त्वरित लिंक्स
History of India
7 views
मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, भू-राजस्व प्रणालियों और सांस्कृतिक विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. अकबर के शासनकाल में राजा टोडरमल द्वारा लागू की गई 'दहसाला' (जब्ती) प्रणाली के अंतर्गत पिछले दस वर्षों के उत्पादन और उसके औसत मूल्यों का आकलन कर मालगुजारी निश्चित की जाती थी, जिसमें भूमि को पोलज, परती, चाचर और बंजर श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया था।
- 2. जहाँगीर के शासनकाल में चित्रकला ने अपने चर्मोत्कर्ष (Golden Age) को प्राप्त किया, तथा उसने चित्रकला में 'नक्काशी' और प्राकृतिक चित्रण के साथ-साथ चेहरे की बनावट में 'शीह-कलम' (Siyah Qalam) शैली को विशेष प्रोत्साहन दिया, जबकि उसके काल में उस्ताद मंसूर पक्षियों और दुर्लभ फूलों के चित्रण में अद्वितीय थे।
- 3. शाहजहाँ के शासनकाल के दौरान वास्तुकला ने अपनी भव्यता की पराकाष्ठा को छुआ, और उसके काल में निर्मित ताजमहल की वास्तुकला में 'पित्रा दुरा' (Pietra Dura) या जड़वा कला का अत्यंत सुंदर प्रयोग किया गया, जिसमें संगमरमर के पत्थरों पर बहुमूल्य रत्नों को ज्यामितीय और पुष्प आकृतियों में जड़ा जाता था।
- 4. औरंगजेब की रूढ़िवादी धार्मिक नीतियों के कारण उसके दरबार में संगीत और चित्रकला को पूर्णतः राजकीय संरक्षण से वंचित कर दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप संगीतकारों और चित्रकारों ने शाही दरबार छोड़कर क्षेत्रीय रियासतों और राजपूत राजाओं के यहाँ शरण ली, और स्वयं औरंगजेब ने वीणा वादन में कोई रुचि नहीं दिखाई तथा संगीत पर पाबंदी लगा दी थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मुगल साम्राज्य के काल में प्रशासनिक, भू-राजस्व और सांस्कृतिक क्षेत्रों में अभूतपूर्व विकास हुआ। अकबर के शासनकाल में राजा टोडरमल द्वारा 'दहसाला' प्रणाली की शुरुआत की गई थी, जिसके तहत भूमि को उसकी उर्वरता के आधार पर पोलज, परती, चाचर और बंजर श्रेणियों में विभाजित किया गया था। जहाँगीर का काल मुगल चित्रकला का स्वर्ण युग माना जाता है, जहाँ उस्ताद मंसूर और अबुल हसन जैसे महान चित्रकार थे। शाहजहाँ का काल वास्तुकला का स्वर्ण युग था जिसमें ताजमहल और 'पित्रा दुरा' कला का उत्कृष्ट प्रयोग हुआ। जहाँ तक औरंगजेब का संबंध है, उसने अपने दरबार में संगीत पर प्रतिबंध लगाया था, किंतु यह ऐतिहासिक तथ्य है कि औरंगजेब स्वयं एक कुशल 'वीणा' वादक था, जिसके कारण कथन 4 आंशिक रूप से गलत हो जाता है क्योंकि वह स्वयं वीणा बजाने में अत्यधिक कुशल था। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
वर्ष 1857 के विद्रोह के परिणामों और भारत सरकार अधिनियम 1858 (क्वीन विक्टोरिया की घोषणा) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत सरकार अधिनियम 1858 के द्वारा ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त कर दिया गया और भारत का शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन (शाही ताज) के अधीन कर दिया गया, जिसके तहत भारत के नियंत्रण के लिए ब्रिटिश कैबिनेट में एक नए पद 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) का सृजन किया गया, जिसे सहायता देने के लिए 15 सदस्यीय 'भारत परिषद' (Council of India) का गठन किया गया।
2. इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में 1 नवंबर 1858 को आयोजित एक भव्य दरबार में लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़ी गई क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा (Queen Victoria's Proclamation) में यह आश्वासन दिया गया कि ब्रिटिश सरकार भारतीय रियासतों के साथ किए गए संधियों और अनुबंधों का सम्मान करेगी तथा भविष्य में किसी भी भारतीय राज्य का विलय नहीं किया जाएगा।
3. इस घोषणा में ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार की नीति को आधिकारिक रूप से त्यागने की बात कही गई, धार्मिक मामलों में अहस्तक्षेप की नीति का पालन करने का वचन दिया गया, तथा जाति, पंथ या जन्म के आधार पर किसी भी भारतीय को बिना किसी भेदभाव के योग्यता के अनुसार सरकारी सेवाओं में नियुक्त करने का प्रावधान किया गया।
4. विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश सरकार ने भारतीय सेना का पुनर्गठन करते हुए बंगाल और मद्रास प्रेसीडेंसी में यूरोपीय सैनिकों के अनुपात को और कम कर दिया, ताकि भविष्य में इस प्रकार के सैन्य विद्रोहों को रोका जा सके और सेना में 'फूट डालो और राज करो' की नीति के तहत क्षेत्रीय व सांप्रदायिक संतुलन स्थापित किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के दौरान स्थापित विभिन्न संगठनों और उनके संस्थापकों तथा वैचारिक प्रवृत्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. देवेंद्रनाथ टैगोर द्वारा वर्ष 1839 में स्थापित 'तत्त्वबोधिनी सभा' का मुख्य उद्देश्य राजा राममोहन राय के विचारों का प्रचार करना और उपनिषदों के आधार पर वेदांत मत का पुनरुत्थान करना था, तथा आगे चलकर यह सभा ब्रह्म समाज में ही विलीन हो गई।
2. स्वामी विवेकानंद द्वारा वर्ष 1897 में स्थापित 'रामकृष्ण मिशन' ने केवल धार्मिक और आध्यात्मिक मोक्ष पर बल दिया, तथा इसने ब्रिटिश भारत में आधुनिक पश्चिमी शिक्षा, चिकित्सा और सामाजिक कल्याण के कार्यों से पूरी तरह दूरी बनाए रखी।
3. केशव चंद्र सेन के नेतृत्व में ब्रह्म समाज के भीतर हुए विभाजन के परिणामस्वरुप वर्ष 1866 में 'भारतीय ब्रह्म समाज' (Sadharan Brahmo Samaj) की स्थापना हुई, जिसने बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं का विरोध करते हुए 'ब्रह्म विवाह अधिनियम' (Native Marriage Act 1872) को पारित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
4. पांडुरंग आत्माराम द्वारा वर्ष 1867 में स्थापित 'प्रार्थना समाज' ने महाराष्ट्र में सामाजिक सुधारों का नेतृत्व किया, और इसके प्रमुख विचारक न्यायमूर्ती महादेव गोविंद रानाडे ने अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और दलितोद्धार के लिए 'डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी' की स्थापना में भी प्रमुख सहयोग दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1857 के विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम 1858' और 'क्वीन विक्टोरिया की घोषणा' (1 नवंबर 1858) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम के माध्यम से भारत का शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन कर दिया गया और 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' तथा 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' की द्वैध शासन प्रणाली को समाप्त कर 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) के पद का सृजन किया गया, जिसकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय भारतीय परिषद का गठन किया गया।
2. क्वीन विक्टोरिया की घोषणा में भारतीय रियासतों को भविष्य में किसी भी प्रकार के नए क्षेत्र विस्तार (विलय) की नीति को औपचारिक रूप से त्यागने का आश्वासन दिया गया तथा देशी राजाओं को गोद लेने के अधिकार (दत्तक पुत्र की अनुमति) को मान्यता दी गई।
3. इस घोषणा में यह स्पष्ट प्रावधान किया गया कि भारत के सभी नागरिकों को उनकी नस्ल, धर्म, जन्मस्थान और रंग के भेदभाव के बिना उनकी योग्यता के आधार पर उच्च सरकारी सेवाओं (Civil Services) में बिना किसी पक्षपात के समान अवसर प्रदान किए जाएंगे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
गदर पार्टी और हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) जैसे क्रांतिकारी संगठनों के वैचारिक विकास, प्रकाशनों और गतिविधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1913 में सैन फ्रांसिस्को में स्थापित 'गदर पार्टी' द्वारा निकाले गए साप्ताहिक पत्र 'ग़दर' के प्रत्येक अंक के मुखपृष्ठ पर 'अंग्रेज़ी राज का कच्चा चिट्ठा' शीर्षक छपता था, जिसमें ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के आर्थिक शोषण और अत्याचारों का विवरण होता था।
2. लाला हरदयाल और सोहन सिंह भाकना द्वारा स्थापित गदर आंदोलन का मुख्य उद्देश्य केवल वैधानिक सुधार प्राप्त करना था, और उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना में भारतीय सैनिकों के बीच विद्रोह भड़काने की किसी भी योजना का पुरजोर विरोध किया था।
3. वर्ष 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) का पुनर्गठन करते हुए इसमें समाजवाद को मुख्य लक्ष्य के रूप में जोड़ा गया और इसका नाम बदलकर 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) कर दिया गया था।
4. भगत सिंह और भगवती चरण बोहरा द्वारा रचित प्रसिद्ध लेख 'द फिलॉसफी ऑफ द बॉम्ब' (बम का दर्शन) में यह स्पष्ट किया गया था कि हिंसा का आशय केवल अराजकता फैलाना नहीं है, बल्कि यह एक अन्यायपूर्ण व्यवस्था को ध्वस्त कर समतावादी समाज की स्थापना का साधन है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
महात्मा गांधी के भारत आगमन और उनके शुरुआती तीन प्रमुख सत्याग्रहों (चंपारण, खेड़ा और असहयोग आंदोलन) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1917 के चंपारण सत्याग्रह के दौरान राजकुमार शुक्ल के निमंत्रण पर गांधीजी ने बिहार के चंपारण का दौरा किया था, जहाँ यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा अपनाई जाने वाली 'तीनकठिया पद्धति' के विरोध में किसानों को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष किया गया, और इसी आंदोलन की सफलता से प्रभावित होकर रविन्द्रनाथ टैगोर ने गांधीजी को 'महात्मा' की उपाधि दी थी।
2. वर्ष 1918 के खेड़ा सत्याग्रह के दौरान, जहाँ फसल बर्बाद हो जाने के बावजूद ब्रिटिश सरकार द्वारा लगान वसूल किया जा रहा था, गांधीजी ने किसानों का नेतृत्व किया और वल्लभभाई पटेल व इंदुलाल याज्ञिक के सहयोग से सरकार को यह आश्वासन देने के लिए विवश किया कि यदि फसल अच्छी नहीं होगी तो उस वर्ष का लगान स्थगित कर दिया जाएगा।
3. वर्ष 1920 में प्रारंभ किए गए असहयोग आंदोलन के दौरान नागपुर अधिवेशन (दिसंबर 1920) में कांग्रेस के संविधान में बदलाव किया गया और यह निर्णय लिया गया कि अब शांतिपूर्ण और वैध तरीकों के साथ-साथ 'स्वराज' की प्राप्ति के लिए किसी भी सीमा तक जनसंघर्ष किया जा सकता है।
4. चौरी-चौरा की घटना (5 फरवरी 1922) के उपरांत असहयोग आंदोलन को अचानक वापस लिए जाने के कारण भारतीय राजनीति में अत्यधिक निराशा फैली, जिसके परिणामस्वरुप चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने कांग्रेस से अलग होकर 'स्वराज पार्टी' का गठन किया, जबकि गांधीजी को ब्रिटिश सरकार द्वारा गिरफ्तार कर छह वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.