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Geography
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भारत की जलवायु और मानसून की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान 'तिब्बत का पठार' तीव्र तापीय तापन (Thermal Heating) के कारण एक शक्तिशाली निम्न वायुदाब केंद्र के रूप में विकसित होता है, जो ऊपरी क्षोभमंडल में 'पूर्वी जेट स्ट्रीम' (Easterly Jet Stream) को जन्म देकर मानसून को भारतीय उपमहाद्वीप की ओर आकर्षित करने में सहायक होता है।
  2. 2. 'मैडेन-जुलियन दोलन' (Madden-Julian Oscillation - MJO) एक पूर्व से पश्चिम की ओर बढ़ने वाली महासागरीय-वायुमंडलीय तरंग है, जिसके भारतीय महासागर क्षेत्र में 'सक्रिय चरण' (Active Phase) के दौरान भारत में मानसूनी वर्षा में वृद्धि होती है, जबकि 'अवरुद्ध चरण' (Suppressed Phase) सूखे की स्थिति उत्पन्न कर सकता है।
  3. 3. 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbances) भूमध्य सागर क्षेत्र में उत्पन्न होने वाली शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात प्रणालियाँ हैं, जो उपोष्ण कटिबंधीय पश्चिमी जेट स्ट्रीम द्वारा भारत के उत्तर-पश्चिम भाग में लाई जाती हैं और रबी की फसलों के लिए अत्यधिक लाभदायक होती हैं।
  4. 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में मानसून का 'अचानक फूटना' (Burst of Monsoon) मुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी व्यापारिक हवाओं के अचानक प्रतिवर्तन और भूमध्यरेखीय पछुआ हवाओं के भारतीय उपमहाद्वीप पर आगमन के परिणामस्वरुप भारी गर्जना और बिजली कड़कने के साथ वर्षा के आरंभ होने को दर्शाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन भारत की जलवायु, मानसून की उत्पत्ति और वर्षा के वितरण के संदर्भ में पूर्णतः सत्य हैं। तिब्बत के पठार का तापीय तापन मानसून की क्रियाविधि का एक प्रमुख इंजन है, MJO मानसूनी वर्षा को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है, पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत में शीतकालीन वर्षा लाते हैं, और मानसून का फटना तथा क्षेत्रीय वर्षा वितरण भारतीय मानसून तंत्र की मूलभूत विशेषताएँ हैं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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