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Asked 2 months ago · Viewed 18 times

भारतीय जलवायु और मानसून के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. ग्रीष्मकाल में उत्तर-पश्चिम भारत और पाकिस्तान के मैदानी क्षेत्रों में विकसित होने वाला 'मानसून गर्त' (Monsoon Trough) वास्तव में निम्न वायुदाब की एक गर्त है, जो अंतःउष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) का ही ग्रीष्मकालीन उत्तर की ओर खिसका हुआ रूप है।
  2. 2. 'भारतीय मानसून का फटना' (Burst of Monsoon) उस अचानक होने वाली भारी और लगातार वर्षा को कहा जाता है, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून के केरल तट पर आगमन के साथ शुरू होती है और इसके साथ ही तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जाती है।
  3. 3. 'मैकडॉनल्ड' और अन्य विद्वानों के अनुसार, 'मैडेन-जूलियन दोलन' (MJO - Madden-Julian Oscillation) एक महासागरीय-वायुमंडलीय तरंग है जो पूर्वी से पश्चिमी दिशा में चलती है, और इसका सक्रिय चरण भारतीय महासागर के ऊपर होने पर मानसूनी वर्षा को बाधित करता है तथा सूखे की स्थिति पैदा करता है।
  4. 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार एल-नीनो (El Nino) के दौरान भारतीय उपमहाद्वीप पर वायुमंडलीय दाब में परिवर्तन देखा जाता है जिसे 'दक्षिणी दोलन' (Southern Oscillation) कहा जाता है, और जब दक्षिणी दोलन सूचकांक (SOI) ऋणात्मक होता है, तो यह भारत में कमजोर मानसून और कम वर्षा का स्पष्ट संकेत देता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: ग्रीष्मकाल में भारतीय उपमहाद्वीप पर अत्यधिक तपन के कारण उत्तर-पश्चिम भारत से लेकर बंगाल की खाड़ी तक एक निम्न वायुदाब की द्रोणी (Monsoon Trough) विकसित होती है, जो मूल रूप से उत्तर की ओर खिसका हुआ ITCZ है। कथन 2 सही है: दक्षिण-पश्चिम मानसून जब जून के पहले सप्ताह में केरल तट पर पहुँचता है, तो तटीय क्षेत्रों में अचानक तेज गरज और चमक के साथ भारी वर्षा शुरू होती है, जिसे 'मानसून का फटना' कहा जाता है और इससे तापमान में अचानक गिरावट आती है। कथन 3 गलत है: मैडेन-जूलियन दोलन (MJO) एक पूर्वगामी (Westward moving नहीं, बल्कि West-to-East propagating) ग्रह-स्तरीय उष्णकटिबंधीय वायुमंडलीय तरंग है; जब इसका संवहन चरण (Convective phase) हिंद महासागर के ऊपर होता है, तो यह भारतीय मानसून को बाधित नहीं करता बल्कि मानसूनी वर्षा को और अधिक सक्रिय (Enhance) करता है। कथन 4 सही है: विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार दक्षिणी दोलन सूचकांक (SOI) का ऋणात्मक होना ताहिती और डार्विन के बीच वायुदाब के असामान्य अंतर को दर्शाता है, जो एल-नीनो से जुड़ा होता है और भारत में कम या कमजोर मानसूनी वर्षा का कारण बनता है। अत: सही उत्तर विकल्प (a) है।
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