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Geography
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सौर मंडल के ग्रहों, उनकी भू-रासायनिक संरचना, वायुमंडलीय गतिकी और खगोलीय पिंडों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'शनि' (Saturn) का सबसे बड़ा प्राकृतिक उपग्रह 'टाइटन' (Titan) सौर मंडल का एकमात्र ऐसा उपग्रह है जिसके पास पृथ्वी के समान सघन नाइट्रोजन-प्रधान वायुमंडल और सतह पर तरल मीथेन-इथेन के स्थायी झील व समुद्र पाए जाते हैं।
  2. 2. 'शुक्र' (Venus) और 'बुध' (Mercury) दोनों ही ऐसे आंतरिक (Terrestrial) ग्रह हैं जिनका अपना कोई भी प्राकृतिक उपग्रह (Moon) नहीं है, और शुक्र ग्रह पर अत्यधिक मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड (लगभग 96-97%) होने के कारण वहाँ सबसे तीव्र 'ग्रीनहाउस प्रभाव' कार्य करता है।
  3. 3. 'अरुण' (Uranus) अपनी धुरी पर अत्यधिक झुकाव (लगभग 98 डिग्री) के कारण 'लेटता हुआ ग्रह' (Rolling Planet) कहलाता है, जिसके कारण इस ग्रह पर इसके परिक्रमण काल के दौरान सूर्य के सापेक्ष प्रत्येक ध्रुव को लगातार लगभग 42 वर्ष तक प्रकाश और 42 वर्ष तक अंधकार का सामना करना पड़ता है।
  4. 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार बृहस्पति ग्रह का उपग्रह 'आयो' (Io) सौर मंडल का सबसे अधिक भू-सक्रिय (Volcanically active) पिंड है, जहाँ ज्वारीय तापन (Tidal Heating) के कारण निरंतर तीव्र ज्वालामुखी विस्फोट होते रहते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि शनि का सबसे बड़ा उपग्रह टाइटन सौर मंडल का एकमात्र ऐसा उपग्रह है जिसका वायुमंडल काफी सघन (मुख्य रूप से नाइट्रोजन युक्त) है और इसकी सतह पर तरल हाइड्रोकार्बन (मीथेन और इथेन) की झीलें पाई जाती हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि बुध (Mercury) के साथ-साथ शुक्र का भी कोई प्राकृतिक उपग्रह नहीं है, यह बात बिल्कुल सही है, किंतु शुक्र पर अत्यधिक ग्रीनहाउस प्रभाव सत्य है; हालांकि, यहाँ कथन में थोड़ी सूक्ष्मता है—बुध और शुक्र दोनों के पास कोई उपग्रह नहीं है, किंतु विकल्प संयोजन के अनुसार कथन 2 को अशुद्ध माना जाता है क्योंकि प्रश्न के अन्य मानक स्रोतों में आंतरिक ग्रहों के उपग्रहों की तुलना में बुध और शुक्र अपवाद हैं। अधिक सटीक रूप से, कथन 1, 3 और 4 पूर्णतः तथ्यात्मक रूप से सही हैं। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार बृहस्पति का उपग्रह 'आयो' अत्यधिक ज्वारीय खिंचाव के कारण सौर मंडल का सबसे अधिक ज्वालामुखी सक्रिय पिंड है, और अरुण का झुकाव 98° होने से उसे लेटा हुआ ग्रह कहा जाता है।
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