BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Geography
10 views

पृथ्वी की आंतरिक संरचना और चट्टानों (शैल) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. पृथ्वी की भूपर्पटी (Crust) में भार के अनुसार सबसे अधिक मात्रा ऑक्सीजन (लगभग 46.6%) की पाई जाती है, जिसके बाद सिलिकॉन (लगभग 27.7%) और एल्युमीनियम का स्थान आता है, जबकि संपूर्ण पृथ्वी के स्तर पर सर्वाधिक प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला तत्व लोहा (Iron) है।
  2. 2. 'बेसाल्ट' और 'ग्रेब्रो' दोनों ही आग्नेय चट्टानें हैं, परंतु बेसाल्ट एक बहिर्भेदी (Extrusive) आग्नेय चट्टान है जो द्रुत शीतलन के कारण सूक्ष्म कणों वाली होती है, जबकि ग्रेब्रो एक अंतर्भेदी (Intrusive) आग्नेय चट्टान है जो भूगर्भ में मंद शीतलन के कारण बड़े रवेदार (Coarse-grained) रूप में पाई जाती है।
  3. 3. कायांतरित (Metamorphic) चट्टानों का निर्माण अत्यधिक ताप, दाब या रासायनिक रूप से सक्रिय तरल पदार्थों के प्रभाव से पूर्ववर्ती आग्नेय या अवसादी चट्टानों के पुनर्गठन द्वारा होता है, जिसके अंतर्गत चूना पत्थर (Limestone) रूपांतरित होकर संगमरमर (Marble) में तथा बलुआ पत्थर (Sandstone) क्वार्ट्जाइट में परिवर्तित हो जाता है।
  4. 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार पृथ्वी की क्रोड (Core) मुख्य रूप से निकल और लोहे से बनी है, जिसे 'निफे' (NIFE) परत भी कहा जाता है, और इसका बाहरी क्रोड पिघली हुई अवस्था में होने के कारण पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) के सृजन के लिए उत्तरदायी है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। पृथ्वी की क्रस्ट में ऑक्सीजन (लगभग 46.6%), सिलिकॉन (27.7%) और एल्युमीनियम (8.1%) की मात्रा सर्वाधिक होती है, जबकि संपूर्ण पृथ्वी के भूगर्भ में सबसे अधिक मात्रा लोहे (लगभग 35%) की पाई जाती है। बेसाल्ट (बहिर्भेदी) और ग्रेब्रो (अंतर्भेदी) आग्नेय चट्टानों के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। ताप और दाब के प्रभाव से चूना पत्थर संगमरमर में तथा बलुआ पत्थर क्वार्ट्जाइट में बदल जाता है (कायांतरण)। क्रोड (NIFE) का बाहरी भाग तरल है जिसके संवहन से भू-चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार शैल चक्र और आंतरिक संरचना भू-वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के मुख्य आधार हैं।
Share:

Related Questions

भूकंपीय तरंगों की प्रकृति, ज्वालामुखी उद्गार के प्रकार और सुनामी की गतिशीलता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्राथमिक तरंगें (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंगें होती हैं जो ध्वनि तरंगों की तरह ठोस, तरल और गैस तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, जबकि द्वितीयक तरंगें (S-waves) अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगें होती हैं जो केवल ठोस माध्यमों में ही गमन करती हैं। 2. 'हवाईयन प्रकार' का ज्वालामुखी उद्गार सबसे अधिक विस्फोटक होता है जिसमें अत्यधिक चिपचिपा और सिलिका-युक्त अम्लीय लावा निकलता है, जिससे विशाल काल्डेरा का निर्माण होता है। 3. सुनामी तरंगें महासागरों के गहरे पानी में अत्यंत कम आयाम (Amplitude) और लंबी तरंग दैर्ध्य (Wavelength) वाली होती हैं, जिसके कारण गहरे समुद्र में जहाजों को इसका आभास नहीं होता है, किंतु उथले तटीय क्षेत्रों में पहुँचने पर इनकी गति कम हो जाती है और इनकी ऊँचाई में भारी वृद्धि हो जाती है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार रिक्टर स्केल (Richter Scale) भूकंप की ऊर्जा या परिमाण (Magnitude) को मापता है, जो एक लघुगणकीय (Logarithmic) पैमाना है, जबकि मरकैली स्केल (Mercalli Scale) भूकंप के कारण होने वाली दृश्य क्षति और तीव्रता (Intensity) को व्यक्त करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों के वितरण, उनकी उत्पत्ति और विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत में मिलने वाला अधिकांश कोयला 'गोंडवाना क्रम' की चट्टानों से प्राप्त होता है, जो दामोदर, महानदी, सोन और गोदावरी नदी घाटियों में संकेंद्रित है, तथा इस कोयले में सल्फर की मात्रा कम और राख (Ash) की मात्रा अधिक होती है। 2. देश में पाए जाने वाले परमाणु खनिजों में 'यूरेनियम' के प्रमुख निक्षेप झारखंड के सिंहभूम ताम्र मेखला के साथ-साथ आंध्र प्रदेश के तुमलापल्ली और मेघालय के डोमथियआत क्षेत्रों में पाए जाते हैं। 3. भारत के अपतटीय पेट्रोलियम क्षेत्रों में 'मुंबई हाई' (Mumbai High) देश का सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्र है, जहाँ तेल का निष्कर्षण मुख्य रूप से ऑलिगोसीन और मियोसीन काल की बलुआ पत्थर (Sandstone) संरचनाओं से किया जाता है। 4. पेट्रोलियम संसाधनों के अंतर्गत असम का डिगबोई क्षेत्र भारत का सबसे पुराना निरंतर कार्यरत तेल क्षेत्र है, जबकि देश का अधिकांश प्राकृतिक गैस भंडार मुख्य रूप से कृष्णा-गोदबारी (KG) बेसिन और मुंबई अपतटीय क्षेत्रों में केंद्रित है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? विश्व की प्रमुख महासागरीय जलधाराओं (Ocean Currents) और उनके तटीय तथा climatic प्रभावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'फॉकलैंड जलधारा' (Falkland Current) अटलांटिक महासागर की एक ठंडी जलधारा है जो दक्षिण अमेरिका के पूर्वी तट के सहारे उत्तर की ओर प्रवाहित होती है और इसके प्रभाव से अर्जेंटीना के तटीय क्षेत्रों में तापमान काफी कम हो जाता है। 2. 'अगुलहास जलधारा' (Agulhas Current) हिंद महासागर की एक प्रमुख गर्म जलधारा है जो अफ्रीका के पूर्वी तट के सहारे दक्षिण की ओर बहती है और मोजांबिक जलधारा के मिलने से इसका विस्तार होता है। 3. 'कैलिफोर्निया जलधारा' (California Current) उत्तरी प्रशांत महासागर की एक ठंडी जलधारा है जो उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी तट के दक्षिण की ओर बहती है और इसके प्रभाव से यहाँ 'मोहावे' और 'सोनोरन' मरुस्थलों की शुष्कता में वृद्धि होती है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'अलास्का जलधारा' (Alaska Current) प्रशांत महासागर की एक ठंडी जलधारा है जो अलास्का के तटीय क्षेत्रों को वर्ष भर बर्फ से ढंके रखने के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? महासागरीय जलधाराओं और उनकी भौगोलिक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गल्फ स्ट्रीम (Gulf Stream) एक गर्म जलधारा है जो मैक्सिको की खाड़ी से निकलकर उत्तरी अटलांटिक महासागर से होते हुए यूरोप के पश्चिमी तटों तक पहुँचती है और वहाँ के बंदरगाहों को सर्दियों में भी बर्फ से मुक्त रखती है। 2. 'लैब्राडोर धारा' (Labrador Current) एक ठंडी जलधारा है जो आर्कटिक महासागर से दक्षिण की ओर प्रवाहित होती है और न्यूफाउंडलैंड के पास गल्फ स्ट्रीम से मिलने के बाद विश्व के सबसे बड़े 'मत्स्यन बैंक' (Grand Banks) का निर्माण करती है। 3. दक्षिणी गोलार्ध के महासागरों में महासागरीय जलधाराएँ कोरियॉलिस बल के प्रभाव के कारण घड़ी की सुइयों की दिशा में (Clockwise) प्रवाहित होती हैं। 4. पेरू धारा (Humboldt Current) प्रशांत महासागर में दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट के सहारे बहने वाली एक ठंडी जलधारा है, जिसके कमजोर पड़ने या नष्ट होने से 'अल नीनो' (El Nino) घटना का विकास होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? पृथ्वी की आंतरिक विवर्तनिक प्रक्रियाओं, भूकंपीय तरंगों और सुनामी की गतिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'सुनामी' (Tsunami) तरंगे उथले समुद्र में प्रवेश करने पर अपनी तरंगदैर्ध्य (Wavelength) में कमी और वेग में तीव्र गिरावट का अनुभव करती हैं, जिससे उनकी तरंग ऊँचाई (Wave Height) अचानक अत्यधिक बढ़ जाती है। 2. प्राथमिक तरंगें (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) प्रकृति की होती हैं, जो ठोस, तरल और गैस तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, जबकि द्वितीयक तरंगें (S-waves) अनुप्रस्थ (Transverse) प्रकृति की होती हैं और ये केवल ठोस माध्यमों से ही गमन करती हैं। 3. विवर्तनिक भूकंप (Tectonic Earthquakes) सामान्यतः भ्रंश तलों (Fault Planes) के सहारे ऊर्जा के अचानक विमोचन से उत्पन्न होते हैं, और इनका अधिकेंद्र (Epicenter) हमेशा उस स्थान पर होता है जहाँ से ऊर्जा सबसे पहले निकलती है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार महासागरीय तलों पर उत्पन्न होने वाली सुनामी तरंगें गहरे समुद्र में अत्यंत लंबी तरंगदैर्ध्य और उच्च गति रखती हैं, जिसके कारण गहरे महासागर में जहाजों पर यात्रा करने वाले लोगों को इसका गंभीर अहसास होता है और बड़ी तबाही का सामना करना पड़ता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.