने के लिए ब्रिटिश सरकार द्वारा बिना किसी जनमत संग्रह (Referendum) के सीधे स्थानीय ब्रिटिश कमिश्नर के प्रशासनिक विवेक पर छोड़ दिया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झांसी और ग्वालियर क्षेत्र में रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के सैन्य अभियानों तथा उनके ऐतिहासिक संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मार्च 1858 में ब्रिटिश सेनापति सर ह्यूरोज द्वारा झांसी की घेराबंदी किए जाने पर रानी लक्ष्मीबाई ने अत्यंत वीरता के साथ किले की रक्षा की, और तात्या टोपे के नेतृत्व में आई राहत सेना के कालपी के निकट पराजित होने के बाद रानी किले से निकलकर कालपी की ओर प्रस्थान करने में सफल रहीं। 2. कालपी के युद्ध में अंग्रेजों से निर्णायक पराजय के पश्चात रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने ग्वालियर की ओर प्रस्थान किया, जहाँ सिंधिया सेना ने उनका कड़ा विरोध किया, किंतु अंततः ग्वालियर की अधिकांश सेना ने विद्रोह कर दिया और सिंधिया शासक जयाजीराव सिंधिया को आगरा की शरण में जाना पड़ा, जबकि ग्वालियर की सेना रानी और तात्या टोपे के साथ मिल गई। 3. तात्या टोपे ने ग्वालियर पर अधिकार करने के उपरांत पेशवा नाना साहब को औपचारिक रूप से पेशवा घोषित किया और स्वयं ग्वालियर की विद्रोही सेना के कमांडर-इन-चीफ के रूप में अंग्रेजी सेना का डटकर मुकाबला किया। 4. ग्वालियर के पतन और जून 1858 में हुए अंतिम निर्णायक संघर्ष के दौरान रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं, जबकि तात्या टोपे नरवर के एक स्थानीय जमींदार मानसिंह के विश्वासघात के कारण पकड़े गए और अंततः उन्हें शिवपुरी में अंग्रेजों द्वारा फांसी दे दी गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की अर्थव्यवस्था, व्यापार और नगर योजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस सभ्यता की लिपि 'भावचित्रात्मक' (Pictographic) थी, जो आमतौर पर दाईं से बाईं ओर (Boustrophedon शैली में पहली पंक्ति दाईं से बाईं और दूसरी बाईं से दाईं) लिखी जाती थी, और इसमें सर्वाधिक संख्या में यू-आकार (U-shaped) तथा मछली के चिह्न पाए गए हैं। 2. लोथल और चान्हूड़ो दोनों ही स्थल सिंधु सभ्यता के प्रमुख औद्योगिक केंद्र थे, जहाँ मनके बनाने के कारखाने (Bead-making factories) मिले हैं, किंतु चान्हूड़ो एकमात्र ऐसा स्थल है जहाँ से किसी भी प्रकार के दुर्ग (Citadel) का अवशेष प्राप्त नहीं हुआ है। 3. मोहनजोदड़ो से प्राप्त 'पशुपतिनाथ' (प्रोटो-शिव) की मुहर पर कुल चार पशुओं - बाघ, हाथी, गेंडा और भैंसा का अंकन मिलता है, तथा इस मुहर के आसन के नीचे दो हिरण भी बैठे हुए चित्रित किए गए हैं। 4. सिंधु सभ्यता के लोग विदेशी व्यापार के माध्यम से मेसोपोटामिया, ओमान (मगन) और बहरीन (दिलमुन) के साथ संपर्क में थे, जिसकी पुष्टि मेसोपोटामिया के अभिलेखों में प्रयुक्त 'मेलूहा' (Meluhha) शब्द से होती है, जिसे इतिहासकारों ने सिंधु क्षेत्र के लिए ही संदर्भित माना है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? सिखों के किस गुरु को अकबर ने 500 बीघा जमीन दान में दी थी, जहाँ अमृतसर नगर बसा? वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के विभिन्न पक्षों (आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक जीवन) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऋग्वैदिक काल में 'निष्क़' (Nishka) मूल रूप से गले में पहना जाने वाला एक प्रकार का बहुमूल्य आभूषण था, किंतु उत्तर वैदिक काल में आते-आते यह विनिमय के साधन और एक निश्चित भार के माप के रूप में सिक्का या मुद्रा के रूप में प्रयुक्त होने लगा। 2. शतपथ ब्राह्मण में कृषि की चारों प्रमुख क्रियाओं — जुताई (कर्षण), बुवाई (वपन), कटाई (लवन) और मड़ाई (मर्दन) — का विस्तृत उल्लेख मिलता है, तथा इसी ग्रंथ में विदेह माधव की कथा के माध्यम से आर्यों के सदाानीरा (गंडक) नदी तक पूर्व की ओर विस्तार का विवरण प्राप्त होता है। 3. ऋग्वेद में वर्णित 'दशराज युद्ध' (दस राजाओं का युद्ध) परूष्णी (वर्तमान रावी) नदी के तट पर लड़ा गया था, जिसमें भरत कुल के राजा सुदास ने त्रत्सु और अन्य दस जनजातियों के संघ को पराजित किया था, और इस युद्ध का मुख्य कारण पुरोहित पद से वशिष्ठ को हटाकर विश्वामित्र को नियुक्त करना था। 4. वैदिक साहित्य के अंतर्गत 'आरण्यक' उन दार्शनिक और रहस्यवादी ग्रंथों को कहा जाता है जिन्हें मुख्य रूप से एकांत जंगलों में पढ़ा जाता था, और ये यज्ञों के बाह्य कर्मकांडों के स्थान पर उनके दार्शनिक और प्रतीकात्मक अर्थों की व्याख्या करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.