BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Geography
11 views

भारत की जनसांख्यिकीय विशेषताओं, वर्ष 2011 की जनगणना के विश्लेषणात्मक पहलुओं और मानवजातिय (Racial) वर्गीकरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. प्रसिद्ध मानवशास्त्री बी.एस. गुहा (B.S. Guha) द्वारा प्रस्तुत भारतीय नस्कीय वर्गीकरण में 'ब्रेसिफेल्स' (Brachycephals) समूह के अंतर्गत अल्पाइन, डिनारिक और आर्मेनॉइड उप-जातियाँ शामिल हैं, जो मुख्य रूप से पश्चिमी बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक के क्षेत्रों में पाई जाती हैं।
  2. 2. वर्ष 2011 की अंतिम जनगणना के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या में बाल जनसंख्या (0-6 आयु वर्ग) का अनुपात लगभग 13.1% है, और इस आयु वर्ग में सबसे कम लिंगानुपात (Child Sex Ratio) वाला राज्य हरियाणा है, जबकि सर्वोच्च बाल लिंगानुपात वाला राज्य मिजोरम है।
  3. 3. भारत में आंतरिक प्रवास (Internal Migration) के दौरान ग्रामीण से नगरीय क्षेत्रों की ओर होने वाले पुरुष प्रवास का प्रमुख कारण 'रोजगार और शिक्षा' है, जबकि कुल आंतरिक प्रवासियों (ग्रामीण-ग्रामीण सहित) में महिलाओं के प्रवास का सबसे बड़ा कारण 'विवाह' दर्ज किया गया है।
  4. 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 2011 की जनगणना के समय भारत का घनत्व (Density of Population) 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था, जिसमें सर्वाधिक जनघनत्व वाला राज्य बिहार (1106) और केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली शीर्ष स्थान पर था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। बी.एस. गुहा का नस्कीय वर्गीकरण भारतीय मानवविज्ञान में अत्यधिक महत्वपूर्ण है जिसके तहत 'ब्रेसिफेल्स' मध्यम से चौड़े सिर वाले लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 0-6 आयु वर्ग का बाल लिंगानुपात हरियाणा में सबसे कम (834) और अरुणाचल प्रदेश/मिजोरम जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में बेहतर रहा है (नोट: मिजोरम का बाल लिंगानुपात 970 है)। ग्रामीण से नगरीय प्रवास में रोजगार प्रमुख कारण है जबकि कुल आंतरिक प्रवास में विवाह की हिस्सेदारी लगभग 49% से अधिक है जो मुख्य रूप से महिलाओं में होता है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत की जनगणना 2011 के अंतिम आँकड़े देश के सामाजिक-आर्थिक नियोजन का आधार हैं।
Share:

Related Questions

भारतीय मृदा के वर्गीकरण और उनकी रासायनिक एवं भौतिक विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लाल और पीली मृदा (Red and Yellow Soils) का लाल रंग मुख्य रूप से रवेदार और कायांतरित चट्टानों में लोहे के व्यापक विसरण (Diffusion) के कारण होता है, जबकि इसका पीला रंग इसमें जलयोजन (Hydration) की स्थिति उत्पन्न होने के बाद दिखाई देता है। 2. लैटेराइट मृदा (Laterite Soil) उच्च तापमान और भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में तीव्र निक्षालन (Leaching) का परिणाम है, जिसमें ह्यूमस की मात्रा प्रचुर होती है, किंतु सिलिका और चूने का निक्षालन हो जाने के कारण यह मृदा कृषि के लिए अत्यधिक उपजाऊ होती है और इसमें उर्वरकों की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती। 3. क्षारीय एवं लवणीय मृदा (Saline and Alkaline Soils), जिन्हें 'रेर', 'उह्र', 'कल्लर' या 'चोपन' भी कहा जाता है, में सोडियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम का अनुपात अधिक होता है, और यह शुष्क तथा अर्ध-शुष्क जलवायु वाले उन क्षेत्रों में विकसित होती है जहाँ जल निकास (Drainage) की उचित व्यवस्था नहीं होती। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? भारत के प्रमुख पर्वतीय दर्रों (Mountain Passes) और उनकी भौगोलिक स्थिति के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. शिपकी ला दर्रा (Shipki La) – यह दर्रा जाँस्कर श्रेणी में स्थित है, जो सतलुज नदी के भारत में प्रवेश करने का मार्ग प्रदान करता है और हिमाचल प्रदेश को तिब्बत से जोड़ता है। 2. चांग ला दर्रा (Chang La) – यह लद्दाख श्रेणी में स्थित एक उच्च पर्वतीय दर्रा है, जो लेह को अक्साई चीन क्षेत्र से होते हुए पैंगोंग त्सो झील के मार्ग से जोड़ता है। 3. दीफू दर्रा (Diphu Pass) – यह अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र में भारत, म्यांमार और चीन की त्रिसंधि (Tri-junction) के पास स्थित एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण दर्रा है। 4. पालघाट दर्रा (Palakkad Gap) – यह नीलगिरि और अन्नामलाई पहाड़ियों के बीच स्थित एक प्रमुख विदर (Gap) है, जो तमिलनाडु के कोयंबटूर को केरल के कोच्चि से जोड़ता है। उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं? भारत की मृदा (मिट्टी) के वर्गीकरण, उनके खनिज संगठन और भौगोलिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जलोढ़ मृदा (Alluvial Soils) देश के कुल क्षेत्रफल के सबसे बड़े हिस्से (लगभग 43%) पर फैली हुई हैं, जिनका निर्माण मुख्य रूप से हिमालय की नदियों द्वारा लाए गए अवसादों के निक्षेपण से हुआ है, और इनमें पोटाश की मात्रा पर्याप्त होती है जबकि फॉस्फोरस की कमी पाई जाती है। 2. काली मृदा (Black Soils), जिन्हें 'रेगुर मृदा' भी कहा जाता है, दक्कन के बेसाल्ट ट्रैप क्षेत्र में मुख्य रूप से पाई जाती हैं; इनमें 'स्वतः जुताई' (Self-ploughing) का विशेष गुण पाया जाता है क्योंकि गीली होने पर ये चिपचिपी हो जाती हैं और सूखने पर इनमें गहरी दरारें पड़ जाती हैं। 3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार लैटेराइट मृदा (Laterite Soils) उच्च तापमान और भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में निक्षालन (Leaching) की प्रक्रिया के परिणामस्वरुप विकसित होती है, जिसमें सिलिका का निक्षालन हो जाने के कारण लोहे और एल्यूमीनियम के ऑक्साइड शेष बच जाते हैं, और ईंटें बनाने के लिए यह मृदा सर्वाधिक उपयुक्त होती है। 4. लाल और पीली मृदाएँ (Red and Yellow Soils) प्रायद्वीपीय पठार के पूर्वी और दक्षिणी भागों में रवेदार आग्नेय चट्टानों के अपक्षय से बनती हैं, तथा इनका लाल रंग फेरिक ऑक्साइड की उपस्थिति के कारण होता है, जबकि जलयोजन (Hydration) के बाद इनका रंग पीला हो जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारतीय मानसून की क्रियाविधि और वर्षा के स्थानिक वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा का स्थानिक वितरण मुख्य रूप से उच्चावच (Relief) और स्थलाकृतिक अवरोधों पर निर्भर करता है, यही कारण है कि पश्चिमी घाट के पवन-विमुख (Leeward) ढाल पर स्थित वृष्टिछाया क्षेत्र में बहुत कम वर्षा होती है। 2. 'अल नीनो' (El Niño) परिघटना के दौरान प्रशांत महासागर के पूर्वी और मध्य भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में समुद्री सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि होती है, जो पेरू तट के पास ठंडी धाराओं को मजबूत करती है और सामान्यतः भारतीय मानसून को अत्यधिक प्रबल तथा सक्रिय बनाती है। 3. 'भारतीय हिंद महासागर द्विध्रुव' (Indian Ocean Dipole - IOD) का 'सकारात्मक चरण' (Positive Phase) पश्चिमी हिंद महासागर को अधिक गर्म और पूर्वी हिंद महासागर को अपेक्षाकृत ठंडा बनाता है, जो भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा को बढ़ाने में अनुकूल भूमिका निभाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? भारत के प्रमुख पर्वतीय क्षेत्रों, पर्वत श्रेणियों और उनकी भौगोलिक अवस्थिति एवं घाटियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'पीर पंजाल श्रेणी' (Pir Panjal Range) लघु हिमालय (Lesser Himalayas) की सबसे लंबी और महत्वपूर्ण श्रेणी है, जो कश्मीर घाटी को जम्मू क्षेत्र से अलग करती है और इसी श्रेणी में प्रसिद्ध 'बनिहाल दर्रा' स्थित है जो जवाहर सुरंग के माध्यम से सड़क मार्ग प्रदान करता है। 2. 'ज़ास्कर श्रेणी' (Zaskar Range) महान हिमालय के उत्तर में समानांतर रूप से फैली हुई है, जो लद्दाख क्षेत्र को तिब्बत से अलग करती है और इसके पूर्वी भाग में प्रसिद्ध 'मरुसू दर्रा' तथा 'फोटो ला' जैसे महत्वपूर्ण दर्रे स्थित हैं। 3. 'चुंबी घाटी' (Chumbi Valley) एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घाटी है जो भारत, भूटान और चीन (तिब्बत) के त्रिसंगम (Tri-junction) के समीप स्थित है और यह सिक्किम को तिब्बत से जोड़ने वाले 'नाथू ला' तथा 'जेलेप ला' दर्रों के निकट अवस्थित है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'कुल्लू घाटी' (Kullu Valley) धौलाधार और पीर पंजाल श्रेणियों के बीच ब्यास नदी द्वारा निर्मित एक विस्तृत अनुदैर्ध्य घाटी है, जिसे 'देवों की घाटी' भी कहा जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.