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Geography
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भारत में वनों की स्थिति, राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव संरक्षण क्षेत्रों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट' (ISFR) के अनुसार देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 24.62% भाग वनों और वृक्षों के आवरण के अंतर्गत है, जिसमें कुल वन क्षेत्र (Forest Cover) के प्रतिशत के आधार पर 'मिजोरम' राज्य सभी राज्यों में प्रथम स्थान पर है।
  2. 2. 'शांत घाटी राष्ट्रीय उद्यान' (Silent Valley National Park) केरल की नीलगिरी पहाड़ियों में स्थित है, जो उष्णकटिबंधीय सदाबहार वर्षा वनों का एक अनूठा क्षेत्र है और यहाँ 'सिंहपुच्छ मकाक' (Lion-tailed macaque) का प्रमुख प्राकृतिक आवास पाया जाता है।
  3. 3. 'ग्रेट हिमालयन राष्ट्रीय उद्यान' (Great Himalayan National Park), जो हिमाचल प्रदेश में स्थित है, को इसके अद्वितीय जैव विविधता और संरक्षण प्रयासों के लिए यूनेस्को (UNESCO) के विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल किया गया है।
  4. 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान' देश का पहला राष्ट्रीय उद्यान है, जो उत्तराखंड के नैनीताल और पौड़ी गढ़वाल जिलों में फैला हुआ है और रामगंगा नदी इस पार्क के मध्य से होकर प्रवाहित होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूरी तरह से सत्य हैं। 'भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट' (ISFR) के अनुसार भारत में कुल वन और वृक्ष आवरण देश के क्षेत्रफल का लगभग 24.62% है, और भौगोलिक क्षेत्रफल के प्रतिशत के रूप में सर्वाधिक वन आवरण मिजोरम में पाया जाता है। शांत घाटी (Silent Valley) केरल में सदाबहार वनों के लिए तथा सिंहपुच्छ मकाक के लिए प्रसिद्ध है। हिमाचल प्रदेश का ग्रेट हिमालयन राष्ट्रीय उद्यान यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में सम्मिलित है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार जिम कॉर्बेट भारत का प्रथम राष्ट्रीय उद्यान है जिससे रामगंगा नदी प्रवाहित होती है।
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भारत की मृदा प्रणालियों और उनके रासायनिक व भौतिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लाल और पीली मृदा (Red and Yellow Soils) का लाल रंग मुख्य रूप से रवेदार और कायांतरित चट्टानों में लौह ऑक्साइड (Iron Oxide) के व्यापक प्रसार के कारण होता है, जबकि इसका पीला रंग इसमें जलयोजन (Hydration) की स्थिति आने के कारण प्रदर्शित होता है। 2. लैटेराइट मृदा (Laterite Soil) उच्च तापमान और भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में तीव्र निक्षालन (Leaching) का परिणाम है, जिसमें ह्यूमस की मात्रा अधिक होती है, जबकि सिलिका और चूने का निक्षालन हो जाने के कारण यह मृदा उपजाऊ कृषि के लिए प्राकृतिक रूप से सर्वाधिक उपयुक्त होती है। 3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार काली मृदा (Black Soil), जिसे स्थानीय रूप से 'रेगुर मृदा' भी कहा जाता है, में नमी धारण करने की क्षमता (Water Retention Capacity) अत्यधिक होती है और सूखने पर इसमें गहरी दरारें पड़ जाती हैं, जिससे इसमें स्वतः जुताई (Self-ploughing) का गुण पाया जाता है। 4. क्षारीय और लवणीय मृदा (Alkaline and Saline Soils), जिन्हें उत्तर भारत में 'रेर', 'उह्र' और 'कल्लर' भी कहा जाता है, में सोडियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम की अधिकता होती है और ये मृदाएँ नाइट्रोजन तथा चूने के प्रचुर भंडार से परिपूर्ण होती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारत की विभिन्न मृदा प्रणालियों, उनके रासायनिक गुणों और क्षेत्रीय वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जलोढ़ मृदा (Alluvial Soils) देश के कुल क्षेत्रफल का सबसे बड़ा हिस्सा कवर करती है, जो मुख्य रूप से नदियों द्वारा लाए गए अवसादों के निक्षेपण से बनती है और इसमें 'भाबर' क्षेत्र में नदियाँ कंकड़-पत्थरों के नीचे विलुप्त हो जाती हैं, जबकि उसके दक्षिण में स्थित 'तराई' क्षेत्र अत्यधिक दलदली और जैव विविधता से समृद्ध होता है। 2. लाल और पीली मृदा (Red and Yellow Soils) का रंग प्राचीन रवेदार और कायांतरित चट्टानों पर लोहे के प्रसार के कारण होता है, जहाँ इसका पीला रंग फेरिक हाइड्रॉक्साइड की उपस्थिति को दर्शाता है, और यह मृदा सामान्यतः नाइट्रोजन, फास्फोरस तथा ह्यूमस की कमी वाली होती है। 3. 'पीट और दलदली मृदा' (Peaty and Marshy Soils) का विकास भारी वर्षा और उच्च आर्द्रता वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर मृत कार्बनिक पदार्थों के संचयन के परिणामस्वरूप होता है, जिसके कारण इस मृदा में ह्यूमस की मात्रा 10 से 40 प्रतिशत तक पाई जाती है और यह केरल के कुछ हिस्सों में 'करी' (Kari) मृदा के रूप में जानी जाती है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'लैटेराइट मृदा' अत्यधिक उर्वर और पोटाश से भरपूर होती है, जिसका उपयोग देश में सबसे अधिक पैमाने पर गेहूँ और गन्ने की सघन व्यावसायिक खेती के लिए किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारत के अपवाह तंत्र (Drainage System) के संदर्भ में, हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों की विशेषताओं और उनके जल-विभाजकों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हिमालयी नदियाँ 'पूर्ववर्ती अपवाह' (Antecedent Drainage) का उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जिसका अर्थ है कि ये नदियाँ हिमालय के उत्थान से पहले भी प्रवाहित होती थीं और उन्होंने उत्थान के साथ-साथ गहरी खड्डों (Gorges) का निर्माण करते हुए अपने मार्ग को बनाए रखा। 2. प्रायद्वीपीय भारत का मुख्य जल-विभाजक पश्चिमी घाट (Western Ghats) द्वारा निर्मित होता है, जो पश्चिमी तट के बहुत करीब उत्तर से दक्षिण की ओर एक सतत कगार के रूप में फैला हुआ है और अधिकांश बड़ी प्रायद्वीपीय नदियाँ बंगाल की खाड़ी की ओर प्रवाहित होती हैं। 3. नर्मदा और ताप्ती नदियाँ प्रायद्वीपीय पठार की अपवाद स्वरूप नदियाँ हैं जो डेल्टा का निर्माण न करके 'एश्चुअरी' (Estuary) बनाती हैं, क्योंकि ये प्राचीन भ्रंश घाटियों (Rift Valleys) से होते हुए अरब सागर में गिरती हैं। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार गोदावरी नदी प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी है, जिसे 'दक्षिण गंगा' या 'वृद्ध गंगा' भी कहा जाता है, और इसका उद्गम पश्चिमी घाट में त्रयंबकेश्वर (नासिक) से होता है तथा यह बंगाल की खाड़ी में गिरती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? पृथ्वी के प्रमुख भू-आकृतिक स्वरूपों—पर्वतों, पठारों, मैदानों और मरुस्थलों—के निर्माण, उनकी विवर्तनिक प्रकृति और भौगोलिक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 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