Geography
Asked 2 months ago · Viewed 17 times
महासागरीय उच्चावच, ज्वार-भाटा और प्रमुख जलसंधियों (Straits) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. महासागरीय मग्नतट (Continental Shelf) महाद्वीपों का डूबा हुआ विस्तारित भाग होता है, जिसकी औसत गहराई लगभग 200 मीटर तक होती है, और यह क्षेत्र खनिज तेल, प्राकृतिक गैस तथा विश्व के प्रमुख मत्स्य क्षेत्रों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
- 2. 'वसंत ज्वार' (Spring Tide) के दौरान सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा समकोण (Right Angle) की स्थिति में होते हैं, जिसके कारण सूर्य और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल एक-दूसरे के प्रभाव को संतुलित कर देते हैं और सबसे कमजोर ज्वार उत्पन्न होता है।
- 3. 'सुण्डा जलडमरूमध्य' (Sunda Strait) जावा द्वीप को सुमात्रा द्वीप से अलग करता है और जावा सागर को हिंद महासागर से जोड़ता है, जबकि 'बास जलडमरूमध्य' (Bass Strait) ऑस्ट्रेलिया को तस्मानिया द्वीप से अलग करता है।
- 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार ज्वार-भाटा की उत्पत्ति में चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी पर सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल की तुलना में अधिक प्रभावी होता है क्योंकि चंद्रमा पृथ्वी के बहुत अधिक निकट स्थित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि महासागरीय मग्नतट (Continental Shelf) महाद्वीपों का जलमग्न तटवर्ती भाग होता है जिसकी औसत गहराई 120 से 200 मीटर तक होती है और यहाँ प्रचुर मात्रा में खनिज तेल व मत्स्य क्षेत्र पाए जाते हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि समकोण स्थिति (Quadrature) के दौरान 'लघु ज्वार' (Neap Tide) उत्पन्न होता है, न कि वसंत ज्वार (Spring Tide)। वसंत ज्वार तब उत्पन्न होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध (Syzygy) में होते हैं। कथन 3 सही है क्योंकि सुण्डा जलडमरूमध्य जावा और सुमात्रा को अलग करता है और बास जलडमरूमध्य ऑस्ट्रेलिया को तस्मानिया से पृथक् करता है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार चंद्रमा की दूरी कम होने के कारण इसका ज्वार-उत्पादक बल सूर्य की तुलना में लगभग दोगुना प्रभावी होता है, अतः कथन 4 भी सही है। इसलिए सही विकल्प (a) है।
अगला प्रश्न →
पृथ्वी की आंतरिक संरचना, असंबद्धताओं (Discontinuities) और चट्टानों के चक्र…
← पिछला प्रश्न
पृथ्वी की वायुमंडलीय पवन प्रणालियों, आर्द्रता, वर्षा के…
Related Questions
→
भारत के अपवाह तंत्र के संदर्भ में, हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों की विशेषताओं और उनके विवर्तनिक इतिहास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हिमालयी नदियों का अधिकांश अपवाह तंत्र 'पूर्ववर्ती' (Antecedent) प्रकृति का है, जिसका अर्थ है कि ये नदियाँ हिमालय के उत्थान से पहले भी अस्तित्व में थीं और उत्थान के साथ-साथ गहरी घाटियों व गार्ज का निर्माण करती रहीं।
2. प्रायद्वीपीय पठार की अधिकांश नदियाँ (जैसे गोदावरी, कृष्णा और कावेरी) पूरब की ओर बहकर बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं और अपने मुहाने पर विशाल डेल्टा का निर्माण करती हैं, जबकि नर्मदा और ताप्ती नदियाँ भ्रंश घाटियों (Rift Valleys) से प्रवाहित होते हुए अरब सागर में 'एश्चुअरी' (Estuary) बनाती हैं।
3. प्रायद्वीपीय नदियों की एक प्रमुख विशेषता उनका युवा (Youthful) अवस्था में होना है, जिसके कारण वे तीव्र कटाव करती हैं और अपने मध्य तथा निचले मार्गों में बड़े-बड़े विसर्प (Meanders) और नौगम्य जलमार्गों का निर्माण करती हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार प्रायद्वीपीय भारत का जलविभाजक मुख्य रूप से पश्चिमी घाट (Western Ghats) द्वारा निर्धारित होता है, जो तट के समानांतर उत्तर से दक्षिण की ओर एक कगार के रूप में स्थित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
भारत के प्रमुख पर्वतीय दर्रों और उनकी अवस्थिति तथा उनसे संबंधित मार्गों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'बुर्जिला दर्रा' (Burzil Pass) कश्मीर घाटी को लद्दाख के देवसाई मैदानों से जोड़ता है और यह महान हिमालय श्रेणी में स्थित है, जो प्राचीन काल में मध्य एशिया से भारत के संपर्क मार्ग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।
2. 'शिपकी ला दर्रा' (Shipki La) जांस्कर श्रेणी में स्थित है, जिससे होकर 'सतलुज नदी' भारत में प्रवेश करती है, और यह हिमाचल प्रदेश को तिब्बत के साथ जोड़ता है।
3. 'यांग्याप दर्रा' (Yangyap Pass) अरुणाचल प्रदेश के उत्तर-पूर्वी छोर पर स्थित है, जहाँ से ब्रह्मपुत्र नदी (तिब्बत में त्संगपो) भारत के असम राज्य में प्रवेश करती है।
4. 'पालघाट दर्रा' (Palghat Gap) नीलगिरी और अन्नामलाई पहाड़ियों के बीच स्थित एक भ्रंश-जनित दर्रा है, जो तमिलनाडु के कोयंबटूर को केरल के कोच्चि और कालीकट से जोड़ता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
विश्व की प्रमुख महासागरीय जलधाराओं (Ocean Currents) और उनके तापमान, उत्पत्ति के कारणों तथा भौगोलिक प्रभावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'पेरू जलधारा' (Peru Current), जिसे हम्बोल्ट जलधारा भी कहा जाता है, प्रशांत महासागर की एक ठंडी जलधारा है जो दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट के सहारे उत्तर की ओर प्रवाहित होती है और इसके कारण यहाँ 'अटाकामा मरुस्थल' के निर्माण में सहायता मिलती है।
2. 'गोल्फ स्ट्रीम' (Gulf Stream) एक गर्म जलधारा है जो मैक्सिको की खाड़ी से निकलकर उत्तरी अटलांटिक महासागर में प्रवाहित होती है, और जब यह यूरोप के उत्तर-पश्चिमी तट के पास पहुँचती है तो इसे 'उत्तरी अटलांटिक प्रवाह' के रूप में जाना जाता है, जिसके प्रभाव से उच्च अक्षांशों पर स्थित यूरोपीय बंदरगाह सर्दियों में भी जमता नहीं है।
3. 'सोमाली जलधारा' (Somali Current) हिंद महासागर की एक ऐसी विशिष्ट जलधारा है जिसकी दिशा दक्षिण-पश्चिम मानसून और उत्तर-पूर्वी मानसून के प्रभाव के कारण वर्ष में दो बार पूरी तरह से उलट (Reverse) जाती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार महासागरीय जलधाराओं के निर्माण के लिए मुख्य रूप से पृथ्वी का घूर्णन (कोरियोलिस बल), प्रचलित पवनें (पछुआ और व्यापारिक पवनें), महासागरीय जल के तापमान और घनत्व में भिन्नता तथा तटीय रेखाओं की दिशा उत्तरदायी होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
भारत के अपवाह तंत्र के अंतर्गत हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों की तुलनात्मक विशेषताओं और उनके जलविभाजक (Water divides) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हिमालयी नदियाँ बारहमासी (Perennial) होती हैं क्योंकि इन्हें जल वर्षा के साथ-साथ पिघलते हुए हिमनदों (Glaciers) से भी प्राप्त होता है, जबकि प्रायद्वीपीय नदियाँ मुख्य रूप से अनित्य (Non-perennial या Seasonal) होती हैं और इनका प्रवाह पूरी तरह से मानसूनी वर्षा पर निर्भर करता है।
2. प्रायद्वीपीय भारत में जलविभाजक का निर्धारण मुख्य रूप से पश्चिमी घाट (Western Ghats) द्वारा किया जाता है, जो एक उत्तर-दक्षिण दिशा में स्थित उच्च कगार है और यहाँ से अधिकांश बड़ी नदियाँ निकलकर पूर्व की ओर बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं, जबकि कुछ छोटी नदियाँ पश्चिम की ओर बहकर अरब सागर में मिलती हैं।
3. सिंधु नदी तंत्र की प्रमुख सहायक नदी 'सतलुज' और ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र की प्रमुख सहायक नदी 'ब्रह्मपुत्र' स्वयं पूर्ववर्ती (Antecedent) नदियों के उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जो महान हिमालय को काटकर गहरे गार्ज का निर्माण करती हैं और भारत में प्रवेश करने से पहले तिब्बत के पठार से लंबी दूरी तय करती हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार प्रायद्वीपीय पठार की नदियाँ एक परिपक्व (Mature) अवस्था को प्राप्त कर चुकी हैं, जिसके कारण इनके तल ढाल बहुत कम हो जाते हैं और ये अपने मुहाने पर बड़े-बड़े डेल्टाओं का निर्माण करती हैं, जबकि नर्मदा और ताप्ती नदियाँ अपने मुहाने पर मुहाना (Estuary) बनाती हैं क्योंकि वे भ्रंश घाटियों से प्रवाहित होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
प्लेट विवर्तनिकी (Plate Tectonics) के संदर्भ में, 'हिमालय' का निर्माण किस प्रकार की प्लेट सीमांत क्रिया का परिणाम है?
→
पृथ्वी पर सबसे अधिक सौर ऊर्जा किस अक्षांश क्षेत्र में प्राप्त होती है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.