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Geography
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भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों के वितरण, उनकी भूवैज्ञानिक संरचना और उत्पादन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत में पाए जाने वाले कुल धात्विक और अधात्विक खनिजों में से 'धारवाड़ क्रम' (Dharwar system) की चट्टानें सबसे अधिक समृद्ध हैं, जो मुख्य रूप से कर्नाटक के शिमोगा, चित्रदुर्ग और बेल्लारी क्षेत्रों में फैली हुई हैं तथा यहीं देश के अधिकांश लौह अयस्क, मैंगनीज और तांबा के भंडार पाए जाते हैं।
- 2. 'कुडप्पा क्रम' की चट्टानें मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश के कुडप्पा बेसिन में विकसित हैं, जिनमें धातु-रहित खनिज जैसे कि चूना पत्थर, एस्बेस्टस, संगमरमर, और स्टेटाइट प्रचुर मात्रा में मिलते हैं, किंतु इनमें उच्च श्रेणी के धात्विक खनिजों का लगभग पूर्ण अभाव होता है।
- 3. भारत में 'बॉक्साइट' (Bauxite), जो एल्युमिनियम का मुख्य अयस्क है, के उत्पादन में ओडिशा राज्य का स्थान प्रथम है, और यहाँ के पंचपतमाली (कोरापुट) क्षेत्र में देश का सबसे बड़ा बॉक्साइट भंडार स्थित है।
- 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में अभ्रक (Mica) के उत्पादन में आंध्र प्रदेश शीर्ष स्थान पर है, जबकि अभ्रक की 'रूबी माइका' (Ruby Mica) किस्म का प्रमुख उत्पादन झारखंड के कोडरमा-हजारीबाग पेटी से होता है जिसे विश्व स्तर पर 'मिका बेल्ट' के रूप में जाना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। भारत की भूवैज्ञानिक संरचना में 'धारवाड़ क्रम' की चट्टानें अत्यधिक कायांतरित और खनिज-समृद्ध हैं जहाँ लौह अयस्क, सोना, मैंगनीज और तांबा प्रचुरता में मिलते हैं। 'कुडप्पा क्रम' की चट्टानें अवसादी निक्षेपों से बनी हैं जिनमें मुख्य रूप से अधात्विक खनिज पाए जाते हैं। बॉक्साइट उत्पादन में ओडिशा प्रथम है और कोरापुट में विशाल भंडार हैं। साथ ही, अभ्रक के उत्पादन में आंध्र प्रदेश अग्रणी है जबकि झारखंड की कोडरमा पेटी 'रूबी माइका' के लिए प्रसिद्ध है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार देश का खनिज वितरण प्रायद्वीपीय पठार की प्राचीन चट्टानों में केंद्रित है।
Related Questions
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भूकंपीय तरंगों, ज्वालामुखी उद्गार की क्रियाशीलता और सुनामी की गतिशीलता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भूकंपीय तरंगों में 'प्राथमिक तरंगें' (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) होती हैं और ये ध्वनि तरंगों की भाँति ठोस, तरल एवं गैसीय तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, जबकि 'द्वितीयक तरंगें' (S-waves) अनुप्रस्थ (Transverse) होती हैं और केवल ठोस माध्यमों में ही संचरण करती हैं।
2. 'शिल्ड ज्वालामुखी' (Shield Volcanoes) मुख्य रूप से कम चिपचिपे और अधिक तरल बेसाल्टिक लावा के शांत प्रवाह से बनते हैं, जिसके कारण ये बहुत कम ऊँचे और चौड़े गुंबद के आकार के होते हैं, जैसे हवाई द्वीप के ज्वालामुखी।
3. सुनामी तरंगें जब खुले और गहरे महासागर में होती हैं, तो उनकी तरंगदैर्ध्य (Wavelength) अत्यधिक लंबी और ऊँचाई (Amplitude) बहुत कम होती है, जिसके कारण गहरे समुद्र में जहाजों को इनका आभास नहीं होता, परंतु तटों के उथले पानी में पहुँचने पर इनकी गति मंद हो जाती है और आयाम अत्यधिक बढ़ जाता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार सुंडा ट्रेन्च (Sundah Trench) और प्रशांत महासागर की अभिसारी प्लेट सीमाओं के क्षेत्र में विवर्तनिक हलचलें सुनामी और तीव्र भूकंप आने का प्रमुख कारण हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सुनामी (Tsunami) और ज्वालामुखी विस्फोट से जुड़ी विभिन्न भौगोलिक प्रक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सुनामी तरंगें गहरे महासागरों में अपनी अत्यधिक लंबी तरंग दैर्ध्य (Wavelength) और कम ऊँचाई के कारण जहाजों को महसूस नहीं होती हैं, किंतु तटीय उथले क्षेत्रों में पहुँचने पर जल की गहराई कम होने के कारण इनकी तरंग दैर्ध्य घट जाती है और गति कम हो जाती है, जिससे इनकी ऊँचाई अत्यधिक बढ़ जाती है।
2. 'पीलिको' (Peléean) या विसुवियस तुल्य ज्वालामुखी उद्गार अत्यधिक विस्फोटक होते हैं, जिनमें अत्यंत उच्च श्यानता (High Viscosity) और सिलिका युक्त अम्लीय लावा निकलता है, जो तुरंत जमकर काल्डेरा या गर्त का निर्माण करता है और इसमें बेसाल्टिक लावे की मात्रा नगण्य होती है।
3. 'सुपरवोलcano' (Supervolcano) के उद्गार से निकलने वाली राख, गैस और प्यूमिस के विशाल बादलों को 'पायरोक्लास्टिक फ्लो' (Pyroclastic Flow) कहा जाता है, जो अत्यधिक उच्च तापमान पर गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से ढालों के सहारे बहुत तीव्र गति से नीचे की ओर बहते हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार प्रशांत महासागर की 'रिंग ऑफ फायर' (Ring of Fire) दुनिया का सबसे सक्रिय भूकंपीय और ज्वालामुखीय क्षेत्र है, जहाँ मुख्य रूप से अभिसारी (Convergent) प्लेट सीमाओं के कारण विश्व के अधिकांश गहरे भूकंप और सुनामी उत्पन्न होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पृथ्वी की आंतरिक संरचना और विभिन्न प्रकार की चट्टानों (शैल चक्र) की गतिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'मोहोरविक असंबद्धता' (Mohorovicic Discontinuity) क्रस्ट और मेंटल के बीच स्थित होती है, जहाँ प्राथमिक भूकंपीय तरंगों (P-waves) के वेग में अचानक तीव्र वृद्धि दर्ज की जाती है।
2. रूपांतरित चट्टानें (Metamorphic Rocks) केवल अवसादी चट्टानों के अत्यधिक ताप और दाब के प्रभाव से अपनी मूल संरचना बदलने के कारण बनती हैं, इसमें आग्नेय चट्टानों की कोई भूमिका नहीं होती है।
3. बेसाल्ट एक बहिर्भेदी (Extrusive) आग्नेय चट्टान है, जो मैग्मा के सतह पर आकर तेजी से ठंडे होने के कारण सूक्ष्म कणों वाली (Fine-grained) संरचना का निर्माण करती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'एस्थेनोस्फेयर' (Asthenosphere) ऊपरी मेंटल का वह भाग है जो अत्यधिक उच्च तापमान के कारण आंशिक रूप से पिघला हुआ (Plastic/Semi-fluid) होता है और विवर्तनिक प्लेटों की गति के लिए उत्तरदायी है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों के वितरण, उनकी उत्पत्ति और विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत का अधिकांश कोकिंग और नॉन-कोकिंग कोयला 'गोडवाना क्रम' की तलछटी चट्टानों से प्राप्त होता है, जो मुख्य रूप से दामोदर, महानदी, सोन और गोदावरी नदी घाटियों में संकेंद्रित हैं, और इस कोयले में उच्च 'राख (Ash) की मात्रा' तथा निम्न सल्फर की विशेषता पाई जाती है।
2. देश में 'लिग्नाइट कोयला' (भूरा कोयला) के सबसे बड़े प्रमाणित भंडार तमिलनाडु के नेवेली क्षेत्र में स्थित हैं, इसके अलावा राजस्थान के पलाना, गुजरात के कच्छ और जम्मू-कश्मीर के करेवा निक्षेपों में भी इसके निक्षेप पाए जाते हैं।
3. भारत में 'यूरेनियम' के प्रमुख निक्षेप केवल झारखंड के सिंहभूम क्षेत्र और आंध्र प्रदेश के तुमलापल्ली तक ही सीमित हैं, तथा पूर्वोत्तर भारत के मेघालय या राजस्थान के अरावली क्षेत्र में यूरेनियम के कोई भी आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण भंडार नहीं खोजे गए हैं।
4. कोयला और पेट्रोलियम के अतिरिक्त, भारत के अपतटीय क्षेत्रों में 'मुंबई हाई' देश का सबसे बड़ा तेल उत्पादक क्षेत्र है, जहाँ खनिज तेल मुख्य रूप से मियोसीन और ऑलिगोसीन युग के चूना पत्थर तथा बलुआ पत्थर की संरचनाओं से निकाला जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वायुमंडल की विभिन्न परतों, उनके तापमान विन्यास और वैश्विक वायुदाब पेटियों (Global Pressure Belts) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. क्षोभमंडल (Troposphere) में ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान में सामान्य ह्रास दर (Normal Lapse Rate) के अनुसार कमी आती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि इस परत को प्रत्यक्ष रूप से सूर्य के प्रकाश से अधिक पृथ्वी के धरातल से निकलने वाली पार्थिव विकिरण (Terrestrial Radiation) से ऊर्जा प्राप्त होती है।
2. समताप मंडल (Stratosphere) की निचلی सीमा पर तापमान स्थिर रहता है, किंतु जैसे-जैसे हम इस परत में ऊपर की ओर बढ़ते हैं, ओजोन अणुओं द्वारा पराबैंगनी किरणों के अवशोषण के कारण तापमान में तीव्र वृद्धि होने लगती है।
3. उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटियाँ (Subtropical High-Pressure Belts), जिन्हें 'अश्व अक्षांश' भी कहा जाता है, मुख्य रूप से तापीय रूप से प्रेरित (Thermally induced) पेटियाँ हैं जो अत्यधिक ठंडी हवाओं के ध्रुवों से नीचे बैठने के कारण बनती हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार मध्यमंडल (Mesosphere) वायुमंडल की सबसे ठंडी परत है, जिसमें ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान पुनः गिरने लगता है और इसकी ऊपरी सीमा (Mesopause) पर तापमान -90°C तक पहुँच जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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